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लद्दाख के मुद्दों पर फिर अटका पेंच: केंद्र के साथ प्रस्तावित बैठक नहीं हुई, वार्ता की अगली तारीख का इंतजार

Fri, 23 Oct 2026 10:56 AM IST
Nikita Gupta अमर उजाला, नेटवर्क लेह
अमर उजाला, नेटवर्क लेह Published by: Nikita Gupta Updated Fri, 23 Oct 2026 10:56 AM IST
सार

लद्दाख की संवैधानिक सुरक्षा लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था और राजनीतिक अधिकारों को लेकर केंद्र के साथ 22 अक्तूबर को प्रस्तावित बैठक नहीं हो सकी।

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The proposed meeting with the Ministry of Home Affairs on October 22 did not take place.
लेह एपेक्स बॉडी के सह-अध्यक्ष, चेरिंग दोरजे लकरूक - फोटो : PTI

विस्तार

नई दिल्ली में 22 अक्तूबर को लेह एपेक्स बॉडी, कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस और केंद्रीय गृह मंत्रालय के बीच प्रस्तावित बैठक नहीं हो सकी। इससे लद्दाख के संवैधानिक सुरक्षा उपायों और लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था को लेकर जारी बातचीत की प्रगति पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।

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नई दिल्ली में अधिवक्ता विक्रम हेगड़े के साथ आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए लेह एपेक्स बॉडी के सदस्य सोनम वांगचुक ने बैठक में देरी पर निराशा जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पूर्व में हुई वार्ताओं के दौरान बनी सहमतियों से पीछे हट गई है।

वांगचुक ने कहा कि पिछली चर्चाओं में लद्दाख के लिए विधानसभा जैसी लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था के प्रस्ताव पर विचार किया गया था, जिसमें निर्वाचित नेतृत्व को निर्णय लेने के अधिकार दिए जाने थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि अनुच्छेद 371 के प्रावधानों की तर्ज पर संवैधानिक सुरक्षा उपायों पर चर्चा हुई थी।

हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की ओर से बाद में प्रस्तुत प्रस्ताव इन समझों से काफी अलग थे। विशेष रूप से निर्वाचित प्रतिनिधियों की शक्तियों और प्रस्तावित शासन व्यवस्था को लेकर अंतर सामने आया। उन्होंने लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषदों की संरचना और कार्यप्रणाली में हाल ही में किए गए बदलावों की भी आलोचना की।

वांगचुक ने बताया कि लद्दाख के प्रतिनिधियों ने 15 अक्तूबर को गृह मंत्रालय को अपना मसौदा प्रस्ताव सौंपा था। यह प्रस्ताव 22 मई और 9 सितंबर को हुई वार्ताओं के दौरान की गई प्रतिबद्धताओं की उनकी समझ के आधार पर तैयार किया गया था। मंत्रालय का मसौदा प्राप्त होने के बाद प्रतिनिधियों ने दोनों प्रस्तावों के बीच अंतर को रेखांकित करते हुए बिंदुवार तुलनात्मक विवरण भी तैयार किया।

22 अक्तूबर को प्रस्तावित बैठक में इन मतभेदों पर चर्चा होने की उम्मीद थी, लेकिन वांगचुक के अनुसार, बैठक नहीं होने का कोई स्पष्ट कारण उन्हें नहीं बताया गया। उन्होंने केंद्र सरकार से अपनी स्थिति स्पष्ट करने और वार्ता प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अपील की।

इस बीच, कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के सह-अध्यक्ष सज्जाद कारगिली ने कहा कि गठबंधन को उम्मीद है कि गृह मंत्रालय अक्तूबर के अंत तक अगली बैठक के लिए अधिसूचना जारी करेगा। बैठक स्थगित होने के बाद लद्दाख की संवैधानिक सुरक्षा, व्यापक लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और राजनीतिक अधिकारों से जुड़ी मांगों पर अगले दौर की बातचीत को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।

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