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Udhampur News: पेड़ाें से तारें बांधकर रोशन हो रहे लोगों के घर
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ब्लॉक घोरड़ी में पड़ते कई गांवों में कुछ इस तरह से पेड़ों से बांध कर लोगों के घरों में हो रही ह
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उधमपुर। ब्लाॅक घोरड़ी के 10 गांवों में आज भी पेड़ाें से तारें बांधकर बिजली आपूर्ति हो रही है। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बिजली विभाग की ओर से जिले में नए ट्रांसफार्मर, खंभे बदलने, कई छोटे ग्रिड स्टेशनों की क्षमता बढ़ाने और पुरानी तारों को बदलने के लिए 193 करोड़ की परियोजना लाई गई थी लेकिन टेंडर प्रक्रिया में आई बाधा के चलते अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। इसके चलते आज भी जिले के घोरड़ी ब्लाॅक की कई ऐसी पंचायतें हैंं, जहां बिजली के खंभे तक नहीं पहुंच पाए हैं। मौजूदा समय में पेड़ों से बिजली की तारों को बांधकर विभाग ग्रामीणों के घरों को रोशन कर रह है। खासकर पंचायत सत्यालता में पड़ते कई गांव के लोग पिछले 40 सालों से इस समस्या से जूझ रहे हैं। हालांकि क्षेत्र के लोग कई बार इस समस्या का समाधान करवाने के लिए सरकार व प्रशासन से गुहार लगा चुके हैं लेकिन विभाग की अनदेखी का खामियाजा उन्हें अपने मवेशियों की जान गंवा कर चुकाना पड़ रहा है। कई बार थोड़ी सी हवा चलने पर बिजली गुल हो जाती है और पूरा दिन लोगों को बिना बिजली के रहना पड़ता है। वहीं पड़ों से बांधी गई तारों की वजह से बिजली भी सिंगल फेज मिलने के कारण लोगों को बिजली आपूर्ति का सही लाभ नहीं मिल पा रहा है।
इन क्षेत्रों में पेड़ों से बांधी गई हैं बिजली की तारें
ब्लॉक घोरड़ी में पड़ते धारनु, मलाल, ओसा, बडानकिला, कनपत्ती, टसर, बनी और छपरा सहित अन्य क्षेत्रों में बिजली विभाग की ओर से पेड़ों से बिजली की तारों को बांधकर लोगों के घरों में बिजली चलाई जा रही है। गौरतलब है कि इन क्षेत्रोंं में से कई क्षेत्रों में बर्फ भी पड़ती है। इसके चलते पेड़ों से तारें गिरने के बाद कई कई घंटों तक बिजली बहाल नहीं होती है। लोग कई बार विभाग के लाइनमैन को बुलाते हैं लेकिन मरम्मत करने के लिए कोई नहीं आता है।
इस संदर्भ में पूर्व सरपंंच यशपाल ने बताया कि पिछले 40 साल से इसी तरह से पंचायत के कई क्षेत्रों में बिजली की तारों को पेड़ों से बांधकर काम चलाया जा रहा है। इसके चलते कई मवेशी पेड़ों से बांधी गई तारें जमीन पर गिरने से अपनी जान गंवा बैठे हैं ओर कई करंट का शिकार हो चुके हैं।
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बिशन दास का कहना था कि ग्रामीण क्षेत्र होने के चलते ज्यादातर यहां के लोगों ने मवेशी पाल रखे हैं जोकि चरने के लिए खुले छोड़े जाते हैं और वे पेड़ों से बांधी गई तारें जमीन पर गिरने के चलते उसका शिकार हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि एक साल पहले बिजली विभाग की ओर से जिले में आ रही बिजली की समस्या को दूर करने के लिए एक परियोजना तैयार की गई थी।
परशोतम शर्मा ने बताया कि परियोजना पर आज तक काम शुरू नहीं हो पाया है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में तारों को बांधने के लिए 150 से 200 बिजली के खंभे की जरूरत है ताकि लंबे समय से आ रही समस्या से लोगों को निजात मिल सके।
जिले में बिजली ढांचे में सुधार को लेकर 193 करोड़ की आई परियोजना के टेंडर प्रक्रिया मेें बाधा आने के चलते अभी तक कार्य शुरू नहीं हो पाया है। हालांकि विभाग की ओर से टेंडर प्रक्रिया चल रही है। उम्मीद है कि आने वाले वित्त वर्ष में इस परियोजना का कार्य शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि इस परियोजना पर एनटीपीसी की ओर से काम कराया जाना है।
-सुनील दत्त पंडोह एक्सईएन बिजली विभाग
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बिजली विभाग की ओर से जिले में नए ट्रांसफार्मर, खंभे बदलने, कई छोटे ग्रिड स्टेशनों की क्षमता बढ़ाने और पुरानी तारों को बदलने के लिए 193 करोड़ की परियोजना लाई गई थी लेकिन टेंडर प्रक्रिया में आई बाधा के चलते अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। इसके चलते आज भी जिले के घोरड़ी ब्लाॅक की कई ऐसी पंचायतें हैंं, जहां बिजली के खंभे तक नहीं पहुंच पाए हैं। मौजूदा समय में पेड़ों से बिजली की तारों को बांधकर विभाग ग्रामीणों के घरों को रोशन कर रह है। खासकर पंचायत सत्यालता में पड़ते कई गांव के लोग पिछले 40 सालों से इस समस्या से जूझ रहे हैं। हालांकि क्षेत्र के लोग कई बार इस समस्या का समाधान करवाने के लिए सरकार व प्रशासन से गुहार लगा चुके हैं लेकिन विभाग की अनदेखी का खामियाजा उन्हें अपने मवेशियों की जान गंवा कर चुकाना पड़ रहा है। कई बार थोड़ी सी हवा चलने पर बिजली गुल हो जाती है और पूरा दिन लोगों को बिना बिजली के रहना पड़ता है। वहीं पड़ों से बांधी गई तारों की वजह से बिजली भी सिंगल फेज मिलने के कारण लोगों को बिजली आपूर्ति का सही लाभ नहीं मिल पा रहा है।
इन क्षेत्रों में पेड़ों से बांधी गई हैं बिजली की तारें
ब्लॉक घोरड़ी में पड़ते धारनु, मलाल, ओसा, बडानकिला, कनपत्ती, टसर, बनी और छपरा सहित अन्य क्षेत्रों में बिजली विभाग की ओर से पेड़ों से बिजली की तारों को बांधकर लोगों के घरों में बिजली चलाई जा रही है। गौरतलब है कि इन क्षेत्रोंं में से कई क्षेत्रों में बर्फ भी पड़ती है। इसके चलते पेड़ों से तारें गिरने के बाद कई कई घंटों तक बिजली बहाल नहीं होती है। लोग कई बार विभाग के लाइनमैन को बुलाते हैं लेकिन मरम्मत करने के लिए कोई नहीं आता है।
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इस संदर्भ में पूर्व सरपंंच यशपाल ने बताया कि पिछले 40 साल से इसी तरह से पंचायत के कई क्षेत्रों में बिजली की तारों को पेड़ों से बांधकर काम चलाया जा रहा है। इसके चलते कई मवेशी पेड़ों से बांधी गई तारें जमीन पर गिरने से अपनी जान गंवा बैठे हैं ओर कई करंट का शिकार हो चुके हैं।
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बिशन दास का कहना था कि ग्रामीण क्षेत्र होने के चलते ज्यादातर यहां के लोगों ने मवेशी पाल रखे हैं जोकि चरने के लिए खुले छोड़े जाते हैं और वे पेड़ों से बांधी गई तारें जमीन पर गिरने के चलते उसका शिकार हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि एक साल पहले बिजली विभाग की ओर से जिले में आ रही बिजली की समस्या को दूर करने के लिए एक परियोजना तैयार की गई थी।
परशोतम शर्मा ने बताया कि परियोजना पर आज तक काम शुरू नहीं हो पाया है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में तारों को बांधने के लिए 150 से 200 बिजली के खंभे की जरूरत है ताकि लंबे समय से आ रही समस्या से लोगों को निजात मिल सके।
जिले में बिजली ढांचे में सुधार को लेकर 193 करोड़ की आई परियोजना के टेंडर प्रक्रिया मेें बाधा आने के चलते अभी तक कार्य शुरू नहीं हो पाया है। हालांकि विभाग की ओर से टेंडर प्रक्रिया चल रही है। उम्मीद है कि आने वाले वित्त वर्ष में इस परियोजना का कार्य शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि इस परियोजना पर एनटीपीसी की ओर से काम कराया जाना है।
-सुनील दत्त पंडोह एक्सईएन बिजली विभाग