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देही अदालतों के गठन पर हाईकोर्ट ने दिया नोटिस
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जम्मू। रियासत में देही अदालतों के गठन पर हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया है। रजिस्ट्रार जनरल को प्रतिवादी पक्ष बनाते हुए इस पर अमल कराने के लिए कहा गया है। जम्मू कश्मीर देही अदालत एक्ट 2013 को विधानसभा में भी पास किया जा चुका है। बावजूद इसके यह एक्ट अब तक लागू नहीं हुआ। इस एक्ट के तहत गांव स्तर की अदालतें बननी हैं, लेकिन कई साल बीत जाने के बाद भी जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हुआ।
दरअसल, अल्ताफ हुसैन द्राबू की ओर से हाईकोर्ट में इस संबंध में जनहित याचिका दायर की गई थी। उस पर शनिवार को जस्टिस धीरज सिंह ठाकुर और राशिद अली डार ने सुनवाई की। दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल को पार्टी बनाते हुए नोटिस जारी किया और इस जवाब मांगा। याचिकाकर्ता के पक्ष ने कोर्ट को बताया कि इन अदालतों की वजह से लोगों को उनके घरों तक न्याय मिलना था। कोई भी व्यक्ति आर्थिक, सामाजिक कारण से इससे वंचित नहीं रहता। यह एक्ट सरकारी गैजेट तक में प्रकाशित हो चुका है। बावजूद चार साल बीत जाने के बाद भी यह लागू नहीं हुआ। सरकार की तरफ से 2014 में एसआरओ 275 जारी कर इसे लागू करने का आदेश दिया गया था। 22 जिलों में 22 देही अदालतों का गठन करने के लिए कहा गया, लेकिन अभी तक इसकी प्रक्रिया पूरी ही शुरू नहीं हुई। कहा कि विधानसभा एक स्तंभ है, जिसमें पारित होने वाले आदेश लोगों को उनके घरों तक न्याय दिलाते हैं, लेकिन यह न्याय नहीं मिल पा रहा। दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने रजिस्ट्रार जनरल को पार्टी बनाते हुए इस पर अमल करने के लिए कहा। नोटिस भी जारी किया गया है। जेएनएफ
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दरअसल, अल्ताफ हुसैन द्राबू की ओर से हाईकोर्ट में इस संबंध में जनहित याचिका दायर की गई थी। उस पर शनिवार को जस्टिस धीरज सिंह ठाकुर और राशिद अली डार ने सुनवाई की। दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल को पार्टी बनाते हुए नोटिस जारी किया और इस जवाब मांगा। याचिकाकर्ता के पक्ष ने कोर्ट को बताया कि इन अदालतों की वजह से लोगों को उनके घरों तक न्याय मिलना था। कोई भी व्यक्ति आर्थिक, सामाजिक कारण से इससे वंचित नहीं रहता। यह एक्ट सरकारी गैजेट तक में प्रकाशित हो चुका है। बावजूद चार साल बीत जाने के बाद भी यह लागू नहीं हुआ। सरकार की तरफ से 2014 में एसआरओ 275 जारी कर इसे लागू करने का आदेश दिया गया था। 22 जिलों में 22 देही अदालतों का गठन करने के लिए कहा गया, लेकिन अभी तक इसकी प्रक्रिया पूरी ही शुरू नहीं हुई। कहा कि विधानसभा एक स्तंभ है, जिसमें पारित होने वाले आदेश लोगों को उनके घरों तक न्याय दिलाते हैं, लेकिन यह न्याय नहीं मिल पा रहा। दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने रजिस्ट्रार जनरल को पार्टी बनाते हुए इस पर अमल करने के लिए कहा। नोटिस भी जारी किया गया है। जेएनएफ
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