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Srinagar News: फसल सुरक्षा और रोग प्रबंधन पर जुटे देशभर के वैज्ञानिक, 49 से अधिक शोध पत्र पेश किए
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- कश्मीर विश्वविद्यालय में जलवायु-अनुकूल खेती पर 43वां वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। कश्मीर विश्वविद्यालय (केयू) के वनस्पति विज्ञान विभाग की ओर से जलवायु-अनुकूल कृषि के तहत पादप रोग विज्ञान में प्रगति और चुनौतियां विषय पर आयोजित 43वां वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन बीते शनिवार को संपन्न हो गया। 29 से 31 अक्तूबर तक चले इस राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन इंडियन सोसाइटी ऑफ माइकोलॉजी एंड प्लांट पैथोलॉजी और राजस्थान कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर, महाराणा प्रताप यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी (उदयपुर) के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था।
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य बदलते जलवायु परिदृश्य में फसलों को बीमारियों से बचाने, आधुनिक रोग प्रबंधन रणनीतियों को विकसित करने और वैज्ञानिक नवाचारों के जरिए टिकाऊ कृषि को मजबूती प्रदान करना रहा। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में जम्मू-कश्मीर के कृषि उत्पादन, वित्त, खनन और सहकारिता मंत्री जावेद अहमद डार ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की थी।
समापन समारोह को संबोधित करते हुए कश्मीर विश्वविद्यालय के डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. शरीफुद्दीन पीरजादा ने कृषि चुनौतियों के समाधान में पादप रोग विज्ञान (प्लांट पैथोलॉजी) की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि बदलते मौसम और जलवायु के दौर में फसलों में पनप रही नई बीमारियों को समझने और पैदावार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पादप रोग अनुसंधान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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डॉ. टीआर शर्मा को लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व उप महानिदेशक और आईएआरआई नई दिल्ली के नेशनल फेलो डॉ. टीआर शर्मा ने सम्मेलन में प्रतिष्ठित आर प्रसाद मेमोरियल लेक्चर सम्मान दिया। उन्होंने तीन दशकों से अधिक के अपने शोध अनुभव साझा किए और विशेष रूप से चावल की फसल व राइस ब्लास्ट रोग पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम में उन्हें पादप अनुसंधान क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रो. एसएस चहल लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर अध्यक्ष प्रो. एसएस चहल, वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रमुख व सम्मेलन संयोजक प्रो. एजाज अहमद वानी और आयोजन सचिव प्रो. मोहम्मद याकूब ने भी विचार रखे। वहीं सचिव प्रो. पोखर रावल ने सोसायटी के विभिन्न प्रतिष्ठित व प्रतियोगिता पुरस्कारों की घोषणा की।
युवा शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों का लगा जमावड़ा
सम्मेलन में देशभर के विभिन्न संस्थानों से पहुंचे प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, संकाय सदस्यों और युवा विद्वानों ने हिस्सा लिया। तीन दिनों के दौरान विभिन्न सत्रों में आमंत्रित व्याख्यानों के साथ-साथ करीब 49 पोस्टर प्रस्तुतियां दी गईं। चार मौखिक (ओरल) सत्रों, दो पोस्टर सत्रों और एक विशेष श्रेणी में उत्कृष्ट शोध प्रस्तुत करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम का संचालन वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रो. अंजार खुरो ने किया, जबकि सह-आयोजन सचिव प्रो. नजीब मुगल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। आयोजन समिति के सह-संयोजक प्रो. अब्दुल हमीद वानी, डॉ. मोहम्मद आरिफ जरगर और डॉ. सज्जाद उन नबी सहित अन्य सदस्यों ने सभी प्रतिभागियों और प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। कश्मीर विश्वविद्यालय (केयू) के वनस्पति विज्ञान विभाग की ओर से जलवायु-अनुकूल कृषि के तहत पादप रोग विज्ञान में प्रगति और चुनौतियां विषय पर आयोजित 43वां वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन बीते शनिवार को संपन्न हो गया। 29 से 31 अक्तूबर तक चले इस राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन इंडियन सोसाइटी ऑफ माइकोलॉजी एंड प्लांट पैथोलॉजी और राजस्थान कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर, महाराणा प्रताप यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी (उदयपुर) के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था।
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य बदलते जलवायु परिदृश्य में फसलों को बीमारियों से बचाने, आधुनिक रोग प्रबंधन रणनीतियों को विकसित करने और वैज्ञानिक नवाचारों के जरिए टिकाऊ कृषि को मजबूती प्रदान करना रहा। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में जम्मू-कश्मीर के कृषि उत्पादन, वित्त, खनन और सहकारिता मंत्री जावेद अहमद डार ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की थी।
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समापन समारोह को संबोधित करते हुए कश्मीर विश्वविद्यालय के डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. शरीफुद्दीन पीरजादा ने कृषि चुनौतियों के समाधान में पादप रोग विज्ञान (प्लांट पैथोलॉजी) की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि बदलते मौसम और जलवायु के दौर में फसलों में पनप रही नई बीमारियों को समझने और पैदावार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पादप रोग अनुसंधान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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डॉ. टीआर शर्मा को लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व उप महानिदेशक और आईएआरआई नई दिल्ली के नेशनल फेलो डॉ. टीआर शर्मा ने सम्मेलन में प्रतिष्ठित आर प्रसाद मेमोरियल लेक्चर सम्मान दिया। उन्होंने तीन दशकों से अधिक के अपने शोध अनुभव साझा किए और विशेष रूप से चावल की फसल व राइस ब्लास्ट रोग पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम में उन्हें पादप अनुसंधान क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रो. एसएस चहल लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर अध्यक्ष प्रो. एसएस चहल, वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रमुख व सम्मेलन संयोजक प्रो. एजाज अहमद वानी और आयोजन सचिव प्रो. मोहम्मद याकूब ने भी विचार रखे। वहीं सचिव प्रो. पोखर रावल ने सोसायटी के विभिन्न प्रतिष्ठित व प्रतियोगिता पुरस्कारों की घोषणा की।
युवा शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों का लगा जमावड़ा
सम्मेलन में देशभर के विभिन्न संस्थानों से पहुंचे प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, संकाय सदस्यों और युवा विद्वानों ने हिस्सा लिया। तीन दिनों के दौरान विभिन्न सत्रों में आमंत्रित व्याख्यानों के साथ-साथ करीब 49 पोस्टर प्रस्तुतियां दी गईं। चार मौखिक (ओरल) सत्रों, दो पोस्टर सत्रों और एक विशेष श्रेणी में उत्कृष्ट शोध प्रस्तुत करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम का संचालन वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रो. अंजार खुरो ने किया, जबकि सह-आयोजन सचिव प्रो. नजीब मुगल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। आयोजन समिति के सह-संयोजक प्रो. अब्दुल हमीद वानी, डॉ. मोहम्मद आरिफ जरगर और डॉ. सज्जाद उन नबी सहित अन्य सदस्यों ने सभी प्रतिभागियों और प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया।