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जम्मू-कश्मीरः 450 ग्राम की ‘मिरेकल बेबी’ को मिला जीवनदान, देश में दुर्लभ मामला 

Sun, 03 Jan 2021 05:01 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 03 Jan 2021 05:01 AM IST
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450 gram Miracle Baby gets life in kashmir valley
जीवनदान... - फोटो : amar ujala

श्री महाराजा गुलाब सिंह अस्पताल (एसएमजीएस) के चिकित्साकर्मियों ने मात्र 450 ग्राम की नवजात को नया जीवनदान दिया है। बाल रोग विभाग में 24 सप्ताह (लगभग छह माह) में जन्मी बच्ची को भर्ती करवाया गया था। अधिक प्रीमैच्योर होने के कारण नवजात को बचाना बेहद चुनौतीपूर्ण था। सौ दिन एनआईसीयू वार्ड में रखने के बाद 37 सप्ताह का समय पूरा करवा 1420 ग्राम वजन के साथ उसे शनिवार को सकुशल घर भेज दिया। इस बच्ची को चिकित्सकों ने ‘मिरेकल बेबी’ का नाम दिया है। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि देश में यह ऐसा पहला दुर्लभ मामला है, जिसमें सरकारी अस्पताल में अधिक प्रीमैच्योर को बचाया गया है। 

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आरएस पुरा निवासी इकबाल सिंह ने बताया कि उनकी बेटी का जन्म सितंबर 2019 में त्रिकुटा नगर स्थित निजी चिकित्सालय में हुआ था। उस समय वह 24 सप्ताह की थी और उसका वजन मात्र 450 ग्राम था। उसे निजी चिकित्सालय ने रेफर कर एसएमजीएस भेज दिया, जहां विशेषज्ञों की टीम ने बच्ची की चिकित्सा देखभाल शुरू की।
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चिकित्सा प्रक्रिया में कई उतार चढ़ाव आए
बाल रोग विभाग ने ‘मिराकल बेबी’ के इलाज के लिए अलग से एक इंक्यूबेटर का इंतजाम किया। बच्ची की देखभाल में बाल रोग विभाग के एचओडी डॉ. घनश्याम सैनी, डॉ. अनुज भट्टी, डॉ. अनुमोदन गुप्ता समेत अन्य कर्मी मौजूद रहे। बच्ची को निकू वार्ड में 13 सप्ताह रखा गया, जिसमें सामान्य 37 सप्ताह का समय पूरा किया गया। इस सारी चिकित्सा प्रक्रिया में कई उतार चढ़ाव आए। जीएमसी की प्रिंसिपल डॉ. शशि सूदन, अस्पताल के अधीक्षक डॉ. मनोज चलोत्रा, उप अधीक्षक डॉ. राकेश शर्मा ने इस दुर्लभ उपलब्धि हासिल करने के लिए बाल रोग विभाग की सराहना की है। 
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बच्ची को गोद में पाकर मां के छलक पड़े आंसू
नए साल पर आरएस पुरा निवासी इकबाल सिंह को दूसरी लाडली का तोहफा मिला। उन्होंने बताया कि सौ दिन बच्ची को एनआईसीयू में रखने के दौरान वे बेहद मुश्किल दौर में थे। आईसीयू में बच्ची के रहने से पूरे परिवार का एक अलग से शेड्यूल बन गया था। इस दौरान बच्ची के पास भी परिवार का कोई न कोई सदस्य रहता था। अस्पताल में बच्ची को अपनी गोद में पाकर मां जितेंद्र कौर के आंसू छलक उठे।


देश में दुर्लभ मामला में मिराकल बेबी
एचओडी डॉ. सैनी ने बताया कि सबसे कम उम्र और सबसे छोटा जीवित बच्चा 22 सप्ताह में पैदा हुआ था, जिसका वजन 492 ग्राम था। भारत में जीवित रहने वाला सबसे कम उम्र का बच्चा मुंबई का लड़का है जो 22 सप्ताह में पैदा हुआ और उसका वजन 620 ग्राम है। सबसे छोटी हैदराबाद की लड़की का जन्म 25 सप्ताह में हुआ और उसका वजन 375 ग्राम था। देश में सरकारी अस्पताल में जनमे शिशुओं के बीच सबसे कम उम्र में जन्मी मिरेकल बेबी का दुर्लभ मामला है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार हर साल भारत में 24 फीसदी प्रीमैच्योर बच्चे पैदा होते हैं। डॉ. अनुमोदन गुप्ता ने बताया कि मिरेकल बेबी का चमत्कारी मामला भारत में उन हजारों अभिभावकों को राहत दे सकता है जो 26 सप्ताह में बच्चे को जन्म दे रहे हैं।

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