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Udhampur News: भाजपा के तीन पूर्व बीडीसी अध्यक्षों ने पार्टी से दिया इस्तीफा
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कटड़ा। श्री माता वैष्णो देवी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा से जुड़े तीन पूर्व बीडीसी अध्यक्षों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर जिला रियासी में आयोजित कार्यक्रमों के बीच सामने आए इस राजनीतिक घटनाक्रम ने क्षेत्र में भाजपा की संगठनात्मक स्थिति को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।
जानकारी के अनुसार कटड़ा ब्लॉक के पूर्व बीडीसी अध्यक्ष श्याम लाल भगत, पैंथल ब्लॉक के पूर्व बीडीसी अध्यक्ष चंद्र मोहन सिंह तथा भामाग ब्लॉक के पूर्व बीडीसी अध्यक्ष अशोक ठाकुर ने संयुक्त रूप से अपना इस्तीफा जिला भाजपा अध्यक्ष रोहित दुबे को भेजा है।
इस्तीफे के कारणों को लेकर तीनों नेता फिलहाल खुलकर कुछ भी कहने से बचते नजर आए। हालांकि उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी में लंबे समय से उन्हें उचित महत्व नहीं दिया जा रहा था। इसके अलावा क्षेत्र के कार्यकर्ताओं से जुड़े मुद्दों और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए अपेक्षित प्रयास नहीं होने से भी उनमें नाराजगी थी। नेताओं ने पार्टी के भीतर बढ़ती गुटबाजी और असंतोष को भी अपने फैसले के पीछे एक प्रमुख कारण बताया। तीनों नेताओं का कहना है कि उन्होंने संगठन में लंबे समय तक काम किया, लेकिन इसके बावजूद उनकी बातों और सुझावों को गंभीरता से नहीं लिया गया। उनका आरोप है कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को उचित सम्मान और जिम्मेदारी नहीं मिल पा रही है।
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जानकारी के अनुसार कटड़ा ब्लॉक के पूर्व बीडीसी अध्यक्ष श्याम लाल भगत, पैंथल ब्लॉक के पूर्व बीडीसी अध्यक्ष चंद्र मोहन सिंह तथा भामाग ब्लॉक के पूर्व बीडीसी अध्यक्ष अशोक ठाकुर ने संयुक्त रूप से अपना इस्तीफा जिला भाजपा अध्यक्ष रोहित दुबे को भेजा है।
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इस्तीफे के कारणों को लेकर तीनों नेता फिलहाल खुलकर कुछ भी कहने से बचते नजर आए। हालांकि उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी में लंबे समय से उन्हें उचित महत्व नहीं दिया जा रहा था। इसके अलावा क्षेत्र के कार्यकर्ताओं से जुड़े मुद्दों और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए अपेक्षित प्रयास नहीं होने से भी उनमें नाराजगी थी। नेताओं ने पार्टी के भीतर बढ़ती गुटबाजी और असंतोष को भी अपने फैसले के पीछे एक प्रमुख कारण बताया। तीनों नेताओं का कहना है कि उन्होंने संगठन में लंबे समय तक काम किया, लेकिन इसके बावजूद उनकी बातों और सुझावों को गंभीरता से नहीं लिया गया। उनका आरोप है कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को उचित सम्मान और जिम्मेदारी नहीं मिल पा रही है।
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