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सड़क से तारकोल उखड़ने पर फूटा गुस्सा
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रामनगर। रामनगर के वार्ड नंबर आठ में तारकोल डालने दूसरे ही दिन तारकोल उखड़ने के विरोध में स्थानीय निवासियों ने रोष रैली निकाल कर पीडब्ल्यूडी के खिलाफ प्रदर्शन किया। स्थानीय निवासियों ने कहा कि विभाग ने इतनी घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया है कि दूसरे ही दिन तारकोल निकलने लगी है।
वार्ड आठ के पार्षद काका राही के नेतृत्व में स्थानीय निवासियों ने रोष रैली निकाल कर पीडब्ल्यूडी के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान पार्षद ने बताया कि पीडब्ल्यूडी की कार्यप्रणाली उनकी समझ से परे है। कई वर्षों तक मांग करने के बाद उनके वार्ड में मार्ग पर तारकोल डालने का काम शुरू किया गया। ठेकेदार ने शनिवार को तारकोल डालने का काम पूरा किया और रविवार को दूसरे ही दिन सड़क से तारकोल निकलने लगी है।
ठेकेदार ने काम किस तरह से किया है। उनकी समझ से परे है। साफ दिख रहा है कि ठेकेदार ने तारकोल में बहुत ही घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया है। इसको लेकर जब ठेकेदार के साथ बात की तो वह बहुत ही बदसलूकी के साथ बात करने लगा। उनकी मांग है कि जिला प्रशासन इसको गंभीरता से लेकर जांच करवाए और जो भी इसमें दोषी है, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। रामनगर के अन्य कई हिस्सों में इसी तरह के मामले सामने आ चुके हैं। प्रशासन को अब इस तरह की लापरवाही को किसी तरह से भी सहन नहीं करना चाहिए। इसके लिए ठेकेदार के साथ पीडब्ल्यूडी के अधिकारी भी पूरी तरह से जिम्मेदार हैं।
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वार्ड आठ के पार्षद काका राही के नेतृत्व में स्थानीय निवासियों ने रोष रैली निकाल कर पीडब्ल्यूडी के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान पार्षद ने बताया कि पीडब्ल्यूडी की कार्यप्रणाली उनकी समझ से परे है। कई वर्षों तक मांग करने के बाद उनके वार्ड में मार्ग पर तारकोल डालने का काम शुरू किया गया। ठेकेदार ने शनिवार को तारकोल डालने का काम पूरा किया और रविवार को दूसरे ही दिन सड़क से तारकोल निकलने लगी है।
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ठेकेदार ने काम किस तरह से किया है। उनकी समझ से परे है। साफ दिख रहा है कि ठेकेदार ने तारकोल में बहुत ही घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया है। इसको लेकर जब ठेकेदार के साथ बात की तो वह बहुत ही बदसलूकी के साथ बात करने लगा। उनकी मांग है कि जिला प्रशासन इसको गंभीरता से लेकर जांच करवाए और जो भी इसमें दोषी है, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। रामनगर के अन्य कई हिस्सों में इसी तरह के मामले सामने आ चुके हैं। प्रशासन को अब इस तरह की लापरवाही को किसी तरह से भी सहन नहीं करना चाहिए। इसके लिए ठेकेदार के साथ पीडब्ल्यूडी के अधिकारी भी पूरी तरह से जिम्मेदार हैं।
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