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रोहिंग्याओं पर कार्रवाई के बाद अब्दुल्ला का प्रहार: बोले- दिल्ली की इजाजत पर होते हैं ये काम

Mon, 08 Mar 2021 02:44 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Mon, 08 Mar 2021 02:44 PM IST
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Action on Rohingyas Farooq Abdullah said These works are done on permission of Delhi
फारूक अब्दुल्ला व अन्य पार्टी नेता - फोटो : अमर उजाला

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने सोमवार को कई मु्द्दों पर केंद्र सरकार पर हमला बोला। रोहिंग्याओं के मामले पर बोलते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि दिल्ली की इजाजत पर ही इन्हें बसाया और निकाला जाता है। इसके बाद जम्मू-कश्मीर में अपने बलबूते अगली सरकार बनाने के भाजपा के संकल्प पर उन्होंने कहा कि सरकार बनाकर तो दिखाएं। अब्दुल्ला ने कहा कि भाजपा अगर महिलाओं की हितैषी है तो संसद में महिला आरक्षण बिल पास करके दिखाएं।

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बता दें कि जम्मू-कश्मीर में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्याओं के खिलाफ कार्रवाई के बाद अब इनके मददगारों पर भी शिकंजा कसेगा। इन्हें मदद पहुंचाने वाले एनजीओ, व्यक्तिगत लोगों, धर्म प्रचारकों की जांच की तैयारी सरकार ने की है। सरकार से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि इनके मददगारों को चिह्नित कर लिया गया है। ये रोहिंग्याओं को पढ़ाई लिखाई और खाने-पीने के सामान के रूप में मदद पहुंचाते रहे हैं। आशंका जताई जा रही है कि इन संस्थाओं को बाहरी लोगों की मदद मिलती रही है। बच्चों को आस-पास के मदरसे में भेजने के साथ ही बस्तियों में भी पढ़ाई लिखाई कराई जाती है। कट्टरता की भावना पैदा करने का भी शक है। 
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सूत्रों ने बताया कि इन संस्थाओं की पृष्ठभूमि, उनके बैंक अकाउंट तथा आडिट रिपोर्ट की जांच की जाएगी। इससे सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा। यह भी इनपुट है कि बठिंडी और सुजुवां इलाके में सबसे पहले एक एनजीओ ने लाकर 45-50 रोहिंग्याओं को बसाया था। इसके बाद इनकी संख्या धीरे-धीरे बढ़ती गई। जम्मू के बाहरी इलाके में 30 से अधिक स्थानों पर इन्होंने अपना अस्थायी ठिकाना बना लिया। इनमें सुजुवां तथा नगरोटा जैसे इलाके भी शामिल हैं जहां से सैन्य प्रतिष्ठान की दूरी बहुत अधिक नहीं है। 

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जितने डिटेंशन सेंटर की जरूरत होगी बनेगी

सूत्रों ने बताया कि रोहिंग्याओं के वेरिफिकेशन का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। जितने भी डिटेंशन (होल्डिंग) सेंटर की जरूरत पड़ेगी उतना बनाया जाएगा। यहां रहने वाले रोहिंग्या अवैध है। इनके पास यूएनएचआरसी का वैध प्रमाणपत्र नहीं है। सभी के खिलाफ पासपोर्ट एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों ने बताया कि रोहिंग्याओं ने यूएनएचआरसी के पास आवेदन जमा कर रखा है और उसकी रिसीविंग के आधार पर यहां रह रहे हैं।

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