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जमीनों के किराए को लेकर चल रहे मामले के समाधान को लेकर हुई बैठक
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उधमपुर। सेना की ओर से उधमपुर में किराये पर ली गई जमीनों के किराये को लेकर ग्रामीणों के साथ चल रहे मामले के समाधान के लिए शुक्रवार को प्रशासनिक और सैन्य अधिकारियों की एक बैठक डीसी कार्यालय में हुई। इसमें ग्रामीण प्रतिनिधियों के साथ पूर्व विधायक पवन कुमार गुप्ता और इक्कजुट जम्मू पार्टी के नेता संजय शर्मा ने भी मुख्य रूप से भाग लिया। बैठक में उधमपुर के विभिन्न इलाकों में सेना द्वारा अधिग्रहित की गई एवं किराये पर ली गई जमीनों के मुआवजे, बढे़ किराये और साल 2016 से लंबित किराये के मुद्दे को लेकर राजस्व विभाग और सैन्य अधिकारियों के साथ चर्चा हुई और मामले के जल्द निपटान के लिए जरूरी कार्रवाई को तेज करने पर जोर दिया गया।
पूर्व विधायक पवन गुप्ता ने बताया कि बैठक सकारात्मक रही है। इसमें सैन्य अधिकारियों ने भी ग्रामीणों के मुआवजे व किराये से संबंधित सभी मसलों को जल्द समाधान करने में गंभीर रुचि दिखाई है। बैठक में उधमपुर के कावा, जिब, रैंहम्बल, थिल्ल रौन, सौंथिया, ओमाडा और मानपा आदि क्षेत्रों के विभिन्न मामलों पर चर्चा हुई है। कुछ मुद्दों के लिए समय निर्धारित किया गया है और कुछ के समाधान में राजस्व विभाग और डीओ कार्यालय की तरफ से रही कमियों को दूर करने पर चर्चा की गई है। पवन गुप्ता ने कहा कि इस बैठक में मामले के समाधान को लेकर जिस तरह की गंभीरता और तीव्रता दिखाई गई है, उससे लगता है कि लंबे समय से चले आ रहे ग्रामीणों के इस मसले का जल्द समाधान होगा और भूमि मालिकों को उनकी जमीनों का लंबित किराया, बढ़ा किराया और साल 2016 से बंद हुआ किराया भी मिलेगा। पूर्व विधायक ने कहा कि उक्त बैठक के परिणामों को जानने के लिए एक महीने के भीतर दोबारा से बैठक होगी।
वहीं इक्कजुट जम्मू पार्टी के नेता संजय शर्मा ने कहा कि पिछली बैठकों की तरह इस बैठक में भी कुछ खास नजर नहीं आया है। ग्रामीण साल 2013-14 से जमीनों के किराये और मुआवजे को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। औपचारिक बैठकों से जब कुछ परिणाम नहीं निकला तो कुछ ग्रामीण कोर्ट में पहुंचे थे, जहां 21 अगस्त 2021 को कोर्ट ने 90 दिन के भीतर ग्रामीणों के मुद्दों का समाधान निकालने का आदेश दिया था लेकिन लगभग सवा साल का समय गुजर जाने के बाद भी धरातल पर कुछ नजर नहीं आया है। औपचारिकता निभाने के लिए बैठकों का सिलसिला अब भी जारी है और आज की बैठक भी दिखावा मात्र ही नजर आया है, इसलिए उनकी मांग है कि इस तरह की रस्म अदायगी की बैठकें करने से अच्छा है कि जिला प्रशासन को शेयरधारकों के साथ बैठक की सीधी बात करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आज हुई बैठक को चार बार स्थगित किया गया था। आज भी डिफेंस स्टेट ऑफिसर (डीओ) ने मीटिंग को स्थगित करने का प्रयास किया और बार-बार बुलाने के बाद बैठक में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि चिंताजनक है कि सैकड़ों कनाल जमीनों के मालिक आज इंसाफ के लिए दर-दर की ठोकरे खा रहे हैं, जिसका संज्ञान रक्षा मंत्रालय को लेना चाहिए।
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पूर्व विधायक पवन गुप्ता ने बताया कि बैठक सकारात्मक रही है। इसमें सैन्य अधिकारियों ने भी ग्रामीणों के मुआवजे व किराये से संबंधित सभी मसलों को जल्द समाधान करने में गंभीर रुचि दिखाई है। बैठक में उधमपुर के कावा, जिब, रैंहम्बल, थिल्ल रौन, सौंथिया, ओमाडा और मानपा आदि क्षेत्रों के विभिन्न मामलों पर चर्चा हुई है। कुछ मुद्दों के लिए समय निर्धारित किया गया है और कुछ के समाधान में राजस्व विभाग और डीओ कार्यालय की तरफ से रही कमियों को दूर करने पर चर्चा की गई है। पवन गुप्ता ने कहा कि इस बैठक में मामले के समाधान को लेकर जिस तरह की गंभीरता और तीव्रता दिखाई गई है, उससे लगता है कि लंबे समय से चले आ रहे ग्रामीणों के इस मसले का जल्द समाधान होगा और भूमि मालिकों को उनकी जमीनों का लंबित किराया, बढ़ा किराया और साल 2016 से बंद हुआ किराया भी मिलेगा। पूर्व विधायक ने कहा कि उक्त बैठक के परिणामों को जानने के लिए एक महीने के भीतर दोबारा से बैठक होगी।
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वहीं इक्कजुट जम्मू पार्टी के नेता संजय शर्मा ने कहा कि पिछली बैठकों की तरह इस बैठक में भी कुछ खास नजर नहीं आया है। ग्रामीण साल 2013-14 से जमीनों के किराये और मुआवजे को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। औपचारिक बैठकों से जब कुछ परिणाम नहीं निकला तो कुछ ग्रामीण कोर्ट में पहुंचे थे, जहां 21 अगस्त 2021 को कोर्ट ने 90 दिन के भीतर ग्रामीणों के मुद्दों का समाधान निकालने का आदेश दिया था लेकिन लगभग सवा साल का समय गुजर जाने के बाद भी धरातल पर कुछ नजर नहीं आया है। औपचारिकता निभाने के लिए बैठकों का सिलसिला अब भी जारी है और आज की बैठक भी दिखावा मात्र ही नजर आया है, इसलिए उनकी मांग है कि इस तरह की रस्म अदायगी की बैठकें करने से अच्छा है कि जिला प्रशासन को शेयरधारकों के साथ बैठक की सीधी बात करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आज हुई बैठक को चार बार स्थगित किया गया था। आज भी डिफेंस स्टेट ऑफिसर (डीओ) ने मीटिंग को स्थगित करने का प्रयास किया और बार-बार बुलाने के बाद बैठक में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि चिंताजनक है कि सैकड़ों कनाल जमीनों के मालिक आज इंसाफ के लिए दर-दर की ठोकरे खा रहे हैं, जिसका संज्ञान रक्षा मंत्रालय को लेना चाहिए।
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