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Udhampur News: नाबालिग से यौन शोषण मामले में दोषी को 20 साल कैद
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उधमपुर। प्रधान सत्र न्यायाधीश की अदालत ने 12 साल से कम उम्र की नाबालिग लड़की का यौन शोषण करने के दोष में 41 वर्षीय आरोपी को 20 साल के कारावास की सजा सुनाई।
मोहम्मद अरशद उर्फ नीका निवासी बाईं (वर्तमान में मोटर शेड चिनैनी निवासी) को पोक्सो अधिनियम की धारा 5(एम) के तहत दोषी पाया गया। अदालत ने 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। साथ ही आदेश दिया कि यह राशि वसूल कर पीड़िता को उसके चिकित्सा और पुनर्वास खर्चों के लिए सौंप दी जाए।
मामला 28 जुलाई 2020 का है। पीड़िता की मां ने रामनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि आरोपी ने उसकी नाबालिग बेटी के साथ उस समय छेड़छाड़ की जब वह खेतों में नाशपती तोड़ रही थी।
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मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने पीड़िता के परिवार के सदस्यों और चिकित्सा अधिकारियों सहित कई गवाह पेश किए। पीड़िता ने अदालत के समक्ष बताया कि आरोपी ने उसकी गोद से नाशपाती जबरन छीन ली और उसका यौन उत्पीड़न किया।
अभियोजन पक्ष ने एक बच्चे के खिलाफ किए गए कृत्य की क्रूर प्रकृति पर जोर देते हुए अधिकतम सजा की मांग की। हालांकि, बचाव पक्ष ने दोषी की उम्र, पारिवारिक जिम्मेदारियों और स्वच्छ पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए नरमी बरतने की दलील दी।
अपने फैसले में प्रधान सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह भाऊ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि यह कृत्य जघन्य था और इससे बच्चे को गंभीर आघात पहुंचा। न्यायालय ने पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत न्यूनतम 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। दोषी को सजा काटने के लिए जिला जेल उधमपुर भेज दिया गया है।
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मोहम्मद अरशद उर्फ नीका निवासी बाईं (वर्तमान में मोटर शेड चिनैनी निवासी) को पोक्सो अधिनियम की धारा 5(एम) के तहत दोषी पाया गया। अदालत ने 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। साथ ही आदेश दिया कि यह राशि वसूल कर पीड़िता को उसके चिकित्सा और पुनर्वास खर्चों के लिए सौंप दी जाए।
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मामला 28 जुलाई 2020 का है। पीड़िता की मां ने रामनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि आरोपी ने उसकी नाबालिग बेटी के साथ उस समय छेड़छाड़ की जब वह खेतों में नाशपती तोड़ रही थी।
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मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने पीड़िता के परिवार के सदस्यों और चिकित्सा अधिकारियों सहित कई गवाह पेश किए। पीड़िता ने अदालत के समक्ष बताया कि आरोपी ने उसकी गोद से नाशपाती जबरन छीन ली और उसका यौन उत्पीड़न किया।
अभियोजन पक्ष ने एक बच्चे के खिलाफ किए गए कृत्य की क्रूर प्रकृति पर जोर देते हुए अधिकतम सजा की मांग की। हालांकि, बचाव पक्ष ने दोषी की उम्र, पारिवारिक जिम्मेदारियों और स्वच्छ पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए नरमी बरतने की दलील दी।
अपने फैसले में प्रधान सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह भाऊ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि यह कृत्य जघन्य था और इससे बच्चे को गंभीर आघात पहुंचा। न्यायालय ने पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत न्यूनतम 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। दोषी को सजा काटने के लिए जिला जेल उधमपुर भेज दिया गया है।