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Udhampur News: शहर में धड़ल्ले से बिक रहा सिंगल यूज प्लास्टिक और पॉलिथीन
Thu, 28 Mar 2024 02:59 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
Updated Thu, 28 Mar 2024 02:59 AM IST
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देविका नदी सहित आसपास के नदी नालों में प्रदूषण बढ़ाने का बनता जा रहा बड़ा कारण
रेहड़ी फड़ियों से लेकर व्यापारिक प्रतिष्ठानों तक हो रहा इस्तेमाल
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। एक तरफ शहर कचरे की समस्या से जूझ रहा है तो दूसरी तरफ प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक और पाॅलिथीन का इस्तेमाल धड़ल्ले से हो रहा है। इससे शहर में कचरे की समस्या बढ़ाने, नालियों को जाम करने और पवित्र देविका नदी सहित शहर के आसपास के अन्य नदी-नालों में भी प्रदूषण बढ़ाने का कारण बन रहा है। इसके अलावा यह मवेशियों के लिए भी जानलेवा साबित हो रहा है।
मगर इसके बावजूद संबंधित विभाग और प्रशासन इस तरफ कोई अधिक ध्यान नहीं दे रहा है। इसके इस्तेमाल पर रोक लगाने की कार्रवाई मात्र जागरूकता कार्यक्रमों तक समिति है, जिसका जमीनी स्तर पर कोई खास असर नजर नहीं आ रहा है। वर्तमान में शहर भर में रेहड़ी फड़ियों से लेकर बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों तक धड़ल्ले से इसका इस्तेमाल हो रहा है और लोग भी सुविधा अनुसार जाने अनजाने में बेफिक्र होकर इनका उपयोग कर रहे हैं। मौजूदा समय में शहरभर में पाॅलिथीन का कचरा एक बड़ी समस्या बनकर उभरता नजर आ रहा है।
होलसेल सब्जी मंडी में भी बोरियों की जगह पाॅलिथीन का हो रहा इस्तेमाल: वर्तमान में शहर में पाॅलीथिन का इस्तेमाल इस कदर बढ़ता जा रहा है कि पहले यहां सिर्फ दुकानों और रेहड़ियों में इसका इस्तेमाल समिति था वहीं अब सब्जी का होल सेल काम करने के लिए भी इसका धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। पाॅलिथीन के लिफाफों में सब्जी होल सेल सब्जी मंडी पहुंचने के बाद इन्हीं लिफाफों से बाजारों की रेहड़ियों व फड़ियों पर पहुंचती है। जब बड़ा पाॅलिथीन का लिफाफा खाली हो जाती है तो इसमें गंदगी के साथ भर कर फेंक दिया जाता है।
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देविका नदी सहित नदी नालों में प्रदूषण का बन रहा बड़ा कारण : शहर से निकलने वाला सिंगल यूज प्लास्टिक और पाॅलिथीन का यह कचरा देविका नदी सहित आसपास के नदी नालों में प्रदूषण बढ़ाने का भी एक बड़ा कारण बनता जा रहा है। एमएच चौक से ऊपर हाउसिंग काॅलोनी तक देविका नदी पूरी तरह से प्लास्टिक के कचरे से भरी हुई है। इसे साफ करना नगर परिषद के लिए भी टेडी खीर बन गया है। कई बार सफाई अभियान चलाए जाने के बाद भी इससे प्लास्टिक के कचरे को खत्म करना मुश्किल हो गया है। इसका बड़ा कारण शहर में सिंगल यूज प्लास्टिक और प्रतिबंधित पाॅलिथीन का धड़ल्ले से हो रहा इस्तेमाल है।
शहर की नालियों और सेंट्रल ड्रेन को भी जाम करने का बन रहा है बड़ा कारण: सिंगल यूज प्लास्टिक और पाॅलिथीन का यह कचरा शहर की सफाई व्यवस्था को भी बुरी तरह से चौपट कर रहा है। गली-मोहल्ले की नालियों और सेंट्रल ड्रेन में फंसकर यह इनको कई बार जाम कर देता है। इससे इन नालियों और नालों की गंदगी सड़कों पर बहने लगती है। लोग नगर परिषद पर सफाई नहीं करने का आरोप लगाते हैं, लेकिन जांच के बाद नालियां जाम होने की असल वजह इनमें जमा पाॅलिथीन का यही कचरा सामने आती है।
मवेशियों के लिए भी बन रहा जानलेवा:शहर में जहां वहां फैला यह पाॅलिथीन का कचरा लावारिस घूमने वाले मवेशियों के लिए भी जानलेवा साबित हो रहा है। कचरे से अन्य खाने की चीजों के साथ कई बार मवेशी पाॅलिथीन भी निगल लेते हैं। इससे आगे चलकर उन्हें काफी समस्या का सामना करना पड़ता है। कई बार इसके कारण उनकी मौत तक हो जाती है।
साल 2019 में लगाया गया शहर में प्रतिबंध: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 में सिंगल यूज प्लास्टिक और पॉलीथिन के प्रतिबंध को लेकर 15 अगस्त को देशवासियों को संबोधित किया था। इसके बाद जिला प्रशासन ने पूरे जिले में सिंगल यूज प्लास्टिक और पालीथिन को लेकर बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान शुरू किया था। दुकानों, होटलों में दबिश दी गई। बाद में कुछ महीनों में जिला प्रशासन ने उधमपुर को पॉलीथिन और प्लास्टिक मुक्त भी घोषित कर दिया था। मगर इसके बाद कोरोना संकट शुरू होने के बाद तो प्रशासन और नगर परिषद ने इस तरफ ध्यान देना बंद कर दिया।
साल 2021 में फिर किए प्रयास : कोरोना संकट से कुछ राहत मिलने पर जिला प्रशासन ने एक बार फिर से पॉलीथिन और प्लास्टिक के इस्तेमाल को लेकर सख्ती दिखाई। तत्कालीन डीसी ने व्यापार मंडल और डिस्पोजल एसोसिएशन के सदस्यों को पॉलीथिन व सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने को कहा। ग्राहकों को घर से बैग लाने के लिए जागरूक बढ़ाने का प्रयास किया गया। साथ ही शादी व अन्य समारोह में सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई। व्यापार मंडल ने सहयोग की हामी भरी थी। मगर अब हालात फिर बिगड़ गए हैं।
120 माइक्राॅन के नीचे के पाॅलिथीन के इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध है लेकिन अगर कोई इसका इस्तेमाल करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। शहर में इसके इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए जल्द ही प्रशासन के सहयोग से मुहिम चलाई जाएगी। -नितिन गुप्ता, सीईओ नगर परिषद उधमपुर
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रेहड़ी फड़ियों से लेकर व्यापारिक प्रतिष्ठानों तक हो रहा इस्तेमाल
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। एक तरफ शहर कचरे की समस्या से जूझ रहा है तो दूसरी तरफ प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक और पाॅलिथीन का इस्तेमाल धड़ल्ले से हो रहा है। इससे शहर में कचरे की समस्या बढ़ाने, नालियों को जाम करने और पवित्र देविका नदी सहित शहर के आसपास के अन्य नदी-नालों में भी प्रदूषण बढ़ाने का कारण बन रहा है। इसके अलावा यह मवेशियों के लिए भी जानलेवा साबित हो रहा है।
मगर इसके बावजूद संबंधित विभाग और प्रशासन इस तरफ कोई अधिक ध्यान नहीं दे रहा है। इसके इस्तेमाल पर रोक लगाने की कार्रवाई मात्र जागरूकता कार्यक्रमों तक समिति है, जिसका जमीनी स्तर पर कोई खास असर नजर नहीं आ रहा है। वर्तमान में शहर भर में रेहड़ी फड़ियों से लेकर बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों तक धड़ल्ले से इसका इस्तेमाल हो रहा है और लोग भी सुविधा अनुसार जाने अनजाने में बेफिक्र होकर इनका उपयोग कर रहे हैं। मौजूदा समय में शहरभर में पाॅलिथीन का कचरा एक बड़ी समस्या बनकर उभरता नजर आ रहा है।
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होलसेल सब्जी मंडी में भी बोरियों की जगह पाॅलिथीन का हो रहा इस्तेमाल: वर्तमान में शहर में पाॅलीथिन का इस्तेमाल इस कदर बढ़ता जा रहा है कि पहले यहां सिर्फ दुकानों और रेहड़ियों में इसका इस्तेमाल समिति था वहीं अब सब्जी का होल सेल काम करने के लिए भी इसका धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। पाॅलिथीन के लिफाफों में सब्जी होल सेल सब्जी मंडी पहुंचने के बाद इन्हीं लिफाफों से बाजारों की रेहड़ियों व फड़ियों पर पहुंचती है। जब बड़ा पाॅलिथीन का लिफाफा खाली हो जाती है तो इसमें गंदगी के साथ भर कर फेंक दिया जाता है।
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देविका नदी सहित नदी नालों में प्रदूषण का बन रहा बड़ा कारण : शहर से निकलने वाला सिंगल यूज प्लास्टिक और पाॅलिथीन का यह कचरा देविका नदी सहित आसपास के नदी नालों में प्रदूषण बढ़ाने का भी एक बड़ा कारण बनता जा रहा है। एमएच चौक से ऊपर हाउसिंग काॅलोनी तक देविका नदी पूरी तरह से प्लास्टिक के कचरे से भरी हुई है। इसे साफ करना नगर परिषद के लिए भी टेडी खीर बन गया है। कई बार सफाई अभियान चलाए जाने के बाद भी इससे प्लास्टिक के कचरे को खत्म करना मुश्किल हो गया है। इसका बड़ा कारण शहर में सिंगल यूज प्लास्टिक और प्रतिबंधित पाॅलिथीन का धड़ल्ले से हो रहा इस्तेमाल है।
शहर की नालियों और सेंट्रल ड्रेन को भी जाम करने का बन रहा है बड़ा कारण: सिंगल यूज प्लास्टिक और पाॅलिथीन का यह कचरा शहर की सफाई व्यवस्था को भी बुरी तरह से चौपट कर रहा है। गली-मोहल्ले की नालियों और सेंट्रल ड्रेन में फंसकर यह इनको कई बार जाम कर देता है। इससे इन नालियों और नालों की गंदगी सड़कों पर बहने लगती है। लोग नगर परिषद पर सफाई नहीं करने का आरोप लगाते हैं, लेकिन जांच के बाद नालियां जाम होने की असल वजह इनमें जमा पाॅलिथीन का यही कचरा सामने आती है।
मवेशियों के लिए भी बन रहा जानलेवा:शहर में जहां वहां फैला यह पाॅलिथीन का कचरा लावारिस घूमने वाले मवेशियों के लिए भी जानलेवा साबित हो रहा है। कचरे से अन्य खाने की चीजों के साथ कई बार मवेशी पाॅलिथीन भी निगल लेते हैं। इससे आगे चलकर उन्हें काफी समस्या का सामना करना पड़ता है। कई बार इसके कारण उनकी मौत तक हो जाती है।
साल 2019 में लगाया गया शहर में प्रतिबंध: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 में सिंगल यूज प्लास्टिक और पॉलीथिन के प्रतिबंध को लेकर 15 अगस्त को देशवासियों को संबोधित किया था। इसके बाद जिला प्रशासन ने पूरे जिले में सिंगल यूज प्लास्टिक और पालीथिन को लेकर बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान शुरू किया था। दुकानों, होटलों में दबिश दी गई। बाद में कुछ महीनों में जिला प्रशासन ने उधमपुर को पॉलीथिन और प्लास्टिक मुक्त भी घोषित कर दिया था। मगर इसके बाद कोरोना संकट शुरू होने के बाद तो प्रशासन और नगर परिषद ने इस तरफ ध्यान देना बंद कर दिया।
साल 2021 में फिर किए प्रयास : कोरोना संकट से कुछ राहत मिलने पर जिला प्रशासन ने एक बार फिर से पॉलीथिन और प्लास्टिक के इस्तेमाल को लेकर सख्ती दिखाई। तत्कालीन डीसी ने व्यापार मंडल और डिस्पोजल एसोसिएशन के सदस्यों को पॉलीथिन व सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने को कहा। ग्राहकों को घर से बैग लाने के लिए जागरूक बढ़ाने का प्रयास किया गया। साथ ही शादी व अन्य समारोह में सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई। व्यापार मंडल ने सहयोग की हामी भरी थी। मगर अब हालात फिर बिगड़ गए हैं।
120 माइक्राॅन के नीचे के पाॅलिथीन के इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध है लेकिन अगर कोई इसका इस्तेमाल करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। शहर में इसके इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए जल्द ही प्रशासन के सहयोग से मुहिम चलाई जाएगी। -नितिन गुप्ता, सीईओ नगर परिषद उधमपुर