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Jammu News: बांदीपोरा में प्रशासन ने गुरेज और वुलर को किया बंद
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लोगों ने कहा- काम कैसे चलेगा, स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा असर
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदीपोरा। पहलगाम हमले के बाद जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए प्रशासन ने मंगलवार को वुलर और गुरेज घाटी समेत 48 पर्यटन स्थलों को बंद कर दिया। जानकारी के मुताबिक गैर स्थानीय पर्यटकों को गुरेज घाटी में जाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। अमर उजाला से बातचीत में स्थानीय लोगों ने कहा कि उनकी आजीविका पर्यटन पर निर्भर है। और इस फैसले से उन्हें काफी नुकसान पहुंचेगा।
एक स्थानीय मोहम्मद हमजा ने कहा, हमारे पास कोई सरकारी नौकरी नहीं थी, हम पर्यटन से अपनी आजीविका चलाते थे। अगर इसमें गिरावट आई तो हम प्रभावित होंगे। पर्यटन उद्योग से जुड़े स्थानीय निवासी मोहम्मद हमजा ने शांति की उम्मीद में युद्ध विराम समझौते के बाद एक होटल खोला है। उनका कहना है कि अगर युद्ध विराम उल्लंघन जारी रहा तो स्थानीय लोगों को अब अर्थव्यवस्था और आजीविका दोनों के नुकसान का डर है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन ने गैर स्थानीय पर्यटकों के लिए भी आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया है, जो पर्यटन उद्योग की रीढ़ हैं।
उन्होंने कहा, स्थानीय गाइड, होटल व्यवसायी से लेकर स्थानीय ड्राइवर तक 80 प्रतिशत लोग गुरेज में पर्यटन उद्योग से जुड़े हैं। सरकार के पास उस आबादी को रोजगार देने का कोई स्रोत नहीं है, इसलिए दोनों देश शांति अपनाएंगे ताकि स्थानीय लोग फिर से प्रभावित न हों।
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एक अन्य निवासी मोहम्मद इस्माइल लोन ने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे से शांति वार्ता का रास्ता अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा, हम पहले भी इस युद्ध विराम से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। अब हमें डर है कि अगर कुछ हुआ तो हमें फिर से अपने घर छोड़ने पड़ेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध विराम समझौते के बाद गुरेज, करनाह जैसे सीमावर्ती इलाकों में पर्यटकों की भारी आमद देखी गई, जिसने पिछले युद्ध विराम से प्रभावित लोगों के जीवन को बेहतर बनाया है। हम उम्मीद करते हैं और प्रार्थना करते हैं कि दोनों देशों के बीच शांति बनी रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बांदीपोरा। पहलगाम हमले के बाद जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए प्रशासन ने मंगलवार को वुलर और गुरेज घाटी समेत 48 पर्यटन स्थलों को बंद कर दिया। जानकारी के मुताबिक गैर स्थानीय पर्यटकों को गुरेज घाटी में जाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। अमर उजाला से बातचीत में स्थानीय लोगों ने कहा कि उनकी आजीविका पर्यटन पर निर्भर है। और इस फैसले से उन्हें काफी नुकसान पहुंचेगा।
एक स्थानीय मोहम्मद हमजा ने कहा, हमारे पास कोई सरकारी नौकरी नहीं थी, हम पर्यटन से अपनी आजीविका चलाते थे। अगर इसमें गिरावट आई तो हम प्रभावित होंगे। पर्यटन उद्योग से जुड़े स्थानीय निवासी मोहम्मद हमजा ने शांति की उम्मीद में युद्ध विराम समझौते के बाद एक होटल खोला है। उनका कहना है कि अगर युद्ध विराम उल्लंघन जारी रहा तो स्थानीय लोगों को अब अर्थव्यवस्था और आजीविका दोनों के नुकसान का डर है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन ने गैर स्थानीय पर्यटकों के लिए भी आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया है, जो पर्यटन उद्योग की रीढ़ हैं।
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उन्होंने कहा, स्थानीय गाइड, होटल व्यवसायी से लेकर स्थानीय ड्राइवर तक 80 प्रतिशत लोग गुरेज में पर्यटन उद्योग से जुड़े हैं। सरकार के पास उस आबादी को रोजगार देने का कोई स्रोत नहीं है, इसलिए दोनों देश शांति अपनाएंगे ताकि स्थानीय लोग फिर से प्रभावित न हों।
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एक अन्य निवासी मोहम्मद इस्माइल लोन ने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे से शांति वार्ता का रास्ता अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा, हम पहले भी इस युद्ध विराम से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। अब हमें डर है कि अगर कुछ हुआ तो हमें फिर से अपने घर छोड़ने पड़ेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध विराम समझौते के बाद गुरेज, करनाह जैसे सीमावर्ती इलाकों में पर्यटकों की भारी आमद देखी गई, जिसने पिछले युद्ध विराम से प्रभावित लोगों के जीवन को बेहतर बनाया है। हम उम्मीद करते हैं और प्रार्थना करते हैं कि दोनों देशों के बीच शांति बनी रहे।