{"_id":"5b0f03334f1c1bac6e8b561c","slug":"191527710515-jammu-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दहेज प्रताड़ना से मौत मामले में आरोपी को कठोर उम्रकैद की सजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दहेज प्रताड़ना से मौत मामले में आरोपी को कठोर उम्रकैद की सजा
Updated Thu, 31 May 2018 01:31 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जम्मू। दहेज प्रताड़ना से मौत के मामले में कठुआ के प्रिंसिपल सेशन जज संजीव गुप्ता ने आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई। बुधवार को मामले पर दोनों तरफ की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला दिया गया। आरोपी को 20 हजार का जुर्माना भी लगाया गया है। बिलावर के जैसल गलक गांव का रहने वाला मोहिंदर कुमार पत्नी पिंकी देवी की दहेज प्रताड़ना से हत्या मामले का ट्रायल काट रहा था।
जज संजीव गुप्ता ने सरकार की तरफ से बीबी शर्मा और आरोपी की तरफ से एडवोकेट केबी महाजन की दलीलें सुनीं। जज ने कहा कि आरोपी को मिली सजा आदर्शों पर निर्धारित है। आरोपी ने जो अपराध किया है, इससे न सिर्फ उसकी जिंदगी को दाग लगा है, बल्कि समाज में यह एक भद्दा दाग है। आरोपी को सजा देने का यही मकसद है कि भविष्य में भी कोई इस तरह की घटना में शामिल न हो। वह ऐसा अपराध न करे। यह सच है कि कुछ अवसर ऐसे होते हैं, जहां आरोपी को बदलने का मौका दिया जाना चाहिए, लेकिन यह भी सच है कि जिस तरह का अपराध है, उस लिहाज से यही सजा होना चाहिए।
परिवार को मिले दो लाख की सहायता
जज ने यह भी महसूस किया कि मृतक का परिवार काफी गरीब है। वह मृतक की मौत से आहत हैं। मुझे लगता है कि सरकार को पीड़ित के परिवार की मदद करनी चाहिए, ताकि उनका कुछ बोझ कम हो। मेरे हिसाब से परिवार को दो लाख रुपये का मुआवजा देना चाहिए। जज ने स्टेट लीगल सर्विस अथारिटी के सदस्य सचिव को आदेश दिया कि वह एक माह के भीतर यह मुआवजा मृतक के परिवार को दें। जेएनएफ
विज्ञापन
विज्ञापन
जज संजीव गुप्ता ने सरकार की तरफ से बीबी शर्मा और आरोपी की तरफ से एडवोकेट केबी महाजन की दलीलें सुनीं। जज ने कहा कि आरोपी को मिली सजा आदर्शों पर निर्धारित है। आरोपी ने जो अपराध किया है, इससे न सिर्फ उसकी जिंदगी को दाग लगा है, बल्कि समाज में यह एक भद्दा दाग है। आरोपी को सजा देने का यही मकसद है कि भविष्य में भी कोई इस तरह की घटना में शामिल न हो। वह ऐसा अपराध न करे। यह सच है कि कुछ अवसर ऐसे होते हैं, जहां आरोपी को बदलने का मौका दिया जाना चाहिए, लेकिन यह भी सच है कि जिस तरह का अपराध है, उस लिहाज से यही सजा होना चाहिए।
विज्ञापन
परिवार को मिले दो लाख की सहायता
जज ने यह भी महसूस किया कि मृतक का परिवार काफी गरीब है। वह मृतक की मौत से आहत हैं। मुझे लगता है कि सरकार को पीड़ित के परिवार की मदद करनी चाहिए, ताकि उनका कुछ बोझ कम हो। मेरे हिसाब से परिवार को दो लाख रुपये का मुआवजा देना चाहिए। जज ने स्टेट लीगल सर्विस अथारिटी के सदस्य सचिव को आदेश दिया कि वह एक माह के भीतर यह मुआवजा मृतक के परिवार को दें। जेएनएफ
विज्ञापन