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एक साल से नहीं बज पाई एंबुलेंस की घंटी, कॉल सेंटर बंद होने से 567 एंबुलेंस का आपस में कटा है संपर्क
Fri, 18 Jan 2019 12:39 PM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Fri, 18 Jan 2019 12:39 PM IST
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एक साल से 102 नंबर पर एंबुलेंस की घंटी नहीं बज पाई है। टेंडर प्रक्रिया में लेटलतीफी से स्वास्थ्य निदेशालय जम्मू में 102 एंबुलेंस सेवा का कॉल सेंटर बंद पड़ा है। इससे जीपीएस से जुड़ी एंबुलेंस के अलावा जम्मू संभाग के दस जिलों के चिकित्सा केंद्रों की सभी बेसिक एंबुलेंस का संपर्क आपस में कटा हुआ है।
इस सिस्टम में जीपीएस वाली 200 एंबुलेंस के अलावा कुल 567 एंबुलेंस काम कर रही थीं। इन्हें संभाग के किसी भी क्षेत्र में मरीज की मांग पर निकटतम चिकित्सा केंद्र से उपलब्ध करवाया जाता था। लेकिन अब अस्पतालों में ही संपर्क करने पर एंबुलेंस मिल रही है।
फरवरी 2018 में संबंधित कंपनी से समझौता खत्म होने पर 102 नंबर की एंबुलेंस सेवा बंद हो गई थी। इसके बाद जम्मू-कश्मीर मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन की ओर से इस सुविधा को दोबारा शुरू करने के लिए कई बार टेंडर निकाले गए। मगर टेंडर प्रक्रिया को अभी तक मुकम्मल नहीं बनाया गया है।
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जननी सुरक्षा योजना, जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत गर्भवती महिलाओं, नवजातों और जच्चा-बच्चा को चौबीस घंटे जरूरत पर 102 नंबर पर एंबुलेंस की सुविधा मुहैया करवाई जा रही थी।
आपात स्थिति में 102 नंबर की एंबुलेंस सेवा मरीजों और घायलों के लिए वरदान साबित हुई थी। खासतौर पर प्रसव मामलों में इस एंबुलेंस सेवा का अधिक उपयोग किया गया।
एमडी एनएचएम भूपेंद्र कुमार ने बताया कि जम्मू-कश्मीर मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन की ओर से टेंडर किया जा रहा है। उम्मीद है मार्च तक 102 नंबर की एंबुलेंस सेवा को दोबारा शुरू कर दिया जाएगा।
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इस सिस्टम में जीपीएस वाली 200 एंबुलेंस के अलावा कुल 567 एंबुलेंस काम कर रही थीं। इन्हें संभाग के किसी भी क्षेत्र में मरीज की मांग पर निकटतम चिकित्सा केंद्र से उपलब्ध करवाया जाता था। लेकिन अब अस्पतालों में ही संपर्क करने पर एंबुलेंस मिल रही है।
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फरवरी 2018 में संबंधित कंपनी से समझौता खत्म होने पर 102 नंबर की एंबुलेंस सेवा बंद हो गई थी। इसके बाद जम्मू-कश्मीर मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन की ओर से इस सुविधा को दोबारा शुरू करने के लिए कई बार टेंडर निकाले गए। मगर टेंडर प्रक्रिया को अभी तक मुकम्मल नहीं बनाया गया है।
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जननी सुरक्षा योजना, जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत गर्भवती महिलाओं, नवजातों और जच्चा-बच्चा को चौबीस घंटे जरूरत पर 102 नंबर पर एंबुलेंस की सुविधा मुहैया करवाई जा रही थी।
आपात स्थिति में 102 नंबर की एंबुलेंस सेवा मरीजों और घायलों के लिए वरदान साबित हुई थी। खासतौर पर प्रसव मामलों में इस एंबुलेंस सेवा का अधिक उपयोग किया गया।
एमडी एनएचएम भूपेंद्र कुमार ने बताया कि जम्मू-कश्मीर मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन की ओर से टेंडर किया जा रहा है। उम्मीद है मार्च तक 102 नंबर की एंबुलेंस सेवा को दोबारा शुरू कर दिया जाएगा।