लेह-लद्दाख: सूखती त्सो कार झील को मिलेगा नया जीवन, रोज पहुंचेगा 32 करोड़ लीटर ग्लेशियर का पानी
लद्दाख की तेजी से सिकुड़ रही त्सो कार झील को पुनर्जीवित करने के लिए ग्लेशियर से रोज करीब 32 करोड़ लीटर पानी प्राकृतिक जलधाराओं और मिट्टी की नहरों के जरिए पहुंचाया जाएगा।
विस्तार
लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने तेजी से सिकुड़ रही त्सो कार झील को पुनर्जीवित करने के लिए महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू की है। इसके तहत चांगथांग क्षेत्र में स्थित रुपशो खर्नाक जलधारा के अप्रयुक्त ग्लेशियर जल को झील तक पहुंचाया जाएगा।
परियोजना के तहत प्रतिदिन औसतन 132 क्यूसेक यानी करीब 32 करोड़ लीटर ग्लेशियर का पानी त्सो कार झील में पहुंचाने का लक्ष्य है। पिछले एक दशक में झील का क्षेत्रफल करीब 70 प्रतिशत घटकर लगभग 11,000 एकड़ से 3,200 एकड़ रह गया है। करीब 18,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित रुपशो खर्नाक जलधारा का पानी वर्तमान में बिना उपयोग के सिंधु नदी में चला जाता है।
अब इसे प्राकृतिक गड्ढों और गुरुत्वाकर्षण आधारित साधारण मिट्टी की नहरों के माध्यम से झील तक पहुंचाया जाएगा। परियोजना में नए कंक्रीट चैनल के निर्माण से बचा गया है। जलधारा के मार्ग में स्थित 270, 24 और 10 एकड़ क्षेत्रफल वाले तीन प्राकृतिक गड्ढों को मीठे पानी की आर्द्रभूमि और गाद रोकने वाले जलाशयों के रूप में विकसित किया जाएगा। इन नए जल निकायों से प्रवासी पक्षियों के लिए अतिरिक्त आवास उपलब्ध होने के साथ लेह-मनाली राजमार्ग के किनारे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।नौ सितंबर से करीब 20 क्यूसेक पानी पहले प्राकृतिक गड्ढे में पहुंचाया जा रहा है। चार दिनों के भीतर ही इसके करीब 20 प्रतिशत हिस्से में पानी भर चुका था।
यह परियोजना उपराज्यपाल की ओर से 10 अगस्त को त्सो कार झील के दौरे के बाद शुरू की गई। स्थानीय ग्रामीणों ने उन्हें झील के तेजी से सिकुड़ने और प्रवासी पक्षियों, विशेषकर ब्लैक-नेक्ड क्रेन, की संख्या में आई भारी कमी के बारे में जानकारी दी थी। इसके बाद प्रशासन ने क्षेत्र का विस्तृत सर्वेक्षण कराया और युद्धस्तर पर काम शुरू किया।
त्सो कार झील के पुनर्जीवन से स्थानीय पश्मीना बकरी पालकों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। झील के सिकुड़ने से पारंपरिक चरागाह कम हो गए हैं, जिसके कारण कई पशुपालकों को चारे और चराई की तलाश में अपने घरों से 50 से 75 किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है।
स्थानीय आजीविका होगी मजबूत
उपराज्यपाल सक्सेना ने कहा कि यह पहल दर्शाती है कि लद्दाख जैसे कठोर ठंडे रेगिस्तानी क्षेत्र में भी सरल इंजीनियरिंग के माध्यम से टिकाऊ जल प्रबंधन और पारिस्थितिक पुनरुद्धार संभव है। उन्होंने उम्मीद जताई कि परियोजना से त्सो कार झील को पुनर्जीवित करने के साथ स्थानीय आजीविका को मजबूत करने और क्षेत्र के विशिष्ट पारिस्थितिकी तंत्र को आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित करने में मदद मिलेगी।