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Srinagar News: एमएसीटी ने दुर्घटना मामले में पीड़ितों को 1.13 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (एमएसीटी) ने सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को 1,13,21,400 रुपये (1.13 करोड़ रुपये) का मुआवजा देने का आदेश दिया है। साथ ही इस पर आठ प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज भी देने को कहा है।
ट्रिब्यूनल ने यह आदेश 10 जनवरी 2012 को उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा स्थित वायिल सुंबल के पास हुई एक दुर्घटना से जुड़े मुआवजे के दावे वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिकाकर्ताओं ने दुर्घटना के कारण हुए नुकसान के लिए मुआवजे की मांग की थी।
सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने पाया कि बीमा कंपनी जोखिम की अवधि शुरू होने की तारीख दर्शाने वाला बीमा पॉलिसी दस्तावेज पेश करने में विफल रही जो कि दावे के उचित निपटारे के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज था। ट्रिब्यूनल ने टिप्पणी करते हुए कहा, यह दस्तावेज दावे वाली याचिका के उचित निपटारे के लिए बेहद जरूरी था। आगे कहा कि सुनवाई के दौरान इसे पेश न करना एक महत्वपूर्ण सबूत को छिपाने के बराबर है।
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ट्रिब्यूनल ने फैसला सुनाया कि इतने महत्वपूर्ण दस्तावेज को छिपाने के लिए बीमा कंपनी पर जुर्माना लगाया जाना उचित है। इसलिए अदालत ने बीमा कंपनी पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने बचाव पक्ष की ओर से मामले को जिस तरह से लड़ा गया उस पर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। अदालत ने पाया कि बीमाकर्ता ने एक बहुत लंबा लिखित बयान दायर किया था जिसमें कई अप्रासंगिक बातें और कानूनी प्रावधानों तथा अदालती फैसलों के अनावश्यक संदर्भ शामिल थे।
ट्रिब्यूनल के अनुसार इस तरह के अनावश्यक बयानों से न्यायिक रिकॉर्ड पर अनावश्यक बोझ पड़ता है और एमएसीटी के निपटारे में देरी होती है जबकि इन मामलों का निपटारा तेजी से किया जाना चाहिए ताकि पीड़ितों को समय पर राहत मिल सके।
मुआवजा देने का यह फैसला सुंबल के बोन मोहल्ला हाकाबारा निवासी मुश्ताक अहमद डार, बांदीपोरा के हाकाबारा सोनावारी निवासी राजा बेगम, सुंबल के बटागुंड राखी हाजिन निवासी रफीका बेगम और बारामुला के दुदबुघ निवासी परवेज अहमद गनई के पक्ष में सुनाया गया है जिन्हें इस दुर्घटना में चोटें आई थीं।
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श्रीनगर। मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (एमएसीटी) ने सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को 1,13,21,400 रुपये (1.13 करोड़ रुपये) का मुआवजा देने का आदेश दिया है। साथ ही इस पर आठ प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज भी देने को कहा है।
ट्रिब्यूनल ने यह आदेश 10 जनवरी 2012 को उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा स्थित वायिल सुंबल के पास हुई एक दुर्घटना से जुड़े मुआवजे के दावे वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिकाकर्ताओं ने दुर्घटना के कारण हुए नुकसान के लिए मुआवजे की मांग की थी।
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सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने पाया कि बीमा कंपनी जोखिम की अवधि शुरू होने की तारीख दर्शाने वाला बीमा पॉलिसी दस्तावेज पेश करने में विफल रही जो कि दावे के उचित निपटारे के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज था। ट्रिब्यूनल ने टिप्पणी करते हुए कहा, यह दस्तावेज दावे वाली याचिका के उचित निपटारे के लिए बेहद जरूरी था। आगे कहा कि सुनवाई के दौरान इसे पेश न करना एक महत्वपूर्ण सबूत को छिपाने के बराबर है।
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ट्रिब्यूनल ने फैसला सुनाया कि इतने महत्वपूर्ण दस्तावेज को छिपाने के लिए बीमा कंपनी पर जुर्माना लगाया जाना उचित है। इसलिए अदालत ने बीमा कंपनी पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने बचाव पक्ष की ओर से मामले को जिस तरह से लड़ा गया उस पर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। अदालत ने पाया कि बीमाकर्ता ने एक बहुत लंबा लिखित बयान दायर किया था जिसमें कई अप्रासंगिक बातें और कानूनी प्रावधानों तथा अदालती फैसलों के अनावश्यक संदर्भ शामिल थे।
ट्रिब्यूनल के अनुसार इस तरह के अनावश्यक बयानों से न्यायिक रिकॉर्ड पर अनावश्यक बोझ पड़ता है और एमएसीटी के निपटारे में देरी होती है जबकि इन मामलों का निपटारा तेजी से किया जाना चाहिए ताकि पीड़ितों को समय पर राहत मिल सके।
मुआवजा देने का यह फैसला सुंबल के बोन मोहल्ला हाकाबारा निवासी मुश्ताक अहमद डार, बांदीपोरा के हाकाबारा सोनावारी निवासी राजा बेगम, सुंबल के बटागुंड राखी हाजिन निवासी रफीका बेगम और बारामुला के दुदबुघ निवासी परवेज अहमद गनई के पक्ष में सुनाया गया है जिन्हें इस दुर्घटना में चोटें आई थीं।