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Jammu News: खेत बचाने के लिए किसानों ने बढ़ाया कदम
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कृषि विभाग ने गांव पोठा में लगाया जागरूकता शिविर
संवाद न्यूज एजेंसी
अखनूर। कृषि विभाग अखनूर ने खेत बचाओ अभियान के तहत सोमवार को पंचायत चक भगवाना के गांव पोठा में जागरूकता शिविर लगाया। शिविर में किसानों को मिट्टी के स्वास्थ्य संरक्षण, प्राकृतिक खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक किया गया।
कार्यक्रम में उप कृषि विकास अधिकारी राजन शर्मा, कृषि विशेषज्ञ अस्मिता शर्मा और जोन ज्याैड़ियां के अधिकारियों ने किसानों को विभिन्न कृषि योजनाओं और वैज्ञानिक खेती से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं।
अधिकारियों ने किसानों को मिट्टी जांच का महत्व समझाते हुए बताया कि नियमित जांच से भूमि में उपलब्ध पोषक तत्वों की सही जानकारी मिलती है। इससे आवश्यकता के अनुसार उर्वरकों का उपयोग किया जा सकता है। खेती की लागत कम होने के साथ-साथ उत्पादन में भी वृद्धि होती है। शिविर में प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि, संतुलित उर्वरक प्रयोग, जल संरक्षण तथा फसल उत्पादन बढ़ाने की वैज्ञानिक तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है, जबकि प्राकृतिक एवं संतुलित कृषि पद्धतियां अपनाने से भूमि का स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है और फसलों की गुणवत्ता में सुधार होता है। कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों ने किसानों से टिकाऊ कृषि पद्धतियां अपनाने की अपील करते हुए कहा कि उपजाऊ भूमि का संरक्षण समय की आवश्यकता है। इससे न केवल खेती लाभकारी बनेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी कृषि योग्य भूमि सुरक्षित रह सकेगी। शिविर में क्षेत्र के बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर कृषि विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त की।
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संवाद न्यूज एजेंसी
अखनूर। कृषि विभाग अखनूर ने खेत बचाओ अभियान के तहत सोमवार को पंचायत चक भगवाना के गांव पोठा में जागरूकता शिविर लगाया। शिविर में किसानों को मिट्टी के स्वास्थ्य संरक्षण, प्राकृतिक खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक किया गया।
कार्यक्रम में उप कृषि विकास अधिकारी राजन शर्मा, कृषि विशेषज्ञ अस्मिता शर्मा और जोन ज्याैड़ियां के अधिकारियों ने किसानों को विभिन्न कृषि योजनाओं और वैज्ञानिक खेती से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं।
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अधिकारियों ने किसानों को मिट्टी जांच का महत्व समझाते हुए बताया कि नियमित जांच से भूमि में उपलब्ध पोषक तत्वों की सही जानकारी मिलती है। इससे आवश्यकता के अनुसार उर्वरकों का उपयोग किया जा सकता है। खेती की लागत कम होने के साथ-साथ उत्पादन में भी वृद्धि होती है। शिविर में प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि, संतुलित उर्वरक प्रयोग, जल संरक्षण तथा फसल उत्पादन बढ़ाने की वैज्ञानिक तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है, जबकि प्राकृतिक एवं संतुलित कृषि पद्धतियां अपनाने से भूमि का स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है और फसलों की गुणवत्ता में सुधार होता है। कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों ने किसानों से टिकाऊ कृषि पद्धतियां अपनाने की अपील करते हुए कहा कि उपजाऊ भूमि का संरक्षण समय की आवश्यकता है। इससे न केवल खेती लाभकारी बनेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी कृषि योग्य भूमि सुरक्षित रह सकेगी। शिविर में क्षेत्र के बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर कृषि विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त की।
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