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Udhampur News: पति के छोड़ने के बाद भी नहीं हारी हिम्मत

Sun, 15 Jun 2025 01:38 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर Updated Sun, 15 Jun 2025 01:38 AM IST
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She did not lose courage even after her husband left her
उधमपुर। शहर के श्री संकट मोचन कारगिल हनुमान मंदिर में भगवान के वस्त्र बनाने का काम करती रजनी दे - फोटो : udhampur
- खुद आत्मनिर्भर बनाने के साथ गोशाला और मंदिर में भी कर रही सेवा
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संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। पति के छोडने के बाद अक्सर महिलाएं टूट जाती हैं लेकिन उधमपुर की रजनी देवी (45) ने हिम्मत नहीं हारी। अपनी हिम्मत और मेहनत तथा सरकार की मदद से गौशाला चलाकर खुद को आत्मनिर्भर बनाया और अपने तीन बच्चों के पालन पोषण और उनकी शिक्षा की जिम्मेदारी संभाली।
आज पति को छोड़े 18 साल से अधिक का समय बीत चुका है। रजनी देवी शहर के कारगिल हनुमान मंदिर में भगवान के वस्त्र बनाने का काम करती हैं और इसके साथ ही वे मंदिर परिसर की गौशाला और मंदिर में सेवा करने के अलावा एक चाय का स्टाल भी चलाती हैं। बडी बेटी ग्रेटुऐशन कम्पलीट कर चुकी है और बेटा 11वीं कक्षा में पढ़ रहा है जबकि छोटी बेटी भी अभी स्कूल में पढ़ रही है।
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रजनी देवी कहती हैं कि उन्हें अक्षरों का ज्ञान नहीं हैं लेकिन जिंदगी की मजबूरियों और कठिनाईयों ने उन्हें दुनियादारी का ज्ञानी बना दिया है। पति ने साथ छोड़ा, सर्पदंश के बाद टांग के आपरेशन का दर्द भी झेला, लेकिन न कभी सामाजिक जिम्मेदारियों से मूंह मोड़ा न प्रभु भक्ति छोडी।
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साध्वी के वेश में रहने वाली रजनी देवी, पंचेरी में जन्मी, बचपन में मां बाप की लाडली थी, शादी करके रामनगर गई तो मां-बाप ने अपने नजदीक उधमपुर के ही सुई गांव में जमीन लेकर मकान बनवा दिया। लेकिन दुर्भाग्य से पति नशे का आदी निकला और उसने चंद साल साथ निभाने के बाद साथ छोड़ दिया। विपदा पड़ी तो लोगों के घर बर्तन मांजने का काम शुरू कर दिया, लेकिन इससे तीन बच्चों का पेट भी नहीं भर पा रहा था, ऊपर से उनकी पढ़ाई लिखाई की चिंता अलग।
परिवार की जिम्मेदारियों को संभालने के लिए मायके में भाई-बहनों ने दूसरी शादी का दबाव डाला लेकिन मन में अब दूसरों पर आश्रित न रहकर खुद को सशक्त बनाने की ठानी। गांव के स्वयं सहायता समूह के सहयोग से लोन लेकर घर में गाय पालन का काम शुरू कर दिया और मंदिर की गौशाला में भी सेवा शुरू कर दी। इस बीच मंदिर में भगवान के वस्त्र बनाने का काम भी उन्हें मिल गया। बाद में मंदिर के बाहर एक चाय का स्टाल चलाना भी शुरू कर दिया।

रजनी देवी का कहना है कि आज वे आत्मनिर्भर हैं और अपनी मेहनत से अपने बच्चों का पालन पोषण भी कर रहीं हैं और उन्हें अच्छी तरह से पढ़ा लिखा भी रहीं हैं। आत्मनिर्भर बनने तक के इस सफर में लोगों की तानाकशी ने कई बार मनोबल गिराने का प्रयास भी किया, लेकिन फिर भी हिम्मत नहीं हारी है। आज साध्वी के भेष में हुँ लेकिन परिवार की जिम्मेदारियां नहीं छोड़ी हैं। मेरी तरह अन्य महिलाओं को भी यही संदेश है हिम्मत न हारें, ईश्वर और खुद की हिम्मत पर भरोसा रखें, आगे बढ़कर खुद को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास करते रहें। बेटियों को भी बेटों की तरह अच्छी शिक्षा दिलाएं ताकि वे किसी भी निर्भर न होकर स्वयं आत्मनिर्भर बन सके।
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