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Udhampur News: प्रशासन लापरवाह ... गाद व गंदगी में लगानी पड़ी आस्था की डुबकी
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गंदगी से भरी देविका नदी के किनारे धार्मिक अनुष्ठान पूरे करते श्रद्धालु।
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- नहीं करवाई गई देविका की सफाई, पवित्र स्नान व धार्मिक अनुष्ठान करने पहुंचे श्रद्धालु हुए निराश
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। प्रशासन की लापरवाही के कारण देविका घाट पर पहुंचे श्रद्धालुओं को गाद और गंदगी के बीच आस्था की डुबकी लगानी पड़ी। प्रशासन ने तीन दिवसीय ऐतिहासिक बैसाखी मेले का आयोजन तो कर दिया, लेकिन पवित्र देविका नदी के जलकुंडों की सफाई करना भूल गया।
रविवार से शुरू हुए बैसाखी मेले के दौरान देविका नदी काले रंग की गाद और गंदगी से भरी नजर आई। इससे तट पर सुबह पवित्र स्नान और धार्मिक अनुष्ठान पूरा करने पहुंचे श्रद्धालु निराश दिखे। श्रद्धालुओं ने जैसे-तैसे करके स्नान और अन्य धार्मिक अनुष्ठान पूर्ण किए जबकि ज्यादातर लोग बिना स्नान और कर्म कांड के ही लौट गए। बाद में उन्होंने दूसरी जगहों पर मौजूद जलाशयों पर स्नान कर पूजन आदि किया।
देविका नदी की इस बदहाली को लेकर शहरवासियों में रोष नजर आया। उन्होंने प्रशासन पर जानबूझकर श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया। कहा कि बैसाखी पर्व पर हर साल देविका में स्नान और धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए जिले भर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसी परंपरा के चलते प्राचीन काल से देविका घाट पर तीन दिवसीय बैसाखी मेला भी लगता आ रहा है। लेकिन कुछ सालों से प्रशासन का खास अवसरों पर देविका नदी की स्वच्छता को लेकर रवैया उदासीनता वाला रहा है।
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काफी निराशाजनक है
हर साल बैसाखी पर्व और अन्य खास मौके पर देविका नदी में स्नान और अन्य धार्मिक अनुष्ठान के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है। लेकिन इस साल देविका नदी के जलकुंड काले रंग की गाद और गंदगी से भरे पड़े हैं। यह काफी निराशाजनक है
-अरुण शर्मा
दुर्दशा देखकर मन काफी व्यथित हुआ
लगभग 190 करोड़ की देविका परियोजना का काम पूरा करने के बाद भी पवित्र देविका नदी की यह दुर्दशा देखकर मन काफी व्यथित हुआ। शहर में इस प्राचीन बैसाखी मेले का इतिहास ही मां देविका में आस्था की डुबकी के साथ जुड़ा है। लेकिन प्रशासन ने अब सिर्फ मेले को महत्व दिया है जबकि आस्था को दरकिनार कर दिया है।
-अंकित शर्मा
--
विशेष ध्यान देने की जरूरत
माता पार्वती के स्वरूप में देविका को यहां पूजा जाता है। इससे शहरवासियों की प्रगाढ़ आस्था से जुड़ी हुई है। बैसाखी मेले जैसे खास अवसर पर भी देविका के जलकुंडों की सफाई नहीं किया जाना काफी दुखद है। देविका नदी की पवित्रता को बनाए रखने पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। -सोहन लाल
जलकुंडों की साफ-सफाई पर ध्यान दिया जाए
मात्र देविका घाट पर किए सौंदर्यीकरण से पवित्र देविका का अस्तित्व बचाना संभव नहीं है। इसके जलकुंडों की साफ-सफाई पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है। बैसाखी के विशेष पर्व पर भी पवित्र देविका नदी को गाद और गंदगी से भरी देखकर मन को काफी ठेस लगी है।
-वरुण शर्मा
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कोट..
नवरात्र से पहले देविका की सफाई करवाई गई थी लेकिन रामनवमी पर साख विसर्जन के दौरान यह फिर से गंदगी से भर गई है इसलिए देविका की स्वच्छता बनाए रखने को लेकर जनता को सहयोग भी बेहद जरूरी है। समस्या का जल्द समाधान किया जाएगा।
-राजिंदर ढींगरा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद
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संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। प्रशासन की लापरवाही के कारण देविका घाट पर पहुंचे श्रद्धालुओं को गाद और गंदगी के बीच आस्था की डुबकी लगानी पड़ी। प्रशासन ने तीन दिवसीय ऐतिहासिक बैसाखी मेले का आयोजन तो कर दिया, लेकिन पवित्र देविका नदी के जलकुंडों की सफाई करना भूल गया।
रविवार से शुरू हुए बैसाखी मेले के दौरान देविका नदी काले रंग की गाद और गंदगी से भरी नजर आई। इससे तट पर सुबह पवित्र स्नान और धार्मिक अनुष्ठान पूरा करने पहुंचे श्रद्धालु निराश दिखे। श्रद्धालुओं ने जैसे-तैसे करके स्नान और अन्य धार्मिक अनुष्ठान पूर्ण किए जबकि ज्यादातर लोग बिना स्नान और कर्म कांड के ही लौट गए। बाद में उन्होंने दूसरी जगहों पर मौजूद जलाशयों पर स्नान कर पूजन आदि किया।
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देविका नदी की इस बदहाली को लेकर शहरवासियों में रोष नजर आया। उन्होंने प्रशासन पर जानबूझकर श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया। कहा कि बैसाखी पर्व पर हर साल देविका में स्नान और धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए जिले भर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसी परंपरा के चलते प्राचीन काल से देविका घाट पर तीन दिवसीय बैसाखी मेला भी लगता आ रहा है। लेकिन कुछ सालों से प्रशासन का खास अवसरों पर देविका नदी की स्वच्छता को लेकर रवैया उदासीनता वाला रहा है।
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काफी निराशाजनक है
हर साल बैसाखी पर्व और अन्य खास मौके पर देविका नदी में स्नान और अन्य धार्मिक अनुष्ठान के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है। लेकिन इस साल देविका नदी के जलकुंड काले रंग की गाद और गंदगी से भरे पड़े हैं। यह काफी निराशाजनक है
-अरुण शर्मा
दुर्दशा देखकर मन काफी व्यथित हुआ
लगभग 190 करोड़ की देविका परियोजना का काम पूरा करने के बाद भी पवित्र देविका नदी की यह दुर्दशा देखकर मन काफी व्यथित हुआ। शहर में इस प्राचीन बैसाखी मेले का इतिहास ही मां देविका में आस्था की डुबकी के साथ जुड़ा है। लेकिन प्रशासन ने अब सिर्फ मेले को महत्व दिया है जबकि आस्था को दरकिनार कर दिया है।
-अंकित शर्मा
विशेष ध्यान देने की जरूरत
माता पार्वती के स्वरूप में देविका को यहां पूजा जाता है। इससे शहरवासियों की प्रगाढ़ आस्था से जुड़ी हुई है। बैसाखी मेले जैसे खास अवसर पर भी देविका के जलकुंडों की सफाई नहीं किया जाना काफी दुखद है। देविका नदी की पवित्रता को बनाए रखने पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। -सोहन लाल
जलकुंडों की साफ-सफाई पर ध्यान दिया जाए
मात्र देविका घाट पर किए सौंदर्यीकरण से पवित्र देविका का अस्तित्व बचाना संभव नहीं है। इसके जलकुंडों की साफ-सफाई पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है। बैसाखी के विशेष पर्व पर भी पवित्र देविका नदी को गाद और गंदगी से भरी देखकर मन को काफी ठेस लगी है।
-वरुण शर्मा
कोट..
नवरात्र से पहले देविका की सफाई करवाई गई थी लेकिन रामनवमी पर साख विसर्जन के दौरान यह फिर से गंदगी से भर गई है इसलिए देविका की स्वच्छता बनाए रखने को लेकर जनता को सहयोग भी बेहद जरूरी है। समस्या का जल्द समाधान किया जाएगा।
-राजिंदर ढींगरा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद