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कश्मीर में बहार : डल झील के किनारे बिखरी ट्यूलिप की जादुई छटा
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श्रीनगर में ट्यूलिप गार्डन के उद्घाटन के बाद सेल्फी लेते मुख्यमंत्री उमर। संवाद
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75 किस्मों के 18 लाख से अधिक ट्यूलिप के साथ खुला एशिया का सबसे बड़ा गार्डन
मुख्यमंत्री ने किया उद्घाटन, कहा- पर्यटन से जुड़े लोगों के लिए यह एक नई शुरुआत
सुरक्षा का दिया भरोसा, जहां भी जाएंगे पर्यटक एजेंसियां अपनी मौजूदगी बनाए रखेंगी
इस बार समय से 10 दिन पहले खोल दिया गया ट्यूलिप गार्डन
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर: कश्मीर घाटी में वसंत की मखमली दस्तक के साथ विश्व प्रसिद्ध इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्यूलिप गार्डन सोमवार को पर्यटकों के लिए खोल दिया गया। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इसका उद्घाटन किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों के लिए यह एक नई शुरुआत होगी। गार्डन खुलने के साथ ही यहां ट्यूलिप महोत्सव भी शुरू हो गया।
ट्यूलिप गार्डन श्रीनगर में डल झील के किनारे जबरवन पहाड़ियों की गोद में बना है। आमतौर पर मार्च के आखिरी हफ्ते में खुलने वाला ये गार्डन इस बार 10 दिन पहले ही खोल दिया गया क्योंकि घाटी में तापमान बढ़ने से फूल समय से पहले खिल गए हैं। बगीचे में इस बार 75 किस्मों के 18 लाख से ज्यादा ट्यूलिप बल्ब लगाए गए हैं। उद्घाटन के पहले ही दिन हजारों सैलानियों और स्थानीय लोगों का जोश देखते ही बना।
इस बार का सीजन न केवल प्रकृति प्रेमियों के लिए खास है बल्कि सुरक्षा और सुविधाओं के लिहाज से भी एक नया भरोसा लेकर आया है। पर्यटन स्थलों की सुरक्षा पर उमर ने स्पष्ट किया कि पर्यटकों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। सुरक्षा एजेंसियां हर पर्यटन स्थल पर अपनी सक्रिय मौजूदगी सुनिश्चित करेंगी। ये सुनिश्चित किया जाएगा कि घाटी में आने वाला हर सैलानी खुद को सुरक्षित महसूस करे और बेफिक्र होकर कुदरत के नजारों का आनंद ले सके।
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उमर ने बताया कि विभिन्न हितधारक फूलों की खेती को व्यावसायिक उद्यम बनाने पर काम कर रहे हैं। इससे यहां उगाए गए फूलों को देश के अन्य हिस्सों में निर्यात किया जा सकेगा। ज्यादातर चीजें अपनी जगह पर हैं। अभी मुख्य मुद्दा एक भरोसेमंद कोल्ड चेन का है। एक बार जब हमें ये मिल जाएगी, चाहे रेल के जरिए हो या हवाई मार्ग से तो यह क्षेत्र खूब फलेगा-फूलेगा।
सीएम ने उम्मीद जताई कि पर्यटन क्षेत्र पिछले साल की मुश्किलों से उबरकर फिर से पटरी पर लौट आएगा। उन्होंने कहा कि हालात बदलते रहते हैं। हमें उम्मीद है कि स्थिति बेहतर होगी जिससे बाहर से लोग जम्मू-कश्मीर की खूबसूरती का लुत्फ उठाने आ सकेंगे। गार्डन के उद्घाटन के मौके पर कैबिनेट मंत्री और विधायक भी मौजूद थे।
...ताकि लंबे समय तक नजारे देख सकें पर्यटक
मुख्यमंत्री ने वैज्ञानिक तकनीकों और स्टैगर्ड प्लांटिंग (अलग-अलग समय पर पौधे लगाना) के जरिए ट्यूलिप के खिलने की अवधि बढ़ाने पर जोर दिया है। ऐसा करने से पर्यटक लंबे समय तक इस नजारे का आनंद ले सकें। उमर ने कहा कि सरकार अब भव्य आयोजनों के बजाय नए टेरेस और बेहतर डिजाइन जैसे टिकाऊ बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इसमें नए टेरेस, फूलों की क्यारियों का नया डिजाइन और एक यादगार चीजों की दुकान शामिल हैं।
आत्मनिर्भरता के लिए पायलट प्रोजेक्ट की उम्मीद, विभाग को साैंपा काम
मुख्यमंत्री ने जम्मू-कश्मीर को ट्यूलिप बल्ब उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि हमारा मुख्य लक्ष्य नीदरलैंड (डच) से होने वाले महंगे आयात को कम कर विदेशी मुद्रा की बचत करना और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। बागवानी विभाग को ट्यूलिप बल्बों को स्थानीय स्तर पर उगाने के तरीकों की तलाश करने का काम सौंपा गया है। सूत्रों के मुताबिक आने वाले महीनों में स्थानीय बल्बों को उगाने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू होने की उम्मीद है। इसके लिए कृषि विश्वविद्यालयों और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) का सहयोग भी शामिल होगा। इस पहल से न केवल आयात पर निर्भरता खत्म होगी बल्कि घाटी के किसानों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
नया रिकॉर्ड बनाने की तैयारी
पिछला सीजन ट्यूलिप गार्डन के लिए ऐतिहासिक रहा था तब 26 मार्च को खुलने के बाद मात्र 30 दिनों में रिकॉर्ड 8.55 लाख से अधिक पर्यटक पहुंचे थे। पिछले साल 17 लाख से अधिक ट्यूलिप खिले थे। इस बार प्रशासन को उम्मीद है कि 18 लाख फूलों की जादुई छटा और स्थानीय स्तर पर बल्ब उत्पादन के नए प्रयोगों के चलते ये आंकड़ा नई ऊंचाई छुएगा। बगीचे के आकर्षण को बढ़ाने के लिए इस बार कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जा रहा है। इसमें कलाकार कश्मीर की कला और संस्कृति को दुनिया के सामने पेश करेंगे। ट्यूलिप गार्डन को 2008 में कश्मीर के पर्यटन स्थलों की सूची में शामिल किया गया था।
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मुख्यमंत्री ने किया उद्घाटन, कहा- पर्यटन से जुड़े लोगों के लिए यह एक नई शुरुआत
सुरक्षा का दिया भरोसा, जहां भी जाएंगे पर्यटक एजेंसियां अपनी मौजूदगी बनाए रखेंगी
इस बार समय से 10 दिन पहले खोल दिया गया ट्यूलिप गार्डन
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर: कश्मीर घाटी में वसंत की मखमली दस्तक के साथ विश्व प्रसिद्ध इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्यूलिप गार्डन सोमवार को पर्यटकों के लिए खोल दिया गया। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इसका उद्घाटन किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों के लिए यह एक नई शुरुआत होगी। गार्डन खुलने के साथ ही यहां ट्यूलिप महोत्सव भी शुरू हो गया।
ट्यूलिप गार्डन श्रीनगर में डल झील के किनारे जबरवन पहाड़ियों की गोद में बना है। आमतौर पर मार्च के आखिरी हफ्ते में खुलने वाला ये गार्डन इस बार 10 दिन पहले ही खोल दिया गया क्योंकि घाटी में तापमान बढ़ने से फूल समय से पहले खिल गए हैं। बगीचे में इस बार 75 किस्मों के 18 लाख से ज्यादा ट्यूलिप बल्ब लगाए गए हैं। उद्घाटन के पहले ही दिन हजारों सैलानियों और स्थानीय लोगों का जोश देखते ही बना।
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इस बार का सीजन न केवल प्रकृति प्रेमियों के लिए खास है बल्कि सुरक्षा और सुविधाओं के लिहाज से भी एक नया भरोसा लेकर आया है। पर्यटन स्थलों की सुरक्षा पर उमर ने स्पष्ट किया कि पर्यटकों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। सुरक्षा एजेंसियां हर पर्यटन स्थल पर अपनी सक्रिय मौजूदगी सुनिश्चित करेंगी। ये सुनिश्चित किया जाएगा कि घाटी में आने वाला हर सैलानी खुद को सुरक्षित महसूस करे और बेफिक्र होकर कुदरत के नजारों का आनंद ले सके।
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उमर ने बताया कि विभिन्न हितधारक फूलों की खेती को व्यावसायिक उद्यम बनाने पर काम कर रहे हैं। इससे यहां उगाए गए फूलों को देश के अन्य हिस्सों में निर्यात किया जा सकेगा। ज्यादातर चीजें अपनी जगह पर हैं। अभी मुख्य मुद्दा एक भरोसेमंद कोल्ड चेन का है। एक बार जब हमें ये मिल जाएगी, चाहे रेल के जरिए हो या हवाई मार्ग से तो यह क्षेत्र खूब फलेगा-फूलेगा।
सीएम ने उम्मीद जताई कि पर्यटन क्षेत्र पिछले साल की मुश्किलों से उबरकर फिर से पटरी पर लौट आएगा। उन्होंने कहा कि हालात बदलते रहते हैं। हमें उम्मीद है कि स्थिति बेहतर होगी जिससे बाहर से लोग जम्मू-कश्मीर की खूबसूरती का लुत्फ उठाने आ सकेंगे। गार्डन के उद्घाटन के मौके पर कैबिनेट मंत्री और विधायक भी मौजूद थे।
...ताकि लंबे समय तक नजारे देख सकें पर्यटक
मुख्यमंत्री ने वैज्ञानिक तकनीकों और स्टैगर्ड प्लांटिंग (अलग-अलग समय पर पौधे लगाना) के जरिए ट्यूलिप के खिलने की अवधि बढ़ाने पर जोर दिया है। ऐसा करने से पर्यटक लंबे समय तक इस नजारे का आनंद ले सकें। उमर ने कहा कि सरकार अब भव्य आयोजनों के बजाय नए टेरेस और बेहतर डिजाइन जैसे टिकाऊ बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इसमें नए टेरेस, फूलों की क्यारियों का नया डिजाइन और एक यादगार चीजों की दुकान शामिल हैं।
आत्मनिर्भरता के लिए पायलट प्रोजेक्ट की उम्मीद, विभाग को साैंपा काम
मुख्यमंत्री ने जम्मू-कश्मीर को ट्यूलिप बल्ब उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि हमारा मुख्य लक्ष्य नीदरलैंड (डच) से होने वाले महंगे आयात को कम कर विदेशी मुद्रा की बचत करना और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। बागवानी विभाग को ट्यूलिप बल्बों को स्थानीय स्तर पर उगाने के तरीकों की तलाश करने का काम सौंपा गया है। सूत्रों के मुताबिक आने वाले महीनों में स्थानीय बल्बों को उगाने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू होने की उम्मीद है। इसके लिए कृषि विश्वविद्यालयों और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) का सहयोग भी शामिल होगा। इस पहल से न केवल आयात पर निर्भरता खत्म होगी बल्कि घाटी के किसानों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
नया रिकॉर्ड बनाने की तैयारी
पिछला सीजन ट्यूलिप गार्डन के लिए ऐतिहासिक रहा था तब 26 मार्च को खुलने के बाद मात्र 30 दिनों में रिकॉर्ड 8.55 लाख से अधिक पर्यटक पहुंचे थे। पिछले साल 17 लाख से अधिक ट्यूलिप खिले थे। इस बार प्रशासन को उम्मीद है कि 18 लाख फूलों की जादुई छटा और स्थानीय स्तर पर बल्ब उत्पादन के नए प्रयोगों के चलते ये आंकड़ा नई ऊंचाई छुएगा। बगीचे के आकर्षण को बढ़ाने के लिए इस बार कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जा रहा है। इसमें कलाकार कश्मीर की कला और संस्कृति को दुनिया के सामने पेश करेंगे। ट्यूलिप गार्डन को 2008 में कश्मीर के पर्यटन स्थलों की सूची में शामिल किया गया था।