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Udhampur News: बचपन के शौक को बनाया आजीविका का साधन, हुनर के दम पर पल्लवी बनीं आत्मनिर्भर
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उधमपुर। बचपन में जिस काम को पल्लवी सेठ शौक के तौर पर करती थीं, वही हुनर आज उनके आत्मनिर्भरता का साधन बन गया है। उधमपुर के मांड ईस्ट बिखनगला की रहने वाली पल्लवी सेठ (28) ने अपने रचनात्मक हुनर को रोजगार का रूप देकर न केवल खुद के लिए आय का जरिया तैयार किया, बल्कि गांव की अन्य युवतियों को भी इससे जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
एमए तक शिक्षा प्राप्त पल्लवी पिछले करीब एक वर्ष से घर से ही विभिन्न प्रकार के सजावटी और हस्तनिर्मित सामान तैयार कर रही हैं। उनके उत्पादों में कलीरे, जयमाला, लेटर अरेंजमेंट, फूलों की सजावट, गिफ्ट वॉच कवर, वेलकम डेकोरेशन, शोपीस, क्ले और मिरर वर्क वाले सजावटी सामान, बुके, ब्रेसलेट, की-चेन, हेयर पिन और रबर बैंड सहित कई तरह के उत्पाद शामिल हैं। उनके हाथों से तैयार सामान में रचनात्मकता के साथ स्थानीय हुनर की झलक भी देखने को मिलती है।
पल्लवी बताती हैं कि उन्हें बचपन से ही सजावटी और रचनात्मक वस्तुएं बनाने का शौक था। पहले वह इसे केवल अपने शौक तक सीमित रखती थीं, लेकिन नौकरी की तलाश के दौरान उन्होंने अपने हुनर को ही रोजगार का माध्यम बनाने का फैसला किया। करीब एक वर्ष पहले उन्होंने घर से छोटे स्तर पर काम शुरू किया।
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शुरुआत में काम सीमित था लेकिन मेहनत, गुणवत्ता और ग्राहकों की पसंद के अनुसार डिजाइन तैयार करने के कारण धीरे-धीरे उनके उत्पादों की मांग बढ़ने लगी। अब पल्लवी ऑनलाइन माध्यम से जम्मू, कटड़ा, उधमपुर और आसपास के क्षेत्रों से ऑर्डर प्राप्त कर रही हैं। ग्राहकों की जरूरत और पसंद के मुताबिक डिजाइन और सजावट में बदलाव कर वह उत्पाद तैयार करती हैं और ऑर्डर की डिलीवरी भी करवाती हैं।
पल्लवी ने अपने हुनर को केवल व्यक्तिगत कमाई तक सीमित नहीं रखा है। वह गांव की अन्य युवतियों को भी अपने साथ जोड़ रही हैं और उन्हें सजावटी एवं हस्तनिर्मित सामान तैयार करने का प्रशिक्षण तथा काम में सहयोग का अवसर दे रही हैं। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में कई युवतियों के पास हुनर तो है, लेकिन उन्हें उसे रोजगार में बदलने का अवसर नहीं मिल पाता। ऐसे में उनका प्रयास है कि युवतियां अपने हुनर को पहचानें और उसका उपयोग कर आय अर्जित करते हुए आत्मनिर्भर बनें।
पल्लवी सेठ की कहानी उन महिलाओं एवं युवतियों के लिए प्रेरणादायक है, जो पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार के नए अवसर तलाश रही हैं। उन्होंने साबित किया है कि आत्मनिर्भर बनने के लिए हमेशा बड़े शहर या बड़ी नौकरी की आवश्यकता नहीं होती। यदि हुनर और रचनात्मकता को सही दिशा दी जाए तो घर से भी रोजगार की शुरुआत की जा सकती है। पल्लवी का सफर यह संदेश देता है कि मेहनत, लगन और अपने हुनर पर विश्वास के साथ बचपन का शौक भी आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन सकता है।
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एमए तक शिक्षा प्राप्त पल्लवी पिछले करीब एक वर्ष से घर से ही विभिन्न प्रकार के सजावटी और हस्तनिर्मित सामान तैयार कर रही हैं। उनके उत्पादों में कलीरे, जयमाला, लेटर अरेंजमेंट, फूलों की सजावट, गिफ्ट वॉच कवर, वेलकम डेकोरेशन, शोपीस, क्ले और मिरर वर्क वाले सजावटी सामान, बुके, ब्रेसलेट, की-चेन, हेयर पिन और रबर बैंड सहित कई तरह के उत्पाद शामिल हैं। उनके हाथों से तैयार सामान में रचनात्मकता के साथ स्थानीय हुनर की झलक भी देखने को मिलती है।
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पल्लवी बताती हैं कि उन्हें बचपन से ही सजावटी और रचनात्मक वस्तुएं बनाने का शौक था। पहले वह इसे केवल अपने शौक तक सीमित रखती थीं, लेकिन नौकरी की तलाश के दौरान उन्होंने अपने हुनर को ही रोजगार का माध्यम बनाने का फैसला किया। करीब एक वर्ष पहले उन्होंने घर से छोटे स्तर पर काम शुरू किया।
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शुरुआत में काम सीमित था लेकिन मेहनत, गुणवत्ता और ग्राहकों की पसंद के अनुसार डिजाइन तैयार करने के कारण धीरे-धीरे उनके उत्पादों की मांग बढ़ने लगी। अब पल्लवी ऑनलाइन माध्यम से जम्मू, कटड़ा, उधमपुर और आसपास के क्षेत्रों से ऑर्डर प्राप्त कर रही हैं। ग्राहकों की जरूरत और पसंद के मुताबिक डिजाइन और सजावट में बदलाव कर वह उत्पाद तैयार करती हैं और ऑर्डर की डिलीवरी भी करवाती हैं।
पल्लवी ने अपने हुनर को केवल व्यक्तिगत कमाई तक सीमित नहीं रखा है। वह गांव की अन्य युवतियों को भी अपने साथ जोड़ रही हैं और उन्हें सजावटी एवं हस्तनिर्मित सामान तैयार करने का प्रशिक्षण तथा काम में सहयोग का अवसर दे रही हैं। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में कई युवतियों के पास हुनर तो है, लेकिन उन्हें उसे रोजगार में बदलने का अवसर नहीं मिल पाता। ऐसे में उनका प्रयास है कि युवतियां अपने हुनर को पहचानें और उसका उपयोग कर आय अर्जित करते हुए आत्मनिर्भर बनें।
पल्लवी सेठ की कहानी उन महिलाओं एवं युवतियों के लिए प्रेरणादायक है, जो पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार के नए अवसर तलाश रही हैं। उन्होंने साबित किया है कि आत्मनिर्भर बनने के लिए हमेशा बड़े शहर या बड़ी नौकरी की आवश्यकता नहीं होती। यदि हुनर और रचनात्मकता को सही दिशा दी जाए तो घर से भी रोजगार की शुरुआत की जा सकती है। पल्लवी का सफर यह संदेश देता है कि मेहनत, लगन और अपने हुनर पर विश्वास के साथ बचपन का शौक भी आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन सकता है।