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Jammu News: अरनिया में यूरिया की किल्लत, भटक रहे किसान
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क्षेत्र के डीलरों ने नैनो यूरिया के खिलाफ आवाज उठाई तो बंद कर दिया कोटा
संवाद न्यूज एजेंसी
अरनिया। क्षेत्र में यूरिया की किल्लत बड़े पैमाने पर है। इसके चलते क्षेत्र के किसान भटक रहे हैं। किसानों का कहना है कि 10 दिनों से इलाके में यूरिया की किल्लत बनी हुई है। जरूरत के मुताबिक यूरिया नहीं मिल रही है। वहीं बारिश होने से खेतों में यूरिया डालना अनिवार्य हो गया है।
किसानों का कहना है कि डीलरों के पास जा रहे हैं, लेकिन वह यूरिया के लिए उन्हें मना कर रहे हैं। अगर ऐसे ही हालात रहे तो इस बार गेहूं की फसल प्रभावित हो सकती है। किसानों ने बताया कि यह क्षेत्र खेती-बाड़ी पर निर्भर है। कृषि विभाग को इसकी तरफ तवज्जो देनी चाहिए। तय समय पर यूरिया की सुविधा करवानी चाहिए, परंतु कृषि विभाग की लापरवाही उनकी फसल पर भारी पड़ सकती है। अगर तय समय पर खेतों में यूरिया नहीं डाला गया तो किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा।
यूरिया के बारे में डीलरों ने बताया कि हाल ही में क्षेत्र और आसपास के डीलरों ने सप्लायर की मर्जी के अनुसार नैनो यूरिया को लेकर मुख्य कृषि अधिकारी विनोद कुंडल से शिकायत की थी, जिसको लेकर मुख्य कृषि अधिकारी द्वारा 27 जनवरी को क्षेत्र का दौरा किया गया। सभी डीलरों से किसानों को जबरदस्ती नैनो यूरिया देने को लेकर फटकार लगाई थी। डीलरों ने कहा था कि सप्लायर की तरफ से 200 यूरिया के बैग के साथ उन्हें 75 बोतलें दी जा रही हैं, जिसके चलते किसानों को नैनो यूरिया देना उनके लिए जरूरी हो गया है। उसके बाद मुख्य कृषि अधिकारी ने डीलरों को आश्वासन दिया था कि उनके साथ सप्लायर द्वारा जबरदस्ती नहीं की जाएगी और डीलर अपनी जरूरत के अनुसार ही सप्लायर से नैनो यूरिया की बोतलें ले सकते हैं, लेकिन सप्लायर की तरफ से भी जबरदस्ती नहीं की जाएगी, और अगर ऐसा होता है तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और उसी मुद्दे को लेकर अरनिया क्षेत्र के डीलरों का यूरिया का कोटा बंद कर दिया गया है।
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मुख्य कृषि अधिकारी को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए और डीलरों को उनकी मांग के मुताबिक यूरिया मुहैया करवानी चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो उनका कामकाज ठप हो जाएगा।
इस मुद्दे पर किसान सलाहकार बोर्ड के सदस्य बसंत सिंह सैनी ने बताया कि बारिश हो जाने से यूरिया की मांग बढ़ जाती है। जम्मू-कश्मीर में जिस पैमाने पर गेहूं लगाई जाती है, उस हिसाब से यूरिया स्टॉक करने के लिए गोदाम उपलब्ध नहीं हैं। बारिश होने से हर किसान यूरिया खरीदने के लिए पहुंच जाता है, जिसके चलते किल्लत महसूस होती है
किसान लवली सिंह ने बताया कि जरूरत के अनुसार कृषि विभाग कोई भी चीज समय पर पूरी नहीं कर पाता है। यहां एक और केंद्र सरकार किसानों को सशक्त करने में लगी हुई है, वहीं दूसरी और जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है।
इफ्को के जम्मू के फील्ड ऑफिसर विवेक वर्मा ने बताया कि तय समय पर यूरिया इलाके में पहुंचा दिया जाता है। 24 जनवरी को लास्ट रैक लगाया गया था, बुधवार को भी यूरिया का स्टॉक पहुंच जाएगा और उसके बाद डीलरों की मांग के अनुसार यूरिया पहुंचा दिया जाएगा।
इस मुद्दे पर सब डिविजनल एग्रीकल्चर ऑफीसर आरएस पुरा अश्वनी कुमार ने बताया कि इलाके के डीलरों की तरफ से सप्लायर पर पक्षपात करने की शिकायत की गई है। इसके लिए मुख्य कृषि दफ्तर जम्मू में बैठक रखी गई है। डीलरों को खाद किसी भी कीमत पर मुहैया करवाई जाएगी तानाशाही रवैया नहीं चलेगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
अरनिया। क्षेत्र में यूरिया की किल्लत बड़े पैमाने पर है। इसके चलते क्षेत्र के किसान भटक रहे हैं। किसानों का कहना है कि 10 दिनों से इलाके में यूरिया की किल्लत बनी हुई है। जरूरत के मुताबिक यूरिया नहीं मिल रही है। वहीं बारिश होने से खेतों में यूरिया डालना अनिवार्य हो गया है।
किसानों का कहना है कि डीलरों के पास जा रहे हैं, लेकिन वह यूरिया के लिए उन्हें मना कर रहे हैं। अगर ऐसे ही हालात रहे तो इस बार गेहूं की फसल प्रभावित हो सकती है। किसानों ने बताया कि यह क्षेत्र खेती-बाड़ी पर निर्भर है। कृषि विभाग को इसकी तरफ तवज्जो देनी चाहिए। तय समय पर यूरिया की सुविधा करवानी चाहिए, परंतु कृषि विभाग की लापरवाही उनकी फसल पर भारी पड़ सकती है। अगर तय समय पर खेतों में यूरिया नहीं डाला गया तो किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा।
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यूरिया के बारे में डीलरों ने बताया कि हाल ही में क्षेत्र और आसपास के डीलरों ने सप्लायर की मर्जी के अनुसार नैनो यूरिया को लेकर मुख्य कृषि अधिकारी विनोद कुंडल से शिकायत की थी, जिसको लेकर मुख्य कृषि अधिकारी द्वारा 27 जनवरी को क्षेत्र का दौरा किया गया। सभी डीलरों से किसानों को जबरदस्ती नैनो यूरिया देने को लेकर फटकार लगाई थी। डीलरों ने कहा था कि सप्लायर की तरफ से 200 यूरिया के बैग के साथ उन्हें 75 बोतलें दी जा रही हैं, जिसके चलते किसानों को नैनो यूरिया देना उनके लिए जरूरी हो गया है। उसके बाद मुख्य कृषि अधिकारी ने डीलरों को आश्वासन दिया था कि उनके साथ सप्लायर द्वारा जबरदस्ती नहीं की जाएगी और डीलर अपनी जरूरत के अनुसार ही सप्लायर से नैनो यूरिया की बोतलें ले सकते हैं, लेकिन सप्लायर की तरफ से भी जबरदस्ती नहीं की जाएगी, और अगर ऐसा होता है तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और उसी मुद्दे को लेकर अरनिया क्षेत्र के डीलरों का यूरिया का कोटा बंद कर दिया गया है।
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मुख्य कृषि अधिकारी को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए और डीलरों को उनकी मांग के मुताबिक यूरिया मुहैया करवानी चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो उनका कामकाज ठप हो जाएगा।
इस मुद्दे पर किसान सलाहकार बोर्ड के सदस्य बसंत सिंह सैनी ने बताया कि बारिश हो जाने से यूरिया की मांग बढ़ जाती है। जम्मू-कश्मीर में जिस पैमाने पर गेहूं लगाई जाती है, उस हिसाब से यूरिया स्टॉक करने के लिए गोदाम उपलब्ध नहीं हैं। बारिश होने से हर किसान यूरिया खरीदने के लिए पहुंच जाता है, जिसके चलते किल्लत महसूस होती है
किसान लवली सिंह ने बताया कि जरूरत के अनुसार कृषि विभाग कोई भी चीज समय पर पूरी नहीं कर पाता है। यहां एक और केंद्र सरकार किसानों को सशक्त करने में लगी हुई है, वहीं दूसरी और जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है।
इफ्को के जम्मू के फील्ड ऑफिसर विवेक वर्मा ने बताया कि तय समय पर यूरिया इलाके में पहुंचा दिया जाता है। 24 जनवरी को लास्ट रैक लगाया गया था, बुधवार को भी यूरिया का स्टॉक पहुंच जाएगा और उसके बाद डीलरों की मांग के अनुसार यूरिया पहुंचा दिया जाएगा।
इस मुद्दे पर सब डिविजनल एग्रीकल्चर ऑफीसर आरएस पुरा अश्वनी कुमार ने बताया कि इलाके के डीलरों की तरफ से सप्लायर पर पक्षपात करने की शिकायत की गई है। इसके लिए मुख्य कृषि दफ्तर जम्मू में बैठक रखी गई है। डीलरों को खाद किसी भी कीमत पर मुहैया करवाई जाएगी तानाशाही रवैया नहीं चलेगा।