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कैमरा-माइक वालों की जिम्मेदारी बड़ी है : मीरवाइज
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श्रीनगर में जुमे की नमाज के दौरान मीरवाइज उमर फारूक। संवाद
- जामिया मस्जिद में जुमा तकरीर, बोले- बच्चों को सोशल मीडिया का टूल न बनाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। मीरवाइज-ए-कश्मीर डॉ. मोहम्मद उमर फारूक ने शुक्रवार को ऐतिहासिक जामिया मस्जिद श्रीनगर में जुमा तकरीर के दौरान मीडिया, सोशल मीडिया यूजर्स और समाज से जिम्मेदारी, संयम और नैतिक जवाबदेही बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि कैमरा-माइक वालों की जिम्मेदारी बड़ी है।
मीरवाइज ने कहा कि मीडिया समाज का अहम स्तंभ है और आज सोशल मीडिया की अहमियत बहुत बढ़ गई है। समझदारी और जिम्मेदारी से इस्तेमाल हो तो यह समाज को मजबूत करता है लेकिन सिर्फ फॉलोअर्स, व्यूअरशिप या टीआरपी के लिए बिना असर सोचे इस्तेमाल किया जाए तो यह गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने हाल में वायरल हुए एक वीडियो का जिक्र किया जिसमें एक नाबालिग बच्चे से गर्मी और स्कूल की छुट्टियों पर सवाल पूछा गया और उसके बदतमीज जवाब को प्रसारित कर खूब शेयर किया गया।
मीरवाइज ने कहा कि समाज को सोचना चाहिए कि क्या नाबालिग बच्चों को इस तरह सोशल मीडिया पर लाकर प्रतिक्रिया के लिए इस्तेमाल करना ठीक है। मीरवाइज ने कहा कि बच्चे हमारा भविष्य हैं। उनसे पूछे गए सवाल और वे जो कंटेंट देखते हैं, वही उनकी सोच बनाते हैं। बच्चों को मनोरंजन, पब्लिसिटी या सोशल मीडिया एंगेजमेंट का जरिया नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार मीडिया और सोशल मीडिया के लिए संवेदनशीलता और जवाबदेही जरूरी है।
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कैमरा और माइक रखने वालों को याद रखना चाहिए कि वे समाज और अल्लाह के सामने जवाबदेह हैं। मीरवाइज ने मीडियाकर्मियों, कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया यूजर्स से संयम और जिम्मेदारी से काम लेने की अपील की।
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। मीरवाइज-ए-कश्मीर डॉ. मोहम्मद उमर फारूक ने शुक्रवार को ऐतिहासिक जामिया मस्जिद श्रीनगर में जुमा तकरीर के दौरान मीडिया, सोशल मीडिया यूजर्स और समाज से जिम्मेदारी, संयम और नैतिक जवाबदेही बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि कैमरा-माइक वालों की जिम्मेदारी बड़ी है।
मीरवाइज ने कहा कि मीडिया समाज का अहम स्तंभ है और आज सोशल मीडिया की अहमियत बहुत बढ़ गई है। समझदारी और जिम्मेदारी से इस्तेमाल हो तो यह समाज को मजबूत करता है लेकिन सिर्फ फॉलोअर्स, व्यूअरशिप या टीआरपी के लिए बिना असर सोचे इस्तेमाल किया जाए तो यह गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने हाल में वायरल हुए एक वीडियो का जिक्र किया जिसमें एक नाबालिग बच्चे से गर्मी और स्कूल की छुट्टियों पर सवाल पूछा गया और उसके बदतमीज जवाब को प्रसारित कर खूब शेयर किया गया।
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मीरवाइज ने कहा कि समाज को सोचना चाहिए कि क्या नाबालिग बच्चों को इस तरह सोशल मीडिया पर लाकर प्रतिक्रिया के लिए इस्तेमाल करना ठीक है। मीरवाइज ने कहा कि बच्चे हमारा भविष्य हैं। उनसे पूछे गए सवाल और वे जो कंटेंट देखते हैं, वही उनकी सोच बनाते हैं। बच्चों को मनोरंजन, पब्लिसिटी या सोशल मीडिया एंगेजमेंट का जरिया नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार मीडिया और सोशल मीडिया के लिए संवेदनशीलता और जवाबदेही जरूरी है।
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कैमरा और माइक रखने वालों को याद रखना चाहिए कि वे समाज और अल्लाह के सामने जवाबदेह हैं। मीरवाइज ने मीडियाकर्मियों, कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया यूजर्स से संयम और जिम्मेदारी से काम लेने की अपील की।