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जम्मू-कश्मीर में त्योहारी सीजन में मिलावट का खेल, 31 फीसद सैंपल फेल
Fri, 18 Oct 2019 11:24 PM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Fri, 18 Oct 2019 11:24 PM IST
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त्योहारी सीजन में मुनाफाखोर लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने खाद्य पदार्थों की जांच में बड़े पैमाने पर मिलावट पाई है। जम्मू संभाग के विभिन्न इलाकों से सितंबर माह में लिए गए 205 मामलों में 63 फेल हो गए हैं। जांचे गए कुल मामलों में से करीब एक तिहाई (31 फीसदी) में मिलावट पाई गई। फेल हुए मामलों में 15 सैंपल जम्मू जिले से हैं।
जानकारी के अनुसार, त्योहारी सीजन में मिलावट की आशंका को देखते हुए विभागीय टीमों ने जम्मू संभाग के विभिन्न इलाकों से सैंपल लिए थे। जांच रिपोर्ट चौंकाने वाली रही है। लगभग हर तीसरा सैंपल फेल पाया गया है। इससे मिलावट के पैमाने का अंदाजा लगाया जा सकता है।
असुरक्षित सैंपलों के लिए कोर्ट और अन्य सैंपलों को अब एडीसी (एग्जीक्यूटिव आफिसर) के पास भेजा जा रहा है। इसके अलावा विभिन्न स्थानों से दूध, पनीर, दही, मिठाई, खोया के 115 सैंपलों को फूड एनालिस्ट पब्लिक हेल्थ लेबोरेटरी जम्मू में जांच के लिए भेजा गया है।
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वहीं, संभाग के जम्मू, कठुआ, सांबा, पुंछ, डोडा में त्योहारी सीजन में दुग्ध पदार्थों की जांच के लिए दर्जनों सैंपल उठाए गए हैं। एफएसएस एक्ट, रूल्स एंड रेगुलेशन के तहत जिला डोडा में 322 किलो घटिया दूध और 35 किलो खराब सब्जी व फलों को मौके पर नष्ट किया गया। इस अभियान में फूड बिजनेस आपरेटरों को घी, वनस्पति और खाद्य तेल से तैयार किए खाद्य पदार्थों की सूची प्रदर्शित करने के निर्देश दिए।
विभाग के अनुसार खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता किसी भी शिकायत को डिप्टी कमिश्नर फूड सेफ्टी जम्मू की वेबसाइट पर किया जा सकता है। इसके अलावा संबंधित फोन 9419191357 पर भी संपर्क किया जा सकता है।
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जानकारी के अनुसार, त्योहारी सीजन में मिलावट की आशंका को देखते हुए विभागीय टीमों ने जम्मू संभाग के विभिन्न इलाकों से सैंपल लिए थे। जांच रिपोर्ट चौंकाने वाली रही है। लगभग हर तीसरा सैंपल फेल पाया गया है। इससे मिलावट के पैमाने का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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असुरक्षित सैंपलों के लिए कोर्ट और अन्य सैंपलों को अब एडीसी (एग्जीक्यूटिव आफिसर) के पास भेजा जा रहा है। इसके अलावा विभिन्न स्थानों से दूध, पनीर, दही, मिठाई, खोया के 115 सैंपलों को फूड एनालिस्ट पब्लिक हेल्थ लेबोरेटरी जम्मू में जांच के लिए भेजा गया है।
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वहीं, संभाग के जम्मू, कठुआ, सांबा, पुंछ, डोडा में त्योहारी सीजन में दुग्ध पदार्थों की जांच के लिए दर्जनों सैंपल उठाए गए हैं। एफएसएस एक्ट, रूल्स एंड रेगुलेशन के तहत जिला डोडा में 322 किलो घटिया दूध और 35 किलो खराब सब्जी व फलों को मौके पर नष्ट किया गया। इस अभियान में फूड बिजनेस आपरेटरों को घी, वनस्पति और खाद्य तेल से तैयार किए खाद्य पदार्थों की सूची प्रदर्शित करने के निर्देश दिए।
विभाग के अनुसार खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता किसी भी शिकायत को डिप्टी कमिश्नर फूड सेफ्टी जम्मू की वेबसाइट पर किया जा सकता है। इसके अलावा संबंधित फोन 9419191357 पर भी संपर्क किया जा सकता है।
मिल्क और फ्रोजन डेजर्ट आइसक्रीम में अंतर समझें
बाजार से एक बड़ा वर्ग आइसक्रीम खरीदते समय उसकी पहचान नहीं कर पाता है। उसे लगता है कि जो आइसक्रीम उसने ली है वह दुग्ध पदार्थों से बनी हैं। लेकिन ऐसी आइसक्रीम फ्रोजन डेजर्ट पदार्थों में खाद्य तेलों में बनाई जाती हैं। किसी भी आइसक्रीम के रैपर पर यह प्रदर्शित होता है कि वह किस पदार्थ से बनी है। इसमें मिल्क फैट और फ्रोजन डेजर्ट प्रदर्शित होता है। मिल्क फैट वाली दुग्ध पदार्थों और फ्रोजन डेजर्ट वाली खाद्य तेलों से बनी होती है। एफएसएस (फूड प्रोडक्ट स्टैंडर्ड एंड फूड एडिटिवस) रेगुलेशन 2011 के तहत दोनों की परिभाषा दी गई है। इसमें खाद्य खेल वाली आइसक्रीम सस्ती होती है।
बाजार से एक बड़ा वर्ग आइसक्रीम खरीदते समय उसकी पहचान नहीं कर पाता है। उसे लगता है कि जो आइसक्रीम उसने ली है वह दुग्ध पदार्थों से बनी हैं। लेकिन ऐसी आइसक्रीम फ्रोजन डेजर्ट पदार्थों में खाद्य तेलों में बनाई जाती हैं। किसी भी आइसक्रीम के रैपर पर यह प्रदर्शित होता है कि वह किस पदार्थ से बनी है। इसमें मिल्क फैट और फ्रोजन डेजर्ट प्रदर्शित होता है। मिल्क फैट वाली दुग्ध पदार्थों और फ्रोजन डेजर्ट वाली खाद्य तेलों से बनी होती है। एफएसएस (फूड प्रोडक्ट स्टैंडर्ड एंड फूड एडिटिवस) रेगुलेशन 2011 के तहत दोनों की परिभाषा दी गई है। इसमें खाद्य खेल वाली आइसक्रीम सस्ती होती है।