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सेना ने मगैनी गांववासियों को सैन्य क्षेत्र से गुजरने से रोका
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उधमपुर: एम आई रूम के बाहर रोड बंद कर रास्ते को लेकर प्रदर्शन करते हुए मज्ञानी गांव के लोग.
- फोटो : UDHAMPUR
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उधमपुर। नगर से सटे कोटली पंचायत के मगैनी गांव के लोगों ने सैन्य क्षेत्र से गुजर रहे उनके रास्ते को बंद किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई। इसको लेकर सभी गांववासियों ने उत्तरी कमान मुख्यालय के समीप एमआई रूम को जाने वाले टाइगर हिल गेट के बाहर रोड जामकर प्रदर्शन किया।
उनका कहना था कि सेना ने उनके गांव को जाने वाले एक मात्र रास्ते को बंद कर दिया है। इससे उनका गांव से बाहर आना जाना मुश्किल हो गया है। सदियों से गांववासी सैन्य क्षेत्र से गुजर रही इसी सड़क से आवाजाही करते हैं। लेकिन, अब सेना ने इस पर पाबंदी लगा दी है। इसलिए, उनकी मांग है कि जब तक उनके गांव के लिए रास्ते का प्रबंध नहीं किया जाता, तब तक वह अपना विरोध इसी तरह जारी रखेंगे।
धरने पर बैठी महिलाओं ने कहा कि गांव के लिए दूसरी कोई सड़क नहीं बनाई गई है। वहीं, सैन्य क्षेत्र से होकर गुजर रही इस सड़क पर आए दिन सेना गांववालों की आवाजाही पर पाबंदी लगा देती है। इसके कारण उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ती है। आए दिन प्रदर्शन कर रास्ता खुलवाना पड़ता है। इसके बाद जितनी भी बार वे इस रास्ते से गुजरते हैं, उनकी गहनता से तलाशी ली जाती है।
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उन्होंने बताया कि उनके वाहनों को भी जांच के नाम पर घंटों रोककर रखा जाता है। आधार कार्ड को वे वैध नहीं मानते। इससे जल्दबाजी में किसी जरूरी काम के लिए जाने वाले लोगों और बीमारों को भी डॉक्टर के पास ले जाने के लिए काफी समस्या का सामना करना पड़ता है। इस समस्या के चलते इलाके के करीब छह से आठ गांव की 10 हजार आबादी को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि वीरवार को भी सैन्य अधिकारियों ने गांववासियों के इस रोड से गुजरने पर रोक लगा दी। सैन्य कर्मी उन्हें सैन्य क्षेत्र के बाहर से गुजर रहे नाले से होकर गुजरने की सलाह दे रहे हैं। वहां से गुजरना आसान नहीं। लंबे समय से लोग सड़क के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला।
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पूर्व विधायक ने बातचीत कर खुलवाया रास्ता
प्रदर्शन की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंचे पूर्व विधायक पवन कुमार गुप्ता ने कहा कि साल 2002 से गांव के लिए स्वतंत्र कॉरिडोर की मांग की जा रही है। लेकिन, मांग को पूरा नहीं किया जा रहा। सैन्य अधिकारी अक्सर गांव का रास्ता बंद कर देते हैं। इससे हर वर्ग के लोग परेशान हैं। सड़क गांववासियों का कानूनी अधिकार है। सैन्य अधिकारी इसे बंद नहीं कर सकते। सेना ने लोगों की जमीन ली। अब उन्हीं का रास्ता बंद किया जा रहा है। बाद में पूर्व विधायक ने सैन्य व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बातचीत कर रास्ता खुलवाया। कहा कि इस मामले के स्थायी समाधान को लेकर शनिवार को सुबह 11 बजे डीसी कार्यालय में सैन्य अधिकारियों की मौजूदगी में एक बैठक की जाएगी।
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सेना ने कहा - मार्ग को बंद नहीं, परिवर्तित किया था
सेना ने स्पष्टीकरण देते हुए मगैनी कोटली के निवासियों को सूचित किया है कि सड़क को बंद नहीं किया गया था। लेकिन, जम्मू-कश्मीर में हाल ही में हुई हत्या और उधमपुर की स्थानीय आबादी के लिए खतरों के बारे में खुफिया रिपोर्टों के मद्देनजर सुरक्षा कारणों से यातायात को परिवर्तित किया गया था। यह दिशा परिवर्तन स्थायी नहीं है। सुरक्षा आवश्यकताओं के संबंध में निर्णय की समीक्षा 4 जून को नागरिक प्रशासन के साथ मिलकर की जाएगी। जब तक स्थिति गंभीर नहीं होगी, यातायात बहाल कर दिया जाएगा। इसके साथ ही सेना ने नागरिक आबादी, मीडिया और राजनीतिक संगठनों से अनुरोध किया है कि सभी को सुरक्षित रखने और कानून व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।
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उनका कहना था कि सेना ने उनके गांव को जाने वाले एक मात्र रास्ते को बंद कर दिया है। इससे उनका गांव से बाहर आना जाना मुश्किल हो गया है। सदियों से गांववासी सैन्य क्षेत्र से गुजर रही इसी सड़क से आवाजाही करते हैं। लेकिन, अब सेना ने इस पर पाबंदी लगा दी है। इसलिए, उनकी मांग है कि जब तक उनके गांव के लिए रास्ते का प्रबंध नहीं किया जाता, तब तक वह अपना विरोध इसी तरह जारी रखेंगे।
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धरने पर बैठी महिलाओं ने कहा कि गांव के लिए दूसरी कोई सड़क नहीं बनाई गई है। वहीं, सैन्य क्षेत्र से होकर गुजर रही इस सड़क पर आए दिन सेना गांववालों की आवाजाही पर पाबंदी लगा देती है। इसके कारण उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ती है। आए दिन प्रदर्शन कर रास्ता खुलवाना पड़ता है। इसके बाद जितनी भी बार वे इस रास्ते से गुजरते हैं, उनकी गहनता से तलाशी ली जाती है।
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उन्होंने बताया कि उनके वाहनों को भी जांच के नाम पर घंटों रोककर रखा जाता है। आधार कार्ड को वे वैध नहीं मानते। इससे जल्दबाजी में किसी जरूरी काम के लिए जाने वाले लोगों और बीमारों को भी डॉक्टर के पास ले जाने के लिए काफी समस्या का सामना करना पड़ता है। इस समस्या के चलते इलाके के करीब छह से आठ गांव की 10 हजार आबादी को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि वीरवार को भी सैन्य अधिकारियों ने गांववासियों के इस रोड से गुजरने पर रोक लगा दी। सैन्य कर्मी उन्हें सैन्य क्षेत्र के बाहर से गुजर रहे नाले से होकर गुजरने की सलाह दे रहे हैं। वहां से गुजरना आसान नहीं। लंबे समय से लोग सड़क के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला।
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पूर्व विधायक ने बातचीत कर खुलवाया रास्ता
प्रदर्शन की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंचे पूर्व विधायक पवन कुमार गुप्ता ने कहा कि साल 2002 से गांव के लिए स्वतंत्र कॉरिडोर की मांग की जा रही है। लेकिन, मांग को पूरा नहीं किया जा रहा। सैन्य अधिकारी अक्सर गांव का रास्ता बंद कर देते हैं। इससे हर वर्ग के लोग परेशान हैं। सड़क गांववासियों का कानूनी अधिकार है। सैन्य अधिकारी इसे बंद नहीं कर सकते। सेना ने लोगों की जमीन ली। अब उन्हीं का रास्ता बंद किया जा रहा है। बाद में पूर्व विधायक ने सैन्य व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बातचीत कर रास्ता खुलवाया। कहा कि इस मामले के स्थायी समाधान को लेकर शनिवार को सुबह 11 बजे डीसी कार्यालय में सैन्य अधिकारियों की मौजूदगी में एक बैठक की जाएगी।
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सेना ने कहा - मार्ग को बंद नहीं, परिवर्तित किया था
सेना ने स्पष्टीकरण देते हुए मगैनी कोटली के निवासियों को सूचित किया है कि सड़क को बंद नहीं किया गया था। लेकिन, जम्मू-कश्मीर में हाल ही में हुई हत्या और उधमपुर की स्थानीय आबादी के लिए खतरों के बारे में खुफिया रिपोर्टों के मद्देनजर सुरक्षा कारणों से यातायात को परिवर्तित किया गया था। यह दिशा परिवर्तन स्थायी नहीं है। सुरक्षा आवश्यकताओं के संबंध में निर्णय की समीक्षा 4 जून को नागरिक प्रशासन के साथ मिलकर की जाएगी। जब तक स्थिति गंभीर नहीं होगी, यातायात बहाल कर दिया जाएगा। इसके साथ ही सेना ने नागरिक आबादी, मीडिया और राजनीतिक संगठनों से अनुरोध किया है कि सभी को सुरक्षित रखने और कानून व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।