{"_id":"6ab8286db182c77cda009c37","slug":"jammu-kashmir-news-srinagar-news-c-10-1-jam1027-1023251-2026-09-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"विधायकों को घसीटा जाए, तो उन्हें माननीय कहने का क्या मतलब: अल्ताफ ठाकुर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विधायकों को घसीटा जाए, तो उन्हें माननीय कहने का क्या मतलब: अल्ताफ ठाकुर
विज्ञापन
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर विधानसभा से विपक्षी सदस्यों को मार्शलों द्वारा बाहर निकाले जाने की घटना पर भाजपा ने कड़ा एतराज जताया है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने शनिवार को इस कार्रवाई की तीखी निंदा करते हुए कहा कि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों के साथ इस तरह का अमर्यादित बर्ताव किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है।
अल्ताफ ठाकुर ने कहा कि विधायकों को ‘माननीय’ कहने का कोई औचित्य नहीं रह जाता, जब उन्हें अपने मतदाताओं और जनता के बुनियादी मुद्दों को उठाने पर सदन से जबरन घसीटकर बाहर कर दिया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुने हुए प्रतिनिधियों की गरिमा और सम्मान की रक्षा हर हाल में होनी चाहिए।
विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए भाजपा प्रवक्ता ने उन पर सदन के संचालन में खुला पक्षपात करने का आरोप लगाया। उन्होंने पूछा कि केवल विपक्षी सदस्यों को ही निशाना बनाकर मार्शलों के जरिए बाहर का रास्ता क्यों दिखाया जा रहा है। जब नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के विधायक सदन की कार्यवाही में बाधा डालते हैं या तीखा विरोध दर्ज कराते हैं तो उनके खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की जाती। उन्होंने कहा कि स्पीकर को इस दोहरे रवैये का जवाब देना होगा।
विज्ञापन
अल्ताफ ठाकुर ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष पूरे सदन के संरक्षक होते हैं, इसलिए उनकी जिम्मेदारी बनती है कि वे राजनीतिक दल से ऊपर उठकर सभी सदस्यों के साथ निष्पक्ष और समान व्यवहार सुनिश्चित करें। सदन किसी एक दल का नहीं बल्कि हर निर्वाचित प्रतिनिधि का है और इसे पक्षपातपूर्ण रवैये से नहीं चलाया जा सकता। यदि जनता की आवाज उठाना ही किसी विधायक को सदन से बाहर धकेलने की वजह बन जाए, तो यह लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के मूल उद्देश्य पर ही गहरा आघात है।
संसदीय परंपराओं का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि मतभेद, विरोध और तीखी बहसें संसदीय लोकतंत्र का अभिन्न हिस्सा हैं। किसी विधायक को सरकार के फैसलों से असहमति जताने और जोरदार विरोध करने का पूरा अधिकार है, लेकिन इसका यह मतलब कतई नहीं कि उसके बोलने के हक को मार्शलों के बल पर कुचल दिया जाए। उन्होंने विपक्षी विधायकों के साथ हुए इस व्यवहार की घोर निंदा करते हुए निष्पक्ष आचरण की मांग की।
विज्ञापन
अल्ताफ ठाकुर ने कहा कि विधायकों को ‘माननीय’ कहने का कोई औचित्य नहीं रह जाता, जब उन्हें अपने मतदाताओं और जनता के बुनियादी मुद्दों को उठाने पर सदन से जबरन घसीटकर बाहर कर दिया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुने हुए प्रतिनिधियों की गरिमा और सम्मान की रक्षा हर हाल में होनी चाहिए।
विज्ञापन
विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए भाजपा प्रवक्ता ने उन पर सदन के संचालन में खुला पक्षपात करने का आरोप लगाया। उन्होंने पूछा कि केवल विपक्षी सदस्यों को ही निशाना बनाकर मार्शलों के जरिए बाहर का रास्ता क्यों दिखाया जा रहा है। जब नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के विधायक सदन की कार्यवाही में बाधा डालते हैं या तीखा विरोध दर्ज कराते हैं तो उनके खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की जाती। उन्होंने कहा कि स्पीकर को इस दोहरे रवैये का जवाब देना होगा।
विज्ञापन
अल्ताफ ठाकुर ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष पूरे सदन के संरक्षक होते हैं, इसलिए उनकी जिम्मेदारी बनती है कि वे राजनीतिक दल से ऊपर उठकर सभी सदस्यों के साथ निष्पक्ष और समान व्यवहार सुनिश्चित करें। सदन किसी एक दल का नहीं बल्कि हर निर्वाचित प्रतिनिधि का है और इसे पक्षपातपूर्ण रवैये से नहीं चलाया जा सकता। यदि जनता की आवाज उठाना ही किसी विधायक को सदन से बाहर धकेलने की वजह बन जाए, तो यह लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के मूल उद्देश्य पर ही गहरा आघात है।
संसदीय परंपराओं का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि मतभेद, विरोध और तीखी बहसें संसदीय लोकतंत्र का अभिन्न हिस्सा हैं। किसी विधायक को सरकार के फैसलों से असहमति जताने और जोरदार विरोध करने का पूरा अधिकार है, लेकिन इसका यह मतलब कतई नहीं कि उसके बोलने के हक को मार्शलों के बल पर कुचल दिया जाए। उन्होंने विपक्षी विधायकों के साथ हुए इस व्यवहार की घोर निंदा करते हुए निष्पक्ष आचरण की मांग की।