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कठुआ में पीएचई कर्मियों की हड़ताल जारी
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कठुआ। बकाया वेतन और स्थायी करने की मांग कर रहे पीएचई सीपी वर्कर्स की हड़ताल बुधवार को 132वें दिन भी जारी रही। हड़ताल और धरने के 132वें दिन भी वर्कर्स ने अपनी मांगों के लिए सब डिवीजन कार्यालय कठुआ में नारेबाजी की। इस दौरान उन्होंने कहा कि उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है।
वर्कर्स ने कहा कि जब सरकार थी तो उन्हें इस बात का अश्वासन दिया जाता था कि उनकी मांग पर गौर किया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। फिर राज्यपाल शासन आया तो उन्हें उम्मीद जगी, लेकिन उस दौरान भी कुछ नहीं हुआ और अब तो राष्ट्रपति शासन है लेकिन इस दौरान भी उनकी मांगों को गौर नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस चार महीनों में उन्होंने हर प्रकार की सत्ता और प्रशासन के रंग देख लिए हैं। अब उनके पास संघर्ष के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं बचा है। 52 महीनों का बकाया वेतन और स्थायी करने की मांग जब तक पूरी नहीं की जाएगी वह इसी प्रकार रोज धरना प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि उनके परिवार आर्थिक तंगी के कारण भुखमरी का शिकार होने की कगार पर है। खाने के लाले पड़ गए हैं और खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं। ऐसे में अगर उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो वह उग्र रुख अपनाने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि 132 दिन एक लंबा समय होता है। मांगों को पूरा जब करना तब किया जाता लेकिन इतने दिनों में कोई प्रक्रिया तो शुरू की जाती।
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वर्कर्स ने कहा कि जब सरकार थी तो उन्हें इस बात का अश्वासन दिया जाता था कि उनकी मांग पर गौर किया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। फिर राज्यपाल शासन आया तो उन्हें उम्मीद जगी, लेकिन उस दौरान भी कुछ नहीं हुआ और अब तो राष्ट्रपति शासन है लेकिन इस दौरान भी उनकी मांगों को गौर नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस चार महीनों में उन्होंने हर प्रकार की सत्ता और प्रशासन के रंग देख लिए हैं। अब उनके पास संघर्ष के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं बचा है। 52 महीनों का बकाया वेतन और स्थायी करने की मांग जब तक पूरी नहीं की जाएगी वह इसी प्रकार रोज धरना प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि उनके परिवार आर्थिक तंगी के कारण भुखमरी का शिकार होने की कगार पर है। खाने के लाले पड़ गए हैं और खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं। ऐसे में अगर उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो वह उग्र रुख अपनाने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि 132 दिन एक लंबा समय होता है। मांगों को पूरा जब करना तब किया जाता लेकिन इतने दिनों में कोई प्रक्रिया तो शुरू की जाती।
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