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कछुआ चाल में चल रहा सुभाष स्टेडियम के कायाकल्प का काम
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उधमपुर। केंद्र सरकार की तरफ से मंजूर दस करोड़ की लागत से शहर के सुभाष स्टेडियम के कायाकल्प का काम कछुआ चाल में चल रहा है। स्टेडियम में लाखों की लागत से नया गेट लगा दिया गया है और अन्य काम भी चल रहे हैं। 31 मार्च 2019 तक स्पोर्ट्स काउंसिल को सभी काम पूरे करने थे, लेकिन अभी तक एक भी काम पूरा नहीं हो पाया है। खिलाड़ियों का कहना है कि कई वर्षों से स्टेडियम में आधुनिक सुविधाएं मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
शहर के सुभाष स्टेडियम की हालत को सुधारने के लिए केंद्र सरकार ने 2017 में दस करोड़ की राशि मंजूर की थी। करीब एक वर्ष पहले 2018 में स्पोर्ट्स कांउसिल ने मंजूर की राशि से विकास कार्य आरंभ किए थे। एक वर्ष के दौरान स्टेडियम पहुंचने वाले लोगों के लिए सैर करने का ही कोर्ट तैयार हो पाया है। बारशि के दौरान सुभाष स्टेडियम में जमा होने वाले पानी की निकासी के लिए नालियों का निर्माण किया है, लेकिन मैदान को समतल कर जल निकासी की व्यवस्था नहीं की गई है। बास्केटबाल के लिए कोर्ट तैयार करने का काम कछुआ चाल में चल रहा है। इसके अलावा स्टेडियम में दाखिल होने वाले मुख्य द्वार के बाहर नया गेट तो लगा दिया है, लेकिन अभी तक इसकी सजावट नहीं की गई है। गेट के पास भी बारिश के दौरान पानी जमा होता है और इसकी जल निकासी की व्यवस्था नहीं की गई है। स्टेडियम के बीच नई पिच तैयार करने का काम अभी तक शुरू नहीं हो सका है। कायाकल्प के काम धीमी गति में चलने से अब खिलाड़ी परेशान हो चुके हैं। खिलाड़ियों का कहना है कि कई वर्षों के बाद आौधुनिक स्तर की सुविधांए मिलने की उम्मीद जगी है। वर्षों से स्टेडियम बदहाल है और खिलाड़ी इसकी हालत सुधरने का इंतजार कर रहे हैं। स्पोर्ट्स काउंसिल ने काम तो शुरू किया है, लेकिन कभी काम बंद होता है और कभी इसको शुरू कर दिया जाता है। सभी कार्य 31 मार्च तक पूरे करने थे, लेकिन अभी तक काम पूूरे नहीं हो सके हैं।
शहर के सुभाष स्टेडियम की हालत को सुधारने के लिए केंद्र सरकार ने 2017 में दस करोड़ की राशि मंजूर की थी। करीब एक वर्ष पहले 2018 में स्पोर्ट्स कांउसिल ने मंजूर की राशि से विकास कार्य आरंभ किए थे। एक वर्ष के दौरान स्टेडियम पहुंचने वाले लोगों के लिए सैर करने का ही कोर्ट तैयार हो पाया है। बारशि के दौरान सुभाष स्टेडियम में जमा होने वाले पानी की निकासी के लिए नालियों का निर्माण किया है, लेकिन मैदान को समतल कर जल निकासी की व्यवस्था नहीं की गई है। बास्केटबाल के लिए कोर्ट तैयार करने का काम कछुआ चाल में चल रहा है। इसके अलावा स्टेडियम में दाखिल होने वाले मुख्य द्वार के बाहर नया गेट तो लगा दिया है, लेकिन अभी तक इसकी सजावट नहीं की गई है। गेट के पास भी बारिश के दौरान पानी जमा होता है और इसकी जल निकासी की व्यवस्था नहीं की गई है। स्टेडियम के बीच नई पिच तैयार करने का काम अभी तक शुरू नहीं हो सका है। कायाकल्प के काम धीमी गति में चलने से अब खिलाड़ी परेशान हो चुके हैं। खिलाड़ियों का कहना है कि कई वर्षों के बाद आौधुनिक स्तर की सुविधांए मिलने की उम्मीद जगी है। वर्षों से स्टेडियम बदहाल है और खिलाड़ी इसकी हालत सुधरने का इंतजार कर रहे हैं। स्पोर्ट्स काउंसिल ने काम तो शुरू किया है, लेकिन कभी काम बंद होता है और कभी इसको शुरू कर दिया जाता है। सभी कार्य 31 मार्च तक पूरे करने थे, लेकिन अभी तक काम पूूरे नहीं हो सके हैं।
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