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ईद से पहले कश्मीरी कैदियों को रिहा करे केंद्र : महबूबा
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-आरएसएस नेता होसबले के बयान का किया समर्थन, पाकिस्तान से बातचीत की सलाह
-पीडीपी प्रमुख ने शहरी इलाकों से सेना की संख्या घटाने की कही बात
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कहा, ईद से पहले जम्मू-कश्मीर और देश की अन्य जेलों में बंद उन कश्मीरी युवाओं को सरकार रिहा करे जिनके खिलाफ कोई गंभीर आरोप साबित नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, ये गरीब परिवारों के बच्चे हैं जो सालों से सलाखों के पीछे जिंदगी काटने को मजबूर हैं।
उन्होंने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कश्मीर नीति पर पुनर्विचार की वकालत की है। आरएसएस के वरिष्ठ नेता होसबले के हालिया बयान का हवाला देते हुए मुफ्ती ने कहा कि अगर केंद्र सरकार वाकई मानती है कि घाटी में हालात सुधरे हैं तो उन्हें पाकिस्तान के साथ बातचीत के दरवाजे खोलने चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की बात की और केंद्र से मुफ्ती सईद के समय में किए गए वादे के मुताबिक दो बिजली परियोजनाओं को वापस जम्मू-कश्मीर को सौंपने की मांग की।
महबूबा मुफ्ती ने शहरी इलाकों से सेना की मौजूदगी कम करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि जिन शहरी क्षेत्रों में सेना तैनात है, उन्हें वहां से हटाकर वापस बैरकों में भेजा जाना चाहिए ताकि स्थानीय नागरिकों में सुरक्षा और सामान्य स्थिति का अहसास हो सके।
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उन्होंने कहा, घाटी में शांति बहाली के लिए सिर्फ सड़कें और पुल बनाना काफी नहीं है बल्कि लोगों के दिलों को जीतना और उनके जख्मों पर मरहम लगाना सबसे ज्यादा जरूरी है। उन्होंने कहा, साल 2019 के बाद से जम्मू-कश्मीर में सख्ती बहुत ज्यादा बढ़ा दी गई है। लोग डरे और सहमे हुए हैं लेकिन जब डर हद से ज्यादा बढ़ जाता है तो वह गुस्से और नफरत में बदल जाता है।
महबूबा ने कहा, जम्मू-कश्मीर को एक खुली अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि उड़ी-मुजफ्फराबाद और रावलकोट जैसे पुराने व्यापारिक रास्तों को फिर से बहाल किया जाए। कारगिल-सकरदू मार्ग को खोला जाए ताकि मध्य एशिया के साथ व्यापार आसान हो सके। लेह-शिनजियांग मार्ग को खोला जाए ताकि मानसरोवर यात्रा के लिए एक वैकल्पिक और सुगम रास्ता मिल सके।
उन्होंने सीमा पार (पाक अधिकृत कश्मीर) का जिक्र करते हुए कहा कि विकास के मामले में जम्मू-कश्मीर उनसे कहीं आगे है। यहां दर्जनों मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, आईआईटी, आईआईएम और दो-दो एआईआईएमएस जैसे संस्थान हैं जबकि वहां विकास नाममात्र का है। कहा, वहां भले ही विकास कम हो, लेकिन वहां के लोगों के पास चैन और सुकून है।
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-आरएसएस नेता होसबले के बयान का किया समर्थन, पाकिस्तान से बातचीत की सलाह
-पीडीपी प्रमुख ने शहरी इलाकों से सेना की संख्या घटाने की कही बात
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कहा, ईद से पहले जम्मू-कश्मीर और देश की अन्य जेलों में बंद उन कश्मीरी युवाओं को सरकार रिहा करे जिनके खिलाफ कोई गंभीर आरोप साबित नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, ये गरीब परिवारों के बच्चे हैं जो सालों से सलाखों के पीछे जिंदगी काटने को मजबूर हैं।
उन्होंने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कश्मीर नीति पर पुनर्विचार की वकालत की है। आरएसएस के वरिष्ठ नेता होसबले के हालिया बयान का हवाला देते हुए मुफ्ती ने कहा कि अगर केंद्र सरकार वाकई मानती है कि घाटी में हालात सुधरे हैं तो उन्हें पाकिस्तान के साथ बातचीत के दरवाजे खोलने चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की बात की और केंद्र से मुफ्ती सईद के समय में किए गए वादे के मुताबिक दो बिजली परियोजनाओं को वापस जम्मू-कश्मीर को सौंपने की मांग की।
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महबूबा मुफ्ती ने शहरी इलाकों से सेना की मौजूदगी कम करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि जिन शहरी क्षेत्रों में सेना तैनात है, उन्हें वहां से हटाकर वापस बैरकों में भेजा जाना चाहिए ताकि स्थानीय नागरिकों में सुरक्षा और सामान्य स्थिति का अहसास हो सके।
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उन्होंने कहा, घाटी में शांति बहाली के लिए सिर्फ सड़कें और पुल बनाना काफी नहीं है बल्कि लोगों के दिलों को जीतना और उनके जख्मों पर मरहम लगाना सबसे ज्यादा जरूरी है। उन्होंने कहा, साल 2019 के बाद से जम्मू-कश्मीर में सख्ती बहुत ज्यादा बढ़ा दी गई है। लोग डरे और सहमे हुए हैं लेकिन जब डर हद से ज्यादा बढ़ जाता है तो वह गुस्से और नफरत में बदल जाता है।
महबूबा ने कहा, जम्मू-कश्मीर को एक खुली अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि उड़ी-मुजफ्फराबाद और रावलकोट जैसे पुराने व्यापारिक रास्तों को फिर से बहाल किया जाए। कारगिल-सकरदू मार्ग को खोला जाए ताकि मध्य एशिया के साथ व्यापार आसान हो सके। लेह-शिनजियांग मार्ग को खोला जाए ताकि मानसरोवर यात्रा के लिए एक वैकल्पिक और सुगम रास्ता मिल सके।
उन्होंने सीमा पार (पाक अधिकृत कश्मीर) का जिक्र करते हुए कहा कि विकास के मामले में जम्मू-कश्मीर उनसे कहीं आगे है। यहां दर्जनों मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, आईआईटी, आईआईएम और दो-दो एआईआईएमएस जैसे संस्थान हैं जबकि वहां विकास नाममात्र का है। कहा, वहां भले ही विकास कम हो, लेकिन वहां के लोगों के पास चैन और सुकून है।