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Udhampur News: अतिक्रमण की चपेट में शहर के फुटपाथ, सड़क पर चलने को मजबूर राहगीर
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उधमपुर। शहर में राहगीरों की सुविधा के लिए बनाए गए फुटपाथ अतिक्रमण की चपेट में हैं। शहर में पहले ही फुटपाथों की संख्या सीमित है, लेकिन गोल मार्केट और धार रोड पर मौजूद दोनों प्रमुख फुटपाथ भी लोगों के चलने के लिए उपयोगी नहीं रह गए हैं। कहीं दुकानदारों ने सामान सजा रखा है तो कहीं रेहड़ी-फड़ी संचालकों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों ने कब्जा कर रखा है। ऐसे में राहगीरों को मजबूरन व्यस्त सड़कों पर चलना पड़ता है, जिससे यातायात प्रभावित होने के साथ सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है।
गोल मार्केट शहर का प्रमुख और व्यस्त कारोबारी क्षेत्र है। यहां दुकानों के आगे बने फुटपाथ पर दुकानदारों का सामान और रेहड़ी-फड़ियां लगी रहती हैं। दिनभर खरीदारी के लिए लोगों की आवाजाही के बावजूद पैदल चलने की पर्याप्त जगह नहीं मिलती। इसके चलते राहगीरों को सड़क पर उतरना पड़ता है, जिससे यातायात का दबाव बढ़ता है और कई बार जाम जैसी स्थिति पैदा हो जाती है।
वहीं, धार रोड पर दोमेल से वीनस चौक तक करीब ढाई किलोमीटर लंबे हिस्से में फुटपाथ बनाया गया है। लगभग पांच साल पहले करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस आधुनिक फुटपाथ का उद्देश्य लोगों को सुरक्षित पैदल रास्ता उपलब्ध करवाना था। करीब चार फुट चौड़े इस फुटपाथ पर बैठने के लिए बेंच और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाओं का भी प्रावधान किया गया था। इसके बावजूद निर्माण के बाद से यहां अतिक्रमण की समस्या बनी हुई है। जगह-जगह दुकानदारों का सामान रखा रहता है, जबकि कुछ हिस्सों में होटल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की पार्किंग ने पैदल चलने की जगह घेर रखी है।
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धार रोड का यह हिस्सा शहर के सबसे व्यस्त क्षेत्रों में शामिल है। यहां जीएमसी, कोर्ट परिसर, तहसील कार्यालय, जिला मुख्यालय, बैंक, सरकारी कार्यालय, होटल, रेस्तरां और बस स्टॉप मौजूद हैं। दिनभर बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही और वाहनों के दबाव के बीच फुटपाथ पर कब्जे के कारण राहगीरों को सड़क पर चलना पड़ता है। इससे पैदल चलने वालों और वाहन चालकों दोनों को परेशानी होती है।
कार्रवाई के बाद फिर वही हालात
गोल मार्केट और धार रोड के फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त करवाने के लिए नगर परिषद और प्रशासन समय-समय पर अभियान चलाते रहे हैं। दुकानदारों और रेहड़ी-फड़ी संचालकों को चेतावनी देने के साथ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी की जाती है, लेकिन इसका असर कुछ दिनों तक ही रहता है। इसके बाद दोबारा फुटपाथ पर सामान सजने लगता है। बार-बार कार्रवाई के बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकलने से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए अधिक परेशानी
शहरवासियों के अनुसार फुटपाथों पर अतिक्रमण का सबसे अधिक खामियाजा बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगजनों को भुगतना पड़ता है। उन्हें वाहनों के बीच से सड़क पर चलना पड़ता है। सड़क किनारे खड़े वाहनों और तेज रफ्तार ट्रैफिक के बीच गुजरना जोखिम भरा है। भीड़भाड़ वाले बाजारों और कार्यालयों के आसपास दुर्घटना की आशंका और बढ़ जाती है।
कोट
फुटपाथों का निर्माण सार्वजनिक सुविधा के लिए किया गया है, इसलिए इन पर किसी भी तरह का निजी कब्जा नहीं होना चाहिए। प्रशासन को चाहिए कि गोल मार्किट से लेकर धार रोड तक सभी फुटपाथों का निरीक्षण करवाकर अतिक्रमण हटाने के लिए नियमित अभियान चलाया जाए।
-नवीन कुमार, स्थानीय निवासी
फुटपाथ को कब्जा मुक्त बनाने के साथ यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कार्रवाई के बाद दोबारा कोई दुकानदार, रेहड़ी-फड़ी संचालक या व्यावसायिक प्रतिष्ठान फुटपाथ पर कब्जा न कर सके। इसके लिए नियमित निगरानी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है।
-अश्वनी बैगड़ा, स्थानीय निवासी
यदि फुटपाथों को स्थायी रूप से अतिक्रमण मुक्त रखा जाता है तो शहरवासियों को सुरक्षित पैदल रास्ता मिल सकेगा। इससे सड़क पर पैदल चलने वालों की संख्या कम होगी, यातायात व्यवस्था में सुधार होगा और संभावित सड़क दुर्घटनाओं के खतरे को भी कम किया जा सकेगा।
-राज कुमार, स्थानीय निवासी
फुटपाथ पर सामान रखकर कब्जा किया जाना गलत है और इसके खिलाफ प्रशासन को नियमों के तहत कार्रवाई करनी चाहिए। दुकानदारों को भी चाहिए अपनी दुकान की सीमा में सामान लगाएं और दुकानों के आगे रेहड़ी-फड़ियों को भी न लगने दें।
-जितेंद्र बरमानी, अध्यक्ष व्यापार मंडल
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फुटपाथ को अतिक्रमण मुक्त रखने के लिए नगर परिषद समय समय पर कार्रवाई करती है। दुकानदारों से भी अपील है कि फुटपाथ को अतिक्रमण मुक्त रखने में सहयोग करें। दुकानों के बाहर फुटपाथ पर सामान न लगाएं अन्यथा जुर्माने के साथ अब सामान जब्त करने की कार्रवाई भी शुरू की जाएगी।
-सद्दाम हुसैन,
सीईओ, नगर परिषद उधमपुर
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गोल मार्केट शहर का प्रमुख और व्यस्त कारोबारी क्षेत्र है। यहां दुकानों के आगे बने फुटपाथ पर दुकानदारों का सामान और रेहड़ी-फड़ियां लगी रहती हैं। दिनभर खरीदारी के लिए लोगों की आवाजाही के बावजूद पैदल चलने की पर्याप्त जगह नहीं मिलती। इसके चलते राहगीरों को सड़क पर उतरना पड़ता है, जिससे यातायात का दबाव बढ़ता है और कई बार जाम जैसी स्थिति पैदा हो जाती है।
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वहीं, धार रोड पर दोमेल से वीनस चौक तक करीब ढाई किलोमीटर लंबे हिस्से में फुटपाथ बनाया गया है। लगभग पांच साल पहले करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस आधुनिक फुटपाथ का उद्देश्य लोगों को सुरक्षित पैदल रास्ता उपलब्ध करवाना था। करीब चार फुट चौड़े इस फुटपाथ पर बैठने के लिए बेंच और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाओं का भी प्रावधान किया गया था। इसके बावजूद निर्माण के बाद से यहां अतिक्रमण की समस्या बनी हुई है। जगह-जगह दुकानदारों का सामान रखा रहता है, जबकि कुछ हिस्सों में होटल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की पार्किंग ने पैदल चलने की जगह घेर रखी है।
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धार रोड का यह हिस्सा शहर के सबसे व्यस्त क्षेत्रों में शामिल है। यहां जीएमसी, कोर्ट परिसर, तहसील कार्यालय, जिला मुख्यालय, बैंक, सरकारी कार्यालय, होटल, रेस्तरां और बस स्टॉप मौजूद हैं। दिनभर बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही और वाहनों के दबाव के बीच फुटपाथ पर कब्जे के कारण राहगीरों को सड़क पर चलना पड़ता है। इससे पैदल चलने वालों और वाहन चालकों दोनों को परेशानी होती है।
कार्रवाई के बाद फिर वही हालात
गोल मार्केट और धार रोड के फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त करवाने के लिए नगर परिषद और प्रशासन समय-समय पर अभियान चलाते रहे हैं। दुकानदारों और रेहड़ी-फड़ी संचालकों को चेतावनी देने के साथ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी की जाती है, लेकिन इसका असर कुछ दिनों तक ही रहता है। इसके बाद दोबारा फुटपाथ पर सामान सजने लगता है। बार-बार कार्रवाई के बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकलने से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए अधिक परेशानी
शहरवासियों के अनुसार फुटपाथों पर अतिक्रमण का सबसे अधिक खामियाजा बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगजनों को भुगतना पड़ता है। उन्हें वाहनों के बीच से सड़क पर चलना पड़ता है। सड़क किनारे खड़े वाहनों और तेज रफ्तार ट्रैफिक के बीच गुजरना जोखिम भरा है। भीड़भाड़ वाले बाजारों और कार्यालयों के आसपास दुर्घटना की आशंका और बढ़ जाती है।
कोट
फुटपाथों का निर्माण सार्वजनिक सुविधा के लिए किया गया है, इसलिए इन पर किसी भी तरह का निजी कब्जा नहीं होना चाहिए। प्रशासन को चाहिए कि गोल मार्किट से लेकर धार रोड तक सभी फुटपाथों का निरीक्षण करवाकर अतिक्रमण हटाने के लिए नियमित अभियान चलाया जाए।
-नवीन कुमार, स्थानीय निवासी
फुटपाथ को कब्जा मुक्त बनाने के साथ यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कार्रवाई के बाद दोबारा कोई दुकानदार, रेहड़ी-फड़ी संचालक या व्यावसायिक प्रतिष्ठान फुटपाथ पर कब्जा न कर सके। इसके लिए नियमित निगरानी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है।
-अश्वनी बैगड़ा, स्थानीय निवासी
यदि फुटपाथों को स्थायी रूप से अतिक्रमण मुक्त रखा जाता है तो शहरवासियों को सुरक्षित पैदल रास्ता मिल सकेगा। इससे सड़क पर पैदल चलने वालों की संख्या कम होगी, यातायात व्यवस्था में सुधार होगा और संभावित सड़क दुर्घटनाओं के खतरे को भी कम किया जा सकेगा।
-राज कुमार, स्थानीय निवासी
फुटपाथ पर सामान रखकर कब्जा किया जाना गलत है और इसके खिलाफ प्रशासन को नियमों के तहत कार्रवाई करनी चाहिए। दुकानदारों को भी चाहिए अपनी दुकान की सीमा में सामान लगाएं और दुकानों के आगे रेहड़ी-फड़ियों को भी न लगने दें।
-जितेंद्र बरमानी, अध्यक्ष व्यापार मंडल
फुटपाथ को अतिक्रमण मुक्त रखने के लिए नगर परिषद समय समय पर कार्रवाई करती है। दुकानदारों से भी अपील है कि फुटपाथ को अतिक्रमण मुक्त रखने में सहयोग करें। दुकानों के बाहर फुटपाथ पर सामान न लगाएं अन्यथा जुर्माने के साथ अब सामान जब्त करने की कार्रवाई भी शुरू की जाएगी।
-सद्दाम हुसैन,
सीईओ, नगर परिषद उधमपुर