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Srinagar News: बिटुमेन की बढ़ती कीमतों और हॉट मिक्स प्लांट मालिकों के बहिष्कार से कश्मीर में मैकाडमाइजेशन का काम ठप
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559 किलोमीटर सड़कों के लिए 223 करोड़ रुपये की योजना अधर में, एचएमपीओ ने की दरों में संशोधन और केवल प्लांट मालिकों को अनुबंध देने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। कश्मीर घाटी में इस सीजन में मैकाडमाइजेशन (ब्लैक टॉपिंग) के कामों को एक बड़ा झटका लगा है। बिटुमेन की बढ़ती कीमतों और हॉट मिक्स प्लांट मालिकों के जारी बहिष्कार के कारण पूरी घाटी में सड़क निर्माण परियोजनाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
सरकार ने इससे पहले वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कश्मीर भर में लगभग 559 किलोमीटर सड़कों के लिए करीब 223 करोड़ रुपये की मैकाडमाइजेशन योजना को मंजूरी दी थी। अधिकारियों और ठेकेदारों का कहना है कि बिटुमेन, डीजल और परिवहन की आसमान छूती कीमतों ने जमीन पर काम के क्रियान्वयन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
सड़क एवं भवन (आरएंडबी) विभाग के सूत्रों के अनुसार, हॉट मिक्स प्लांट ओनर्स एसोसिएशन (एचएमपीओ) के चल रहे बहिष्कार के कारण कई जिलों में ब्लैक टॉपिंग और रीसर्फेसिंग कार्यों के लिए जारी की गई अधिकांश निविदाओं के लिए या तो कोई बोली प्राप्त नहीं हुई या फिर बहुत कम भागीदारी देखी गई। आरएंडबी विभाग के एक कार्यकारी अभियंता ने बताया कि बिटुमेन की कीमतों में भारी उछाल और हॉट मिक्स प्लांट मालिकों के साथ जारी गतिरोध के कारण इस साल का मैकाडमाइजेशन कार्यक्रम बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
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दूसरी ओर मध्य कश्मीर के मुख्य अभियंता सुशील कुमार ने कहा कि सड़क कार्यों के लिए निविदा प्रक्रिया जारी है और विभाग स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है। एचएमपीओ के अध्यक्ष बशीर अहमद ने कहा कि एसोसिएशन के पास बहिष्कार जारी रखने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था क्योंकि सरकार उद्योग की वास्तविक और तार्किक मांगों को पूरा करने में विफल रही है। एसोसिएशन की यह भी मांग है कि मैकाडमाइजेशन के अनुबंध केवल उन्हीं पंजीकृत ठेकेदारों को दिए जाने चाहिए जिनके पास अपने चालू हॉट मिक्स प्लांट हैं।
बशीर के अनुसार, मैकाडमाइजेशन एक विशेष कार्य है जिसके लिए उचित बुनियादी ढांचे और तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। यदि बिना हॉट मिक्स प्लांट वाले ठेकेदार वास्तविक प्लांट मालिकों की तुलना में कम दरों की बोली लगाते हैं, तो इससे कार्यों की गुणवत्ता और स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। पंजीकृत हॉट मिक्स प्लांट मालिकों तक ही भागीदारी को सीमित करने से कश्मीर में सड़क परियोजनाओं में बेहतर गुणवत्ता नियंत्रण और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
मैकाडमाइजेशन कार्यों से जुड़े एक ठेकेदार मुताहिर अहमद ने कहा कि संशोधित दरों पर अनिश्चितता और बढ़ती इनपुट लागत ने ठेकेदारों के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। बिटुमेन, डीजल और माल ढुलाई की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के कारण ठेकेदार पुराने रेट पर परियोजनाओं को संभालने में पूरी तरह असमर्थ हैं। मिली जानकारी के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव से जुड़ी आपूर्ति बाधाओं के कारण हाल के महीनों में पूरे देश में बिटुमेन की कीमतों में काफी वृद्धि हुई है जिससे कई राज्यों में सड़क निर्माण परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। कश्मीर घाटी में इस सीजन में मैकाडमाइजेशन (ब्लैक टॉपिंग) के कामों को एक बड़ा झटका लगा है। बिटुमेन की बढ़ती कीमतों और हॉट मिक्स प्लांट मालिकों के जारी बहिष्कार के कारण पूरी घाटी में सड़क निर्माण परियोजनाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
सरकार ने इससे पहले वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कश्मीर भर में लगभग 559 किलोमीटर सड़कों के लिए करीब 223 करोड़ रुपये की मैकाडमाइजेशन योजना को मंजूरी दी थी। अधिकारियों और ठेकेदारों का कहना है कि बिटुमेन, डीजल और परिवहन की आसमान छूती कीमतों ने जमीन पर काम के क्रियान्वयन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
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सड़क एवं भवन (आरएंडबी) विभाग के सूत्रों के अनुसार, हॉट मिक्स प्लांट ओनर्स एसोसिएशन (एचएमपीओ) के चल रहे बहिष्कार के कारण कई जिलों में ब्लैक टॉपिंग और रीसर्फेसिंग कार्यों के लिए जारी की गई अधिकांश निविदाओं के लिए या तो कोई बोली प्राप्त नहीं हुई या फिर बहुत कम भागीदारी देखी गई। आरएंडबी विभाग के एक कार्यकारी अभियंता ने बताया कि बिटुमेन की कीमतों में भारी उछाल और हॉट मिक्स प्लांट मालिकों के साथ जारी गतिरोध के कारण इस साल का मैकाडमाइजेशन कार्यक्रम बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
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दूसरी ओर मध्य कश्मीर के मुख्य अभियंता सुशील कुमार ने कहा कि सड़क कार्यों के लिए निविदा प्रक्रिया जारी है और विभाग स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है। एचएमपीओ के अध्यक्ष बशीर अहमद ने कहा कि एसोसिएशन के पास बहिष्कार जारी रखने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था क्योंकि सरकार उद्योग की वास्तविक और तार्किक मांगों को पूरा करने में विफल रही है। एसोसिएशन की यह भी मांग है कि मैकाडमाइजेशन के अनुबंध केवल उन्हीं पंजीकृत ठेकेदारों को दिए जाने चाहिए जिनके पास अपने चालू हॉट मिक्स प्लांट हैं।
बशीर के अनुसार, मैकाडमाइजेशन एक विशेष कार्य है जिसके लिए उचित बुनियादी ढांचे और तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। यदि बिना हॉट मिक्स प्लांट वाले ठेकेदार वास्तविक प्लांट मालिकों की तुलना में कम दरों की बोली लगाते हैं, तो इससे कार्यों की गुणवत्ता और स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। पंजीकृत हॉट मिक्स प्लांट मालिकों तक ही भागीदारी को सीमित करने से कश्मीर में सड़क परियोजनाओं में बेहतर गुणवत्ता नियंत्रण और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
मैकाडमाइजेशन कार्यों से जुड़े एक ठेकेदार मुताहिर अहमद ने कहा कि संशोधित दरों पर अनिश्चितता और बढ़ती इनपुट लागत ने ठेकेदारों के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। बिटुमेन, डीजल और माल ढुलाई की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के कारण ठेकेदार पुराने रेट पर परियोजनाओं को संभालने में पूरी तरह असमर्थ हैं। मिली जानकारी के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव से जुड़ी आपूर्ति बाधाओं के कारण हाल के महीनों में पूरे देश में बिटुमेन की कीमतों में काफी वृद्धि हुई है जिससे कई राज्यों में सड़क निर्माण परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं।