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जमीन की नकल के लिए राजस्व विभाग के नहीं लगाने पड़ेंगे चक्कर
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राजस्व विभाग खौड़ की तरफ से शिविर लगाकर भूमि पासबुक वितरित की गई
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ज्यौड़ियां। उपजिला खौड़ की नियाबत चक मलाल के कार्यालय में शनिवार को राजस्व विभाग की तरफ से शिविर लगाया गया। इसमें किसानों को उनकी जमीन के अभिलेख (दस्तावेज) पासबुक वितरित की गई। शिविर का आयोजन एसडीएम अनिल कुमार ठाकुर की देखरेख में किया गया।
शिविर में एसडीएम ने उपस्थित बताया कि अब किसानों को अपनी जमीन का दस्तावेज लेने के लिए तहसील, नियाबत के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। क्योंकि अब सरकार ने किसानों की भूमि के अभिलेख की पासबुक देने की पहल की है। आज नियाबत चक मलाल से संबंधित किसानों को उनकी भूमि के अभिलेख (दस्तावेज) की पासबुक वितरित की गई। सरकार की इस पहल को शिविर के दौरान उपस्थित रहे। किसानों ने एक अच्छा कदम बताया कि हमारी जमीनों का दस्तावेज हमारे पास रहेगा। इससे पहले हमें अगर कोई अपनी भूमि की नकल लेनी होती थी। तो राजस्व विभाग कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते थे। अब हमें इससे छुटकारा मिल जाएगा।
इस मौके पर डीडीसी उपाध्यक्ष सूरज सिंह भाऊ, बीडीसी अध्यक्ष बलबीर सिंह, परवीन कुमार शर्मा, नरेंद्र सिंह भाऊ उपस्थित रहे।
भूमि दस्तावेज की नई तकनीक से किया जागरूक
अखनूर। गांव बल्ले बाग में राजस्व विभाग की तरफ से आयोजित शिविर में किसानों को भूमि के दस्तावेज की पास बुक दी गई। एसडीएम अखिल सडौत्रा और तहसीलदार सुरेंद्र सिंह विशेष रूप से मौजूद थे। इस मौके पर किसानों को भूमि दस्तावेज के लिए र्नई तकनीक के लिए जागरूक किया।
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एसडीएम ने कहा कि यह पास बुक सरकारी तौर पर मान्य है। इस पर किसी के भी हस्ताक्षर की जरूरत नहीं है। जम्मू की इक्कीस और कश्मीर की सात तहसील में यह योजना लांच की गई है। इसमें तीन भाषा में दस्तावेज दिए जा रहे हैं। इसमें सिर्फ भूमि मालिक की ही पास बुक जारी होगी। जबकि सरकारी, घास चराई, स्टेट लैंड गैरमुमकिन खड्ढों का कोई दस्तावेज नहीं जारी होगा। उन्होंने बताया कि भूमि मालिकों को एक फार्म भर कर देना होगा और सात दिन में उसे पास बुक मिल जाएगी। यह बुक आप किसी बैंक में लोन के लिए दिखा सकते हैं। इस पर भी आपकी जमीन का नंबर होगा और यह पूरी तरह से वैध होगा। सरकार द्वारा यह सब कुछ आपकी सुविधा के लिए किया जा रहा है।
इस मौके पर नायब तहसीलदार अशोक कुमार, देवराज भगत, राम सराण, सरपंच शमशेर सिंह, यशपाल, रमेश सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।
भूमि मालिकों को पासबुक जारी की
परगवाल। पंचायत भलवाल मोलू में शनिवार को राजस्व विभाग ने ग्राम चौपाल लगाकर भूमि मालिकों को पासबुक वितरित की। तहसीलदार मनजीत सिंह की देखरेख में आयोजित इस चौपाल में काफी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए।
तहसीलदार ने बताया कि भूमि पासबुक से भूमि मालिकों को राजस्व रिकॉर्ड के लिए तहसील कार्यालय के चक्कर नहीं काटने पडे़ंगे। इसे 100 रुपये के शुल्क के साथ कहीं से भी आनलाइन हासिल किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि भूमि पासबुक तीन भाषाओं हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू में डिजिटल माध्यम से भूमि मालिकों को उपलब्ध रहेगी। भूमि मालिकों को राजस्व रिकॉर्ड को लेकर अदालतों व बैंकों में भी पासबुक की वैद्यता होगी। वित्तीय सहायता के लिए भी भूमि पासबुक को दस्तावेज के रूप में प्रयोग में लाया जा सकेगा। इस मौके पर क्षेत्र के कई और मुद्दों पर चर्चा के साथ-साथ उसके समाधान के लिए भी कोशिश हुई। इस मौके पर नायब तहसीलदार विजय शर्मा, गिरदावर विजय कुमार, नायब सरपंच उदय शर्मा, मोहित गुप्ता, मगदेश सिंह, बलवान सिंह, कृष्ण सिंह, नसीब सिंह, गिरधारी शर्मा, शमशेर सिंह, मास्टर पुरुषोत्तम सिंह समेत कई ग्रामीण शामिल थे। संवाद
बिश्नाह के 55 गांवों का रिकार्ड ऑनलाइन
बिश्नाह। तहसील कार्यालय में शनिवार को राजस्व विभाग ने 80 गांवों में से 55 गांव का रिकॉर्ड ऑनलाइन किया है। इस संबंध में एसडीएम अभिषेक अबरोल ने प्रेसवार्ता में बताया कि अब क्षेत्र में लोगों को अपनी जमीन के दस्तावेज के ऑनलाइन रिकॉर्ड मिल जाएंगे। उन्होंने बताया कि जिस तरह बैंक की की पासबुक होती है उसी तरह पासबुक वितरित की जाएगी। जो गांव रह गए हैं उनका भी रिकॉर्ड ऑनलाइन जल्द कर दिया जाएगा। प्रेसवार्ता में तहसीलदार सोहन सिंह राणा, एसडीपीओ शब्बीर खान मौजूद रहे। संवाद
राजस्व विभाग ने किसानों को जमीन की पासबुक भेंट की
मीरां साहिब। सिंबल कैंप के सेंट्रेल गुरुद्वारे में राजस्व विभाग ने शिविर लगाकर किसानों को जमीन की पासबुक भेंट की। इसमें एसडीएम रामलाल शर्मा मुख्य अतिथि रहे। एसडीएम ने कहा कि किसानों को पासबुक मुहैया कराने पर उनके पास भी जमीन का रिकार्ड रहेगा।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार बैंक की पासबुक होती है, उसी प्रकार जमीन की पासबुक मुहैया कराने पर जमीन संबंधी दस्तावेज लेने के लिए राहत होगी। अगर उनकी जमीन के दस्तावेज से कोई छेड़छाड़ होती है तो मोबाइल व आधार लिंक होने उसी समय मैसेज आ जाएगा। तहसीलदार शुव अहमद शाद ने कहा कि तहसील के 87 गांव में से 55 का रिकार्ड डिजटलाइज किया गया है। आनेवाले दिनों में रह गए गांव जोड़ने पर किसानों को उनकी जमीन की पासबुक मुहैया कराई जाएगी। जिस प्रकार आज शिविर लगाया गया है उसी प्रकार दूसरी पंचायतों में लगाए जाएंगे। सरपंच रविंद्र सिंह ने कहा कि जमीन की पासबुक मुहैया कराने की किसानों की काफी पुरानी मांग थी, जिसे सरकार द्वारा पूरा करने पर आभार जताया। इस दौरान तरलोक सिंह, दर्शन लाल, इंद्र सिंह सहित काफी संख्या में ग्रामीण भी मौजूद थे।
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शिविर में एसडीएम ने उपस्थित बताया कि अब किसानों को अपनी जमीन का दस्तावेज लेने के लिए तहसील, नियाबत के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। क्योंकि अब सरकार ने किसानों की भूमि के अभिलेख की पासबुक देने की पहल की है। आज नियाबत चक मलाल से संबंधित किसानों को उनकी भूमि के अभिलेख (दस्तावेज) की पासबुक वितरित की गई। सरकार की इस पहल को शिविर के दौरान उपस्थित रहे। किसानों ने एक अच्छा कदम बताया कि हमारी जमीनों का दस्तावेज हमारे पास रहेगा। इससे पहले हमें अगर कोई अपनी भूमि की नकल लेनी होती थी। तो राजस्व विभाग कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते थे। अब हमें इससे छुटकारा मिल जाएगा।
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इस मौके पर डीडीसी उपाध्यक्ष सूरज सिंह भाऊ, बीडीसी अध्यक्ष बलबीर सिंह, परवीन कुमार शर्मा, नरेंद्र सिंह भाऊ उपस्थित रहे।
भूमि दस्तावेज की नई तकनीक से किया जागरूक
अखनूर। गांव बल्ले बाग में राजस्व विभाग की तरफ से आयोजित शिविर में किसानों को भूमि के दस्तावेज की पास बुक दी गई। एसडीएम अखिल सडौत्रा और तहसीलदार सुरेंद्र सिंह विशेष रूप से मौजूद थे। इस मौके पर किसानों को भूमि दस्तावेज के लिए र्नई तकनीक के लिए जागरूक किया।
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एसडीएम ने कहा कि यह पास बुक सरकारी तौर पर मान्य है। इस पर किसी के भी हस्ताक्षर की जरूरत नहीं है। जम्मू की इक्कीस और कश्मीर की सात तहसील में यह योजना लांच की गई है। इसमें तीन भाषा में दस्तावेज दिए जा रहे हैं। इसमें सिर्फ भूमि मालिक की ही पास बुक जारी होगी। जबकि सरकारी, घास चराई, स्टेट लैंड गैरमुमकिन खड्ढों का कोई दस्तावेज नहीं जारी होगा। उन्होंने बताया कि भूमि मालिकों को एक फार्म भर कर देना होगा और सात दिन में उसे पास बुक मिल जाएगी। यह बुक आप किसी बैंक में लोन के लिए दिखा सकते हैं। इस पर भी आपकी जमीन का नंबर होगा और यह पूरी तरह से वैध होगा। सरकार द्वारा यह सब कुछ आपकी सुविधा के लिए किया जा रहा है।
इस मौके पर नायब तहसीलदार अशोक कुमार, देवराज भगत, राम सराण, सरपंच शमशेर सिंह, यशपाल, रमेश सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।
भूमि मालिकों को पासबुक जारी की
परगवाल। पंचायत भलवाल मोलू में शनिवार को राजस्व विभाग ने ग्राम चौपाल लगाकर भूमि मालिकों को पासबुक वितरित की। तहसीलदार मनजीत सिंह की देखरेख में आयोजित इस चौपाल में काफी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए।
तहसीलदार ने बताया कि भूमि पासबुक से भूमि मालिकों को राजस्व रिकॉर्ड के लिए तहसील कार्यालय के चक्कर नहीं काटने पडे़ंगे। इसे 100 रुपये के शुल्क के साथ कहीं से भी आनलाइन हासिल किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि भूमि पासबुक तीन भाषाओं हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू में डिजिटल माध्यम से भूमि मालिकों को उपलब्ध रहेगी। भूमि मालिकों को राजस्व रिकॉर्ड को लेकर अदालतों व बैंकों में भी पासबुक की वैद्यता होगी। वित्तीय सहायता के लिए भी भूमि पासबुक को दस्तावेज के रूप में प्रयोग में लाया जा सकेगा। इस मौके पर क्षेत्र के कई और मुद्दों पर चर्चा के साथ-साथ उसके समाधान के लिए भी कोशिश हुई। इस मौके पर नायब तहसीलदार विजय शर्मा, गिरदावर विजय कुमार, नायब सरपंच उदय शर्मा, मोहित गुप्ता, मगदेश सिंह, बलवान सिंह, कृष्ण सिंह, नसीब सिंह, गिरधारी शर्मा, शमशेर सिंह, मास्टर पुरुषोत्तम सिंह समेत कई ग्रामीण शामिल थे। संवाद
बिश्नाह के 55 गांवों का रिकार्ड ऑनलाइन
बिश्नाह। तहसील कार्यालय में शनिवार को राजस्व विभाग ने 80 गांवों में से 55 गांव का रिकॉर्ड ऑनलाइन किया है। इस संबंध में एसडीएम अभिषेक अबरोल ने प्रेसवार्ता में बताया कि अब क्षेत्र में लोगों को अपनी जमीन के दस्तावेज के ऑनलाइन रिकॉर्ड मिल जाएंगे। उन्होंने बताया कि जिस तरह बैंक की की पासबुक होती है उसी तरह पासबुक वितरित की जाएगी। जो गांव रह गए हैं उनका भी रिकॉर्ड ऑनलाइन जल्द कर दिया जाएगा। प्रेसवार्ता में तहसीलदार सोहन सिंह राणा, एसडीपीओ शब्बीर खान मौजूद रहे। संवाद
राजस्व विभाग ने किसानों को जमीन की पासबुक भेंट की
मीरां साहिब। सिंबल कैंप के सेंट्रेल गुरुद्वारे में राजस्व विभाग ने शिविर लगाकर किसानों को जमीन की पासबुक भेंट की। इसमें एसडीएम रामलाल शर्मा मुख्य अतिथि रहे। एसडीएम ने कहा कि किसानों को पासबुक मुहैया कराने पर उनके पास भी जमीन का रिकार्ड रहेगा।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार बैंक की पासबुक होती है, उसी प्रकार जमीन की पासबुक मुहैया कराने पर जमीन संबंधी दस्तावेज लेने के लिए राहत होगी। अगर उनकी जमीन के दस्तावेज से कोई छेड़छाड़ होती है तो मोबाइल व आधार लिंक होने उसी समय मैसेज आ जाएगा। तहसीलदार शुव अहमद शाद ने कहा कि तहसील के 87 गांव में से 55 का रिकार्ड डिजटलाइज किया गया है। आनेवाले दिनों में रह गए गांव जोड़ने पर किसानों को उनकी जमीन की पासबुक मुहैया कराई जाएगी। जिस प्रकार आज शिविर लगाया गया है उसी प्रकार दूसरी पंचायतों में लगाए जाएंगे। सरपंच रविंद्र सिंह ने कहा कि जमीन की पासबुक मुहैया कराने की किसानों की काफी पुरानी मांग थी, जिसे सरकार द्वारा पूरा करने पर आभार जताया। इस दौरान तरलोक सिंह, दर्शन लाल, इंद्र सिंह सहित काफी संख्या में ग्रामीण भी मौजूद थे।