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Udhampur News: अदालत ने विवाह विच्छेद को लेकर दायर याचिका की खारिज
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- सुनवाई के दौरान अनुपस्थित रही याचिकाकर्ता
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। प्रधान जिला न्यायाधीश ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 के तहत शारदा देवी की ओर से काका राम के विरुद्ध दायर विवाह विच्छेद याचिका के संबंध में शुक्रवार को आदेश जारी किया। आदेश में याचिकाकर्ता द्वारा अदालती सुनवाई में बार-बार अनुपस्थित रहने के कारण याचिका को खारिज कर दिया।
अदालत के मुताबिक इस मामले को आगे बढ़ाने में याचिकाकर्ता की रुचि में कमी पाई गई। याचिका 16 नवंबर 2024 में दायर की गई थी। इसमें याचिकाकर्ता पति द्वारा क्रूरता और परित्याग के दावों के आधार पर विवाह विच्छेद की मांग कर रहा है। न्यायालय ने पाया कि याचिकाकर्ता पिछली चार लगातार सुनवाइयों से अनुपस्थित रही। इससे यह साफ होता है कि याचिकाकर्ता ने बार-बार अनुपस्थित रहने के कारण याचिका को आगे बढ़ाने में रुचि खो दी है। इसके चलते न्यायालय ने अंतिम निर्देश जारी किए।
न्यायालय में उपस्थित न होने के कारण याचिका खारिज कर दी गई। न्यायालय ने फाइल को नियमों के अनुसार उचित रूप से संकलित और संग्रहीत करने के निर्देश दिए। न्यायालय के आदेश से याचिकाकर्ता की अनुपस्थिति के कारण मामला प्रभावी रूप से बंद कर दिया गया जिसके परिणामस्वरूप विवाह विच्छेद याचिका खारिज हो गई है। इससे साबित होता है कि न्यायालय का यह निर्णय कानूनी कार्यवाही में सक्रिय भागीदारी क्या महत्व रखती है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। प्रधान जिला न्यायाधीश ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 के तहत शारदा देवी की ओर से काका राम के विरुद्ध दायर विवाह विच्छेद याचिका के संबंध में शुक्रवार को आदेश जारी किया। आदेश में याचिकाकर्ता द्वारा अदालती सुनवाई में बार-बार अनुपस्थित रहने के कारण याचिका को खारिज कर दिया।
अदालत के मुताबिक इस मामले को आगे बढ़ाने में याचिकाकर्ता की रुचि में कमी पाई गई। याचिका 16 नवंबर 2024 में दायर की गई थी। इसमें याचिकाकर्ता पति द्वारा क्रूरता और परित्याग के दावों के आधार पर विवाह विच्छेद की मांग कर रहा है। न्यायालय ने पाया कि याचिकाकर्ता पिछली चार लगातार सुनवाइयों से अनुपस्थित रही। इससे यह साफ होता है कि याचिकाकर्ता ने बार-बार अनुपस्थित रहने के कारण याचिका को आगे बढ़ाने में रुचि खो दी है। इसके चलते न्यायालय ने अंतिम निर्देश जारी किए।
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न्यायालय में उपस्थित न होने के कारण याचिका खारिज कर दी गई। न्यायालय ने फाइल को नियमों के अनुसार उचित रूप से संकलित और संग्रहीत करने के निर्देश दिए। न्यायालय के आदेश से याचिकाकर्ता की अनुपस्थिति के कारण मामला प्रभावी रूप से बंद कर दिया गया जिसके परिणामस्वरूप विवाह विच्छेद याचिका खारिज हो गई है। इससे साबित होता है कि न्यायालय का यह निर्णय कानूनी कार्यवाही में सक्रिय भागीदारी क्या महत्व रखती है।
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