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वन कर्मियों ने सरकार से मांगा ढाई दिन का अतिरिक्त वेतन।
Updated Tue, 27 Mar 2018 10:28 AM IST
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बिलावर। ढाई दिन का अतिरिक्त वेतन, जोखिम भत्ता सहित अन्य मांगों को लेकर वन कर्मियों ने डिवीजन कार्यालय पर एकत्र होकर सरकार के खिलाफ धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया, तो वे आंदोलन शुरू कर देंगे।
वीरवार को आल जेएंडके नान गजटेड फारेस्ट आफिसर एसोसिएशन के बैनर तले डिवीजन के कर्मचारी अपने नेता सुरजीत सिंह सुंबरिया के नेतृत्व में डिवीजन कार्यलय पर इकट्ठा हुए और सरकार के विरुद्ध धरना-प्रदर्शन किया। वक्ताओं ने बताया कि वह पिछले काफी अर्सा से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर संघर्ष करते रहे हैं, मगर सरकार और विभाग उनकी कोई भी बात नहीं सुन रहा है। नतीजतन अब उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि वन कर्मियों को चौबीस घंटों वनों दुर्गम स्थलों पर ड्यूटी देनी पड़ती है। लिहाजा तमाम वन कर्मियों को ढाई दिन का अतिरिक्त वेतन देने के अलावा जोखिम भत्ता भी दिया जाए। तमाम वेतन विसंगतियों को दूर किया जाए, विभागीय डीपीसी जल्द करवाई जाए।
कैजुअल लेबर का 16 महीनों का बकाया वेतन का भुगतान जल्द किया जाए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो वह आंदोलन शुरू कर देंगे। धरने में अब्दुल रशीद, ओम बसोत्रा, मुकेश कुमार, बशीर अहमद, उतर कुमार, गोपाल कृष्ण, अशोक कुमार आदि शामिल थे।
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वीरवार को आल जेएंडके नान गजटेड फारेस्ट आफिसर एसोसिएशन के बैनर तले डिवीजन के कर्मचारी अपने नेता सुरजीत सिंह सुंबरिया के नेतृत्व में डिवीजन कार्यलय पर इकट्ठा हुए और सरकार के विरुद्ध धरना-प्रदर्शन किया। वक्ताओं ने बताया कि वह पिछले काफी अर्सा से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर संघर्ष करते रहे हैं, मगर सरकार और विभाग उनकी कोई भी बात नहीं सुन रहा है। नतीजतन अब उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि वन कर्मियों को चौबीस घंटों वनों दुर्गम स्थलों पर ड्यूटी देनी पड़ती है। लिहाजा तमाम वन कर्मियों को ढाई दिन का अतिरिक्त वेतन देने के अलावा जोखिम भत्ता भी दिया जाए। तमाम वेतन विसंगतियों को दूर किया जाए, विभागीय डीपीसी जल्द करवाई जाए।
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कैजुअल लेबर का 16 महीनों का बकाया वेतन का भुगतान जल्द किया जाए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो वह आंदोलन शुरू कर देंगे। धरने में अब्दुल रशीद, ओम बसोत्रा, मुकेश कुमार, बशीर अहमद, उतर कुमार, गोपाल कृष्ण, अशोक कुमार आदि शामिल थे।
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