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जम्मू: कठुआ-उधमपुर से डोडा-किश्तवाड़ तक हाई अलर्ट, घुसपैठ के पुराने रूट पर भी नजर, आतंकियों की तलाश में ऑपरेशन
Sat, 19 Sep 2026 02:19 PM IST
Digvijay Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
Published by: Digvijay Singh
Updated Sat, 19 Sep 2026 02:19 PM IST
सार
मजालता के बरटल, सोहन और खुब्बन के घने जंगलों में 16 सितंबर की रात शुरू हुआ ऑपरेशन सोहन तीसरे दिन भी जारी रहा। 17 सितंबर सुबह हुई मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने जैश-ए-मोहम्मद के दो पाकिस्तानी आतंकियों को मार गिराया था।
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आतंकियों की तलाश में सर्च ऑपरेशन
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
मजालता के बरटल, सोहन और खुब्बन के घने जंगलों में 16 सितंबर की रात शुरू हुआ ऑपरेशन सोहन तीसरे दिन भी जारी रहा। 17 सितंबर सुबह हुई मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने जैश-ए-मोहम्मद के दो पाकिस्तानी आतंकियों को मार गिराया था। घायल तीसरे आतंकी के जंगल में छिपे होने की आशंका के चलते सेना की व्हाइट नाइट कोर, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ ने पूरे इलाके में घेराबंदी और तलाशी अभियान को तेज कर दिया है।
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सूत्रों के अनुसार सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एनकाउंटर इसलिए भी अहम है क्योंकि यह इलाका आतंकियों के उस पुराने घुसपैठ रूट से जुड़ा है जो कठुआ-सांबा बॉर्डर से शुरू होकर उधमपुर के मजालता, बसंतगढ़, रामनगर से डोडा, भद्रवाह और किश्तवाड़ के जंगलों से होते हुए दक्षिण कश्मीर तक जाता है। बीते दो साल में जम्मू संभाग में हुई कई आतंकी वारदातों में इसी रूट का इस्तेमाल सामने आया है। इसी को देखते हुए अब सर्च ऑपरेशन का दायरा केवल मजालता तक सीमित नहीं रखा गया है बल्कि सांबा, कठुआ, उधमपुर, डोडा और किश्तवाड़ के सीमावर्ती जंगलों में भी हाई अलर्ट जारी करते हुए संयुक्त नाकेबंदी बढ़ा दी गई है।
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जंगल में स्निफर डॉग के साथ-साथ ड्रोन और हेलिकॉप्टर के जरिए थर्मल स्कैनिंग
तकनीकी जांच के तहत इस ऑपरेशन में कई अहम बिंदुओं पर काम हो रहा है। मारे गए आतंकियों के पास से मिले मोबाइल फोन व अन्य उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है ताकि उनके लोकल संपर्कों और ओवर ग्राउंड वर्कर नेटवर्क का पता लगाया जा सके। जंगल में स्निफर डॉग के साथ-साथ ड्रोन और हेलिकॉप्टर के जरिए थर्मल स्कैनिंग की जा रही है क्योंकि सुबह और रात के समय घने कोहरे के कारण विजिबिलिटी बेहद कम हो जाती है।
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तीसरे आतंकी के भागने वाले रास्ते पर खून के धब्बों और निशानों की फॉरेंसिक जांच
सूत्रों की मानें तो मुठभेड़ में घायल तीसरे आतंकी के भागने वाले रास्ते पर खून के धब्बों और कुछ निशानों की फॉरेंसिक टीम जांच कर रही है। इसके अलावा इलाके में पकड़े गए एक संदिग्ध ओवर ग्राउंड वर्कर से लगातार पूछताछ चल रही है, जिसने इस दल को रसद और जंगल में छिपने के लिए ठिकाना उपलब्ध कराया था। सूत्रों की मानें तो उससे मिली जानकारी के आधार पर कई और संभावित हाइडआउट पर भी छापे मारे जा रहे हैं।
जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग सहित मुख्य मार्गों पर वाहनों की हो रही जांच
शुक्रवार को पूरे जंगली इलाके में सघन तलाशी अभियान जारी रखा गया। सुरक्षा बल ड्रोन और खोजी कुत्तों की मदद से यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि क्षेत्र में कोई अन्य आतंकी या उनका ठिकाना छिपा न रह जाए। एहतियात के तौर पर उधमपुर जिले के मजालता, रामनगर, बसंतगढ़ और कठुआ-सांबा के बिलावर, रामकोट सहित आसपास के इलाकों में सुरक्षा घेरा सख्त कर दिया गया है और जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग सहित मुख्य मार्गों पर वाहनों की जांच तेज कर दी गई है।
नॉर्दर्न आर्मी कमांडर ने व्हाइट नाइट कॉर्प्स की कार्रवाई की सराहना की
नॉर्दर्न आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने उधमपुर में ऑपरेशन सोहन के तहत जैश के दो आतंकवादियों को मार गिराने के लिए व्हाइट नाइट कॉर्प्स की तेज, सटीक और पेशेवर कार्रवाई की सराहना की। उन्होंने अपने बयान में कहा कि पुलिस और सीआरपीएफ के साथ बेहतरीन तालमेल से चलाया गया यह सफल इंटेलिजेंस-आधारित ऑपरेशन आतंकवाद विरोधी ग्रिड में संयुक्त अंतर-एजेंसी समन्वय की ताकत को दर्शाता है। उत्तरी कमान जम्मू-कश्मीर को आतंक-मुक्त बनाने के अपने संकल्प पर दृढ़ है।