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Udhampur News: हमें मनुष्य जीवन का सदुपयोग करना चाहिए
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उधमपुर। ओमाला परम धाम आश्रम में चल रही श्री मद्भगवत कथा में भाग लेते श्रद्धालु।: संवाद
उधमपुर। अखंड परम धाम आश्रम ओमाला जखैनी उधमपुर में बुधवार से पांच दिवसीय संत समागम हरि कथा प्रारंभ हुई।
श्री राम जन्म भूमि के सदस्य आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी परमानंद गिरि महाराज ने इस ज्ञान यज्ञ का श्री गणेश किया। संत सुभाष शास्त्री महाराज ने और अन्य सभी भक्तों ने उनका भव्य स्वागत किया।
इस अवसर पर संत सुभाष शास्त्री ने अपने प्रवचनों में संगत को समझाया कि बड़े भाग्य की बात है कि आपको मनुष्य का तन मिला, क्योंकि मनुष्य ही अपने दिए अपने ध्येय, अपने लक्ष्य के बारे में सोचने की क्षमता रखता है। मनुष्य ही लोक-परलोक, धर्म-अधर्म, पाप-पुण्य, हानि-लाभ हित-अहित का विचार व विवेक कर सकता है। मनुष्य पर भगवान ने विशेष कृपा कर उसे बुद्धि दी है। 84 लाख योनियों में मनुष्य जैसी बुद्धि, वाणी किसी के पास नहीं, तो हमें इनका सदुपयोग करना चाहिए।
शास्त्री महाराज ने आगे समझाया कि पहली बात कि मानव का तन मिल जाए और दूसरी बात, हमारे मन में लक्ष्य प्राप्ति की इच्छा जाग जाए। हमारा लक्ष्य है ईश्वर की प्राप्ति, ज्ञान की प्राप्ति अर्थात भव-बंधन से छूटने की इच्छा जाग जाए। यदि यह इच्छा नहीं जगी तो मानव जीवन व्यर्थ ही चला जाता है।
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श्री राम जन्म भूमि के सदस्य आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी परमानंद गिरि महाराज ने इस ज्ञान यज्ञ का श्री गणेश किया। संत सुभाष शास्त्री महाराज ने और अन्य सभी भक्तों ने उनका भव्य स्वागत किया।
इस अवसर पर संत सुभाष शास्त्री ने अपने प्रवचनों में संगत को समझाया कि बड़े भाग्य की बात है कि आपको मनुष्य का तन मिला, क्योंकि मनुष्य ही अपने दिए अपने ध्येय, अपने लक्ष्य के बारे में सोचने की क्षमता रखता है। मनुष्य ही लोक-परलोक, धर्म-अधर्म, पाप-पुण्य, हानि-लाभ हित-अहित का विचार व विवेक कर सकता है। मनुष्य पर भगवान ने विशेष कृपा कर उसे बुद्धि दी है। 84 लाख योनियों में मनुष्य जैसी बुद्धि, वाणी किसी के पास नहीं, तो हमें इनका सदुपयोग करना चाहिए।
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शास्त्री महाराज ने आगे समझाया कि पहली बात कि मानव का तन मिल जाए और दूसरी बात, हमारे मन में लक्ष्य प्राप्ति की इच्छा जाग जाए। हमारा लक्ष्य है ईश्वर की प्राप्ति, ज्ञान की प्राप्ति अर्थात भव-बंधन से छूटने की इच्छा जाग जाए। यदि यह इच्छा नहीं जगी तो मानव जीवन व्यर्थ ही चला जाता है।
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