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Udhampur News: होटल और संबद्ध उद्योगों के लिए बैंकों की तर्ज पर समान बिजली पुनर्वास पैकेज शुरू हो
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कटड़ा। होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन कटड़ा ने आयोजित बैठक में सरकार से मांग की है कि होटल उद्योग एवं पर्यटन से जुड़े अन्य प्रतिष्ठानों के लिए भी बैंकों की तर्ज पर या उससे भी बेहतर पुनर्वास एवं राहत पैकेज की घोषणा की जाए।
बैठक में प्रतिनिधियों ने कहा कि पिछले कुछ समय से क्षेत्र का पर्यटन उद्योग अभूतपूर्व संकट से जूझ रहा है। पहलगाम आतंकी हमला, भारत-पाक तनाव, माता वैष्णो देवी मार्ग पर भूस्खलन की घटनाओं में श्रद्धालुओं की मौत, मचैल हादसे और लगातार यात्राओं व व्यावसायिक गतिविधियों में व्यवधान जैसी घटनाओं ने उद्योग की रीढ़ तोड़ दी है। उन्होंने कहा कि भूस्खलन के बाद रेलवे द्वारा सभी प्रमुख ट्रेनों को बंद रखे जाने से व्यापार पर और अधिक बुरा असर पड़ा है। होटल, रेस्टोरेंट और यात्रा व्यवसाय से जुड़े संस्थानों की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर हो चुकी है, यहां तक कि कई संस्थान अपने मूल संचालन खर्च तक पूरे नहीं कर पा रहे हैं। प्रतिनिधियों ने बताया कि आरबीआई, सरकार और जम्मू-कश्मीर बैंक द्वारा पहले भी व्यावसायिक इकाइयों को राहत देने के लिए पुनर्वास पैकेज और रियायतें दी गई थीं, लेकिन बिजली विभाग की ओर से अब तक किसी प्रकार की राहत नहीं दी गई है, जबकि होटल उद्योग को भी समान या उससे अधिक नुकसान हुआ है।
उन्होंने कहा कि होटल व्यवसाय में बिजली का खर्च निरंतर बना रहता है, चाहे कमरे भरे हों या खाली। अतः यात्रियों के न आने के बावजूद आवश्यक प्रकाश और विद्युत प्रणाली चालू रखनी पड़ती है, जिसके कारण बिजली बिल लगातार बढ़ते रहे जबकि आमदनी लगभग शून्य रही। इससे अधिकांश इकाइयां कर्ज में डूब गई हैं। एसोसिएशन ने जोर देकर कहा कि अब समय की मांग है कि बिजली विभाग भी बैंकों की तर्ज पर राहत पैकेज घोषित करे, जिससे होटल एवं संबद्ध इकाइयां पुनः पटरी पर लौट सकें और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था व तीर्थ पर्यटन को गति मिल सके। प्रतिनिधियों ने सरकार एवं संबंधित अधिकारियों से आग्रह किया कि वे शीघ्र संज्ञान लें और आवश्यक राहत उपाय बिना विलंब के लागू करें। एसोसिएशन ने यह भी कहा कि रेलवे द्वारा रोकी गई सभी ट्रेनों को तुरंत बहाल किया जाए, क्योंकि इससे व्यापार पर गहरा असर पड़ रहा है और यात्रियों को भी भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। बैठक में एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश वज़ीर, चेयरमैन श्याम लाल केसर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष वीरेन्द्र केसरी, उपाध्यक्ष अजय कोतवाल, निशांत शर्मा, विवेक शर्मा, अमित राही, सचिव सुदर्शन शर्मा सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
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बैठक में प्रतिनिधियों ने कहा कि पिछले कुछ समय से क्षेत्र का पर्यटन उद्योग अभूतपूर्व संकट से जूझ रहा है। पहलगाम आतंकी हमला, भारत-पाक तनाव, माता वैष्णो देवी मार्ग पर भूस्खलन की घटनाओं में श्रद्धालुओं की मौत, मचैल हादसे और लगातार यात्राओं व व्यावसायिक गतिविधियों में व्यवधान जैसी घटनाओं ने उद्योग की रीढ़ तोड़ दी है। उन्होंने कहा कि भूस्खलन के बाद रेलवे द्वारा सभी प्रमुख ट्रेनों को बंद रखे जाने से व्यापार पर और अधिक बुरा असर पड़ा है। होटल, रेस्टोरेंट और यात्रा व्यवसाय से जुड़े संस्थानों की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर हो चुकी है, यहां तक कि कई संस्थान अपने मूल संचालन खर्च तक पूरे नहीं कर पा रहे हैं। प्रतिनिधियों ने बताया कि आरबीआई, सरकार और जम्मू-कश्मीर बैंक द्वारा पहले भी व्यावसायिक इकाइयों को राहत देने के लिए पुनर्वास पैकेज और रियायतें दी गई थीं, लेकिन बिजली विभाग की ओर से अब तक किसी प्रकार की राहत नहीं दी गई है, जबकि होटल उद्योग को भी समान या उससे अधिक नुकसान हुआ है।
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उन्होंने कहा कि होटल व्यवसाय में बिजली का खर्च निरंतर बना रहता है, चाहे कमरे भरे हों या खाली। अतः यात्रियों के न आने के बावजूद आवश्यक प्रकाश और विद्युत प्रणाली चालू रखनी पड़ती है, जिसके कारण बिजली बिल लगातार बढ़ते रहे जबकि आमदनी लगभग शून्य रही। इससे अधिकांश इकाइयां कर्ज में डूब गई हैं। एसोसिएशन ने जोर देकर कहा कि अब समय की मांग है कि बिजली विभाग भी बैंकों की तर्ज पर राहत पैकेज घोषित करे, जिससे होटल एवं संबद्ध इकाइयां पुनः पटरी पर लौट सकें और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था व तीर्थ पर्यटन को गति मिल सके। प्रतिनिधियों ने सरकार एवं संबंधित अधिकारियों से आग्रह किया कि वे शीघ्र संज्ञान लें और आवश्यक राहत उपाय बिना विलंब के लागू करें। एसोसिएशन ने यह भी कहा कि रेलवे द्वारा रोकी गई सभी ट्रेनों को तुरंत बहाल किया जाए, क्योंकि इससे व्यापार पर गहरा असर पड़ रहा है और यात्रियों को भी भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। बैठक में एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश वज़ीर, चेयरमैन श्याम लाल केसर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष वीरेन्द्र केसरी, उपाध्यक्ष अजय कोतवाल, निशांत शर्मा, विवेक शर्मा, अमित राही, सचिव सुदर्शन शर्मा सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
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