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कानून सबके लिए समान होना चाहिए चाहे कोई गरीब हो या अमीर : लोन
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हंदवाड़ा में सज्जाद गनी लोन। संवाद
- फोटो : samvad
संवाद न्यूज एजेंसी
कुपवाड़ा। जम्मू एवं कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के विधायक सज्जाद गनी लोन ने सोमवार को कहा कि गरीब लोगों को छोटे से जुर्म के लिए लंबे समय तक हिरासत में रखा जा रहा है। चाहे अमीर हो या गरीब, कानून सबके लिए एक जैसा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या शासन अमीरों के पक्ष में झुका हुआ है।
उन्होंने कहा कि भेदभाव से स्थनीय लोगों में अन्याय की भावना पैदा होती है। उन्होंने उन मामलों का हवाला दिया जहां युवाओं को कथित रूप से सोशल मीडिया गतिविधियों जैसे पोस्ट लाइक करने के लिए महीनों तक हिरासत में रखा गया। लोन ने कहा कि वह किसी भी रूप में हिंसा का समर्थन नहीं करते हैं। सरकार को कानून के भीतर कार्य करना चाहिए और जिसे उन्होंने चयनात्मक प्रवर्तन कहा, उससे बचना चाहिए।
उन्होंने चुनी हुई सरकार की प्रतिक्रिया पर भी चिंता जताई। लोन ने कहा कि उन्होंने उम्मीद की कि मुख्यमंत्री मतदाताओं को देखते हुए ऐसे मुद्दों को उपराज्यपाल के सामने उठाएंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें लोगों के प्रतिनिधि के रूप में बोलने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने चेतावनी दी कि कानूनों का असंगत प्रवर्तन जनता के रोष को और बढ़ा सकता है।
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कुपवाड़ा। जम्मू एवं कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के विधायक सज्जाद गनी लोन ने सोमवार को कहा कि गरीब लोगों को छोटे से जुर्म के लिए लंबे समय तक हिरासत में रखा जा रहा है। चाहे अमीर हो या गरीब, कानून सबके लिए एक जैसा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या शासन अमीरों के पक्ष में झुका हुआ है।
उन्होंने कहा कि भेदभाव से स्थनीय लोगों में अन्याय की भावना पैदा होती है। उन्होंने उन मामलों का हवाला दिया जहां युवाओं को कथित रूप से सोशल मीडिया गतिविधियों जैसे पोस्ट लाइक करने के लिए महीनों तक हिरासत में रखा गया। लोन ने कहा कि वह किसी भी रूप में हिंसा का समर्थन नहीं करते हैं। सरकार को कानून के भीतर कार्य करना चाहिए और जिसे उन्होंने चयनात्मक प्रवर्तन कहा, उससे बचना चाहिए।
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उन्होंने चुनी हुई सरकार की प्रतिक्रिया पर भी चिंता जताई। लोन ने कहा कि उन्होंने उम्मीद की कि मुख्यमंत्री मतदाताओं को देखते हुए ऐसे मुद्दों को उपराज्यपाल के सामने उठाएंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें लोगों के प्रतिनिधि के रूप में बोलने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने चेतावनी दी कि कानूनों का असंगत प्रवर्तन जनता के रोष को और बढ़ा सकता है।
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