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ड्रोन तकनीक, फॉरेंसिक जांच और उभरती चुनौतियों की समझ पुलिस के लिए बेहद जरूरी : डीआईजी
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उधमपुर। शेर-ए-कश्मीर पुलिस अकादमी (एसकेपीए) उधमपुर में जम्मू-कश्मीर पुलिस के अधिकारियों के लिए ‘ड्रोन टेक्नोलॉजी, इंटरसेप्शन एंड ड्रोन फॉरेंसिक’ विषय पर आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण पाठ्यक्रम संपन्न हुआ। इस अवसर पर अकादमी के निदेशक एवं आईजीपी डॉ. मोहम्मद हसीब मुगल ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से ड्रोन तकनीक के बढ़ते महत्व, पुलिसिंग में इसके उपयोग तथा इससे जुड़ी उभरती चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
डॉ. मुगल ने कहा कि आधुनिक समय में ड्रोन तकनीक कानून व्यवस्था, निगरानी, सुरक्षा और अपराधों की जांच के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। ऐसे में पुलिस अधिकारियों के लिए ड्रोन प्रणालियों की तकनीकी जानकारी और उनकी कार्यप्रणाली को समझना बेहद आवश्यक है।
उन्होंने ड्रोन के विभिन्न प्रकारों, उनकी तकनीकी विशेषताओं और परिचालन क्षमताओं की जानकारी देते हुए ड्रोन फॉरेंसिक्स के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ड्रोन से संबंधित डिजिटल साक्ष्यों की पहचान, जांच, इलेक्ट्रॉनिक डेटा का संरक्षण और उनका वैज्ञानिक विश्लेषण आपराधिक मामलों की जांच में अहम भूमिका निभा सकता है।
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निदेशक ने ड्रोन के दुरुपयोग से उत्पन्न होने वाले सुरक्षा खतरों, अवैध निगरानी, तस्करी और तकनीक आधारित आपराधिक गतिविधियों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने पुलिस कर्मियों से तकनीकी रूप से दक्ष बनने, विशेष कौशल विकसित करने और ड्रोन तकनीक में हो रहे नवीनतम बदलावों के साथ कदमताल करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भविष्य की सुरक्षा एवं जांच संबंधी चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पुलिस बल का तकनीकी रूप से सक्षम और जागरूक होना जरूरी है।
इस प्रस्तुतीकरण से प्रशिक्षण में शामिल अधिकारियों को ड्रोन तकनीक के व्यावहारिक, परिचालन और फॉरेंसिक पहलुओं की महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई। इसके बाद आयोजित समापन समारोह में पांच दिवसीय प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का औपचारिक रूप से समापन किया गया। इस अवसर पर प्रतिभागी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान और कौशल का अपने-अपने कार्यक्षेत्र में प्रभावी उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम का समापन निरंतर सीखने, तकनीकी उन्नयन और पुलिस बल की क्षमता निर्माण पर विशेष जोर देने के साथ हुआ ताकि जम्मू-कश्मीर पुलिस को अधिक प्रभावी, संवेदनशील और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार बनाया जा सके।
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डॉ. मुगल ने कहा कि आधुनिक समय में ड्रोन तकनीक कानून व्यवस्था, निगरानी, सुरक्षा और अपराधों की जांच के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। ऐसे में पुलिस अधिकारियों के लिए ड्रोन प्रणालियों की तकनीकी जानकारी और उनकी कार्यप्रणाली को समझना बेहद आवश्यक है।
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उन्होंने ड्रोन के विभिन्न प्रकारों, उनकी तकनीकी विशेषताओं और परिचालन क्षमताओं की जानकारी देते हुए ड्रोन फॉरेंसिक्स के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ड्रोन से संबंधित डिजिटल साक्ष्यों की पहचान, जांच, इलेक्ट्रॉनिक डेटा का संरक्षण और उनका वैज्ञानिक विश्लेषण आपराधिक मामलों की जांच में अहम भूमिका निभा सकता है।
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निदेशक ने ड्रोन के दुरुपयोग से उत्पन्न होने वाले सुरक्षा खतरों, अवैध निगरानी, तस्करी और तकनीक आधारित आपराधिक गतिविधियों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने पुलिस कर्मियों से तकनीकी रूप से दक्ष बनने, विशेष कौशल विकसित करने और ड्रोन तकनीक में हो रहे नवीनतम बदलावों के साथ कदमताल करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भविष्य की सुरक्षा एवं जांच संबंधी चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पुलिस बल का तकनीकी रूप से सक्षम और जागरूक होना जरूरी है।
इस प्रस्तुतीकरण से प्रशिक्षण में शामिल अधिकारियों को ड्रोन तकनीक के व्यावहारिक, परिचालन और फॉरेंसिक पहलुओं की महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई। इसके बाद आयोजित समापन समारोह में पांच दिवसीय प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का औपचारिक रूप से समापन किया गया। इस अवसर पर प्रतिभागी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान और कौशल का अपने-अपने कार्यक्षेत्र में प्रभावी उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम का समापन निरंतर सीखने, तकनीकी उन्नयन और पुलिस बल की क्षमता निर्माण पर विशेष जोर देने के साथ हुआ ताकि जम्मू-कश्मीर पुलिस को अधिक प्रभावी, संवेदनशील और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार बनाया जा सके।