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अंधेरे में बचपन: जम्मू-कश्मीर में छह साल के भीतर 27 हजार बच्चों ने छोड़ दिया स्कूल

Mon, 29 Mar 2021 05:54 AM IST
Vikas Kumar सतीश वालिया, अमर उजाला, जम्मू
सतीश वालिया, अमर उजाला, जम्मू Published by: Vikas Kumar Updated Mon, 29 Mar 2021 05:54 AM IST
सार

- गोलाबारी प्रभावित सरहदी इलाकों में स्कूल ड्रॉप आउट के सबसे ज्यादा मामले
- आर्थिक तंगी के साथ कोरोना काल में भी घटी स्कूलों में बच्चों की संख्या
- शिक्षा विभाग ‘तलाश एप’ के जरिये स्कूल छोड़ने वाले विद्यार्थियों की कर रहा तलाश

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27 thousand children left school in jammu and kashmir in last six years
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में हर साल हजारों बच्चे स्कूल की पढ़ाई से मुंह मोड़ रहे हैं। 2015 से लेकर 2020 तक पहली से आठवीं तक के 27 हजार से ज्यादा बच्चे स्कूल छोड़ चुके हैं। वर्ष 2015 में 6200 बच्चों ने स्कूल जाना छोड़ दिया । 2020 में 2900 बच्चों ने स्कूल की पढ़ाई छोड़ी। स्कूल छोड़ने वालों में सबसे ज्यादा सीमावर्ती इलाकों के बच्चे शामिल हैं। यहां पाकिस्तानी गोलाबारी से आए दिन स्कूल बंद रहते थे। अब तो संघर्ष विराम समझौते के बाद कई दिनों से गोलाबारी नहीं हुई। अगर आगे भी हालात ऐसे ही रहे तो स्कूल जाने वाले बच्चों की संख्या बढ़ेगी। 2020 में कोरोना महामारी के चलते लगे लॉकडाउन से स्कूल बंद रहे। इसके चलते भी बच्चों की संख्या घटी। इसके अलावा शिक्षा विभाग ने हाल ही में तलाश एप भी लांच किया है। जो स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की तलाश कर उन्हें पढ़ाई से जोड़ेगा। 

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पंचायतों को सौंपी बच्चों की संख्या बढ़ाने की जिम्मेदारी
समग्र शिक्षा अभियान के तहत साक्षरता दर बढ़ाने के लिए पंचायत स्तर पर भी बच्चों को स्कूल लाने की जिम्मेदारी दी गई है। स्कूल न जाने वाले बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों का सहयोग लिया जा रहा है। स्कूल छोड़ने का एक बड़ा कारण आर्थिक तंगी भी है। आर्थिक तौर पर कमजोर लोग बच्चों को स्कूल न भेजकर इधर-उधर काम पर लगवा देते हैं, ताकि घर का खर्च चलता रहे।  
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प्रदेश में साक्षरता दर 90 फीसदी  
प्रदेश में साक्षरता दर करीब 90 फीसदी है। साक्षरता दर बढ़ाने के लिए मिड डे मील योजना को चलाया गया, ताकि बच्चे ज्यादा से ज्यादा संख्या में स्कूल पहुंचे।  
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किस साल कितने बच्चों ने स्कूल छोड़ा
साल       बच्चे (पहली से आठवीं)

2015       6200
2016       4300
2017       5800
2018       4200
2019       3800
2020       2900 

स्कूल छोड़़ चुके बच्चों को फिर से पढ़ाई से जोड़ने के लिए प्रयास जारी हैं। हाल ही में तलाश एप भी लांच किया गया है। इसमें भी बच्चों को ट्रैक कर स्कूल पहुंचाया जाएगा। पंचायत प्रतिनिधियों को भी जिम्मेदारी दी गई है। हजारों स्कूली बच्चों को वापस लाया जाएगा। - अरुण मन्हास, निदेशक, समग्र शिक्षा अभियान

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