बचपन से ही देखने में थे असमर्थ, नहीं मानी हार, अब पेट पालने के लिए करते हैं ये काम
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श्रीनगर में जन्म से नेत्रहीन दो भाई रहते हैं। जो अपनी रोजी-रोटी का जुगाड़ खुद काम करके करते हैं। दोनों भाई रजाई बनाने का काम करते हैं। यह दोनों भाईयों ने बताया कि उन्होने यह काम अपने पिता से सीखा क्योंकि पिता नहीं चाहते थे कि हम दोनों भाई भीख मांगकर खाए।
Srinagar: Two brothers Ghulam Nabi Teli and Mohamad Hussian who are visually challenged by birth, earn their livelihood by sewing quilts. The brothers say, "we learnt this from our father. Happy that we are able to work. Parents' values don't allow us to beg". #JammuAndKashmir pic.twitter.com/jOU5FAoHo2
— ANI (@ANI) May 2, 2019विज्ञापन
श्रीनगर इलाके में रहने वाले गुलाब नबी तेली और मोहम्मद हुसैन दो भाई रहते हैं। दोनों भाई जन्म से दृष्टिबाधित हैं, लेकिन दोनों अपनी आजीविका रजाई बना कर चलाते हैं। चूंकि रजाई बनाना कोई बहुत बड़ी बात नही है, लेकिन आंखों से देख न पाने के बावजूद भी यह दोनों रजाई सिल लेते है। यह अपने आप में बड़ी बात है। जब दोनों भाईयों से इस बारे में बात की गई तो इन्होंने बताया कि यह काम हम लोगों ने अपने पिता से सीखा हैं। हम लोग जन्म से नेत्रहीन हैं और पिता जी नही चाहते थे कि हम दोनों किसी के आगे हाथ फैला कर भीख मांगें। इसलिए पिताजी ने ही हम दोनों को रजाई बनाने का काम सिखाया और आत्मनिर्भर बनाया।