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Jammu News: जीएमसी के आई बैंक में तीन साल में 82 लोगों को मिली रोशनी
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। दृष्टिहीन और आंखों की गंभीर बीमारियों से ग्रस्त प्रदेश के मरीजों के लिए कॉर्निया प्रत्यारोपण नई उम्मीद बनी है। जीएमसी जम्मू के नेत्र रोग विभाग ने तीन साल में 82 लोगों में कॉर्निया प्रत्यारोपण किया है। इससे इन लोगों के जीवन में फिर से नई रोशनी मिली है। हालांकि, नेत्रदान के प्रति कम जागरूकता के कारण कॉर्निया के लिए इंतजार करना पड़ता है।
जम्मू-कश्मीर में काॅर्निया ट्रांसप्लांट की सुविधा पहले नहीं थी। मार्च 2022 से जीएमसी जम्मू और श्रीनगर में कार्निया ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू हुई। जम्मू संभाग में जीएमसी जम्मू में सरकारी स्तर पर ही कॉर्निया प्रत्यारोपण होने के साथ-साथ आई बैंक की सुविधा है।हालांकि, कुछ निजी अस्पतालों में भी अब इस तरह की सुविधा शुरू हुई है, लेकिन वहां सिर्फ कॉर्निया प्रत्यारोपण हो पा रहा है।
जम्मू संभाग में जैन समुदाय सबसे ज्यादा नेत्रदान करता है, अन्य समुदाय या धर्म के लोगों में अभी इसके प्रति जागरूकता का अभाव है।
गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज जम्मू में आई बैंक के अनुसार 60 से अधिक कॉर्निया दान में मिले हैं। कुछ एनजीओ से भी कॉर्निया मिला है। लोगों में जागरूकता है, लेकिन आगे नहीं आ रहे। जागरूकता कार्यक्रम में लोग शपथ तो लेते हैं, लेकिन नेत्रदान या फिर किसी अन्य अंगदान के समय आगे नहीं आते। आईसीयू में आने वाले मरीज के परिवारों को समझाया जाता है, लेकिन कुछ लोग ही इसके लिए तैयार होते हैं।
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तीन साल के सफर में जीएमसी जम्मू के नेत्र रोग विभाग ने कई जटिल कॉर्नियल प्रत्यारोपण किए हैं। सितंबर 2024 में नेत्र रोग विभाग ने दो जटिल कॉर्नियल प्रत्यारोपण को सफलतापूर्वक पूरा किया था। इसमें पहला मरीज 55 साल तो दूसरा 83 साल का था। नेत्रदान के प्रति जागरूकता को लेकर हर साल 10 जून को विश्व नेत्रदान दिवस मनाया जाता है।
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मृतक मामलों में परिवार वालों को आगे आकर जरूरतमंद लोगों के लिए नेत्रदान करना चाहिए। प्रत्येक नेत्रदानी से दो लोगों को नया जीवन मिलता है। जीएमसी में कॉर्निया प्रत्यारोपण की सुविधा के साथ-साथ आई बैंक की भी सुविधा है। आधुनिक तकनीक की मदद से लोगों नए जीवन मिल रहा है।
डॉ. आशुतोष गुप्ता, प्रिंसिपल, जीएमसी जम्मू
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यही होती है प्रक्रिया
किसी भी व्यक्ति का अगर नेत्रदान करना होता है उसके परिवार सदस्यों को जीएमसी के नेत्र रोग विभाग को सूचित करना होगा। नेत्र विभाग की टीम मृतक के घर जाएगी। गर्मी के मौसम में दो से चार घंटे और सर्दियों में छह से आठ घंटे में कॉर्निया मृत शरीर से लेना होता है। कॉर्निया लेने के बाद इसे बिना स्टोरेज के 24 घंटे में प्रत्यारोपण करना होता है। आई बैंक में इसे संरक्षित रखने अधिकतम सीमा एक सप्ताह की होती है।
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जम्मू। दृष्टिहीन और आंखों की गंभीर बीमारियों से ग्रस्त प्रदेश के मरीजों के लिए कॉर्निया प्रत्यारोपण नई उम्मीद बनी है। जीएमसी जम्मू के नेत्र रोग विभाग ने तीन साल में 82 लोगों में कॉर्निया प्रत्यारोपण किया है। इससे इन लोगों के जीवन में फिर से नई रोशनी मिली है। हालांकि, नेत्रदान के प्रति कम जागरूकता के कारण कॉर्निया के लिए इंतजार करना पड़ता है।
जम्मू-कश्मीर में काॅर्निया ट्रांसप्लांट की सुविधा पहले नहीं थी। मार्च 2022 से जीएमसी जम्मू और श्रीनगर में कार्निया ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू हुई। जम्मू संभाग में जीएमसी जम्मू में सरकारी स्तर पर ही कॉर्निया प्रत्यारोपण होने के साथ-साथ आई बैंक की सुविधा है।हालांकि, कुछ निजी अस्पतालों में भी अब इस तरह की सुविधा शुरू हुई है, लेकिन वहां सिर्फ कॉर्निया प्रत्यारोपण हो पा रहा है।
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जम्मू संभाग में जैन समुदाय सबसे ज्यादा नेत्रदान करता है, अन्य समुदाय या धर्म के लोगों में अभी इसके प्रति जागरूकता का अभाव है।
गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज जम्मू में आई बैंक के अनुसार 60 से अधिक कॉर्निया दान में मिले हैं। कुछ एनजीओ से भी कॉर्निया मिला है। लोगों में जागरूकता है, लेकिन आगे नहीं आ रहे। जागरूकता कार्यक्रम में लोग शपथ तो लेते हैं, लेकिन नेत्रदान या फिर किसी अन्य अंगदान के समय आगे नहीं आते। आईसीयू में आने वाले मरीज के परिवारों को समझाया जाता है, लेकिन कुछ लोग ही इसके लिए तैयार होते हैं।
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तीन साल के सफर में जीएमसी जम्मू के नेत्र रोग विभाग ने कई जटिल कॉर्नियल प्रत्यारोपण किए हैं। सितंबर 2024 में नेत्र रोग विभाग ने दो जटिल कॉर्नियल प्रत्यारोपण को सफलतापूर्वक पूरा किया था। इसमें पहला मरीज 55 साल तो दूसरा 83 साल का था। नेत्रदान के प्रति जागरूकता को लेकर हर साल 10 जून को विश्व नेत्रदान दिवस मनाया जाता है।
मृतक मामलों में परिवार वालों को आगे आकर जरूरतमंद लोगों के लिए नेत्रदान करना चाहिए। प्रत्येक नेत्रदानी से दो लोगों को नया जीवन मिलता है। जीएमसी में कॉर्निया प्रत्यारोपण की सुविधा के साथ-साथ आई बैंक की भी सुविधा है। आधुनिक तकनीक की मदद से लोगों नए जीवन मिल रहा है।
डॉ. आशुतोष गुप्ता, प्रिंसिपल, जीएमसी जम्मू
यही होती है प्रक्रिया
किसी भी व्यक्ति का अगर नेत्रदान करना होता है उसके परिवार सदस्यों को जीएमसी के नेत्र रोग विभाग को सूचित करना होगा। नेत्र विभाग की टीम मृतक के घर जाएगी। गर्मी के मौसम में दो से चार घंटे और सर्दियों में छह से आठ घंटे में कॉर्निया मृत शरीर से लेना होता है। कॉर्निया लेने के बाद इसे बिना स्टोरेज के 24 घंटे में प्रत्यारोपण करना होता है। आई बैंक में इसे संरक्षित रखने अधिकतम सीमा एक सप्ताह की होती है।