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जम्मू: नेकां की अंदरूनी कलह अब खुली बगावत में तब्दील, विद्रोही विधायक बोले...हम ही असली; सीएम उमर मुसीबत में

Mon, 02 Nov 2026 03:27 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 02 Nov 2026 03:27 AM IST
सार

पार्टी के असंतुष्ट खेमे ने दो टूक ऐलान किया है कि हम ही 'असली नेकां' हैं। बागियों ने अटकलों को खारिज करते हुए दावा किया कि हम 17 या 18 नहीं, बल्कि पूरे 25 विधायक हैं।

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Jammu: Internal strife within the NC has now turned into an open rebellion; CM Omar in trouble
सीएम उमर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) की अंदरूनी कलह अब खुली बगावत में तब्दील हो गई है। पार्टी के असंतुष्ट खेमे ने दो टूक ऐलान किया है कि हम ही 'असली नेकां' हैं। बागियों ने अटकलों को खारिज करते हुए दावा किया कि हम 17 या 18 नहीं, बल्कि पूरे 25 विधायक हैं। हम सभी लामबंद हैं और सभी एकजुट रहने की कसम खाई है। हम पार्टी को कुछ चंद लोगों की कॉरपोरेट इकाई नहीं बनने देंगे।

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नेकां में मुबारक गुल, नजीर गुरेजी, मुजफ्फर खान, अर्जुन सिंह राजू, फारूक शाह, बशीर वीरी, अब्दुल मजीद लारमी, जावेद अहमद, एजाज जान, जावेद इकबाल, सज्जाद शफी ऐसे कुछ नाम है जो नेकां की वर्तमान रीति-नीति से खफा हैं और बगावती तेवर अपनाए हुए हैं। वरिष्ठ नेता मुबारक गुल की 4 नवंबर को प्रस्तावित प्रेस कॉन्फ्रेंस से ठीक पहले 25 विधायकों की इस लामबंदी ने नेकां आलाकमान के सामने सरकार बचाने और पार्टी को टूटने से रोकने की सबसे बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
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इन्होंने अनुच्छेद 370 की बहाली के वादे, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सलाहकार को हटाने और कैबिनेट पुनर्गठन को लेकर आर-पार की लड़ाई छेड़ दी है। इससे उमर सरकार के अस्तित्व पर ही गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विधायकों ने कहा कि वर्तमान में जिस तरह के अपमान, बेबसी और सत्ता के संकेंद्रण का माहौल बना हुआ है उसमें घुट-घुट कर जीने से बेहतर है सरकार गिर जाए।
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इन विधायकों ने कहा कि हमें बागी या असंतुष्ट न कहा जाए। हमने पिछले तीन दशकों से नेकां को खून-पसीने से सींचा है। इसलिए हम ही असली नेशनल कॉन्फ्रेंस हैं। यह लड़ाई किसी मंत्री पद या व्यक्तिगत ओहदे की लालसा में नहीं, बल्कि पार्टी के मूल सिद्धांतों, चुनावी वादों और अपने राजनीतिक आत्मसम्मान की रक्षा के लिए है। उन्होंने कहा कि हमारे इस रुख के पीछे भाजपा या केंद्र सरकार जैसी कोई बाहरी ताकत नहीं है।
शपथ ग्रहण से फूटी थी बगावत की चिंगारी

नेकां में बगावत की जड़ें 27 अक्तूबर को हुए कैबिनेट विस्तार और फेरबदल से जुड़ी हैं। श्रीनगर में चार नए मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह से नेकां के 11 विधायक नदारद रहे थे। इसके तुरंत बाद 30 अक्तूबर को विधायक कैसर जमशेद लोन के घर पर नेकां के 17 विधायकों और एक निर्दलीय की गुप्त बैठक हुई। इस बैठक में विधायकों ने साफ रुख अपनाते हुए 16 अक्टूबर 2024 को सरकार गठन के समय शपथ लेने वाले और अपने कार्यकाल के दो वर्ष पूरे कर चुके पुराने मंत्रियों को हटाकर नए चेहरों को मौका देने की आवाज उठाई थी।

पुराने मंत्रियों को हटाने और दाछिगाम समझौते का हवाला
विधायकों ने 16 अक्तूबर 2024 को सरकार गठन के समय शपथ लेने वाले और दो वर्ष पूरे कर चुके पुराने मंत्रियों को हटाकर नए चेहरों को मौका देने की मांग उठाई। साथ ही 3 जून को दाछिगाम में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक की सहमति का हवाला देते हुए उपमुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों के विभागों के बंटवारे पर असंतोष जताया।

...तो बहुमत पर संकट, बात होगी तो सभी 25 से
वर्ष 2024 में 90 सीटों पर हुए विधानसभा चुनाव में नेकां ने 42 सीटें जीती थीं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला दो जगह से चुनाव लड़े और जीते थे, जिसमें से एक सीट उपचुनाव में नेकां ने गंवा दी। वर्तमान में पार्टी के 41 विधायक हैं। ऐसे में 25 विधायकों की लामबंदी सीधे तौर पर सरकार के लिए बहुमत का संकट खड़ा करती है।

  • बागियों ने मध्यस्थता और सुलह की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि कोई भी विधायक अकेले में किसी से बात नहीं करेगा। यदि वार्ता होगी तो सभी 25 विधायकों की मौजूदगी में ही होगी।

ये है मांग पत्र में...इससे कम कुछ नहीं

  • नए सिरे से मंत्रिमंडल का पुनर्गठन
  • मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी को पद से हटाना
  • जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग
  • अनुच्छेद 370 की बहाली के लिए संघर्ष तेज
  • 2024 के चुनावी घोषणापत्र को तय समयसीमा में लागू करना
  • ...और ये भी कि सलाहकार और सांसद के इशारे पर चली सरकार तो फारूक संभालें कमान

बागी विधायकों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब तक एक सलाहकार और एक सांसद के इशारे पर सरकार चलाई जाएगी तब तक मुख्यमंत्री के साथ किसी भी समझौते की गुंजाइश नहीं है। चेतावनी दी कि यदि सांसद की तरफ से विधायकों को साधने या दबाव बनाने की कोशिशें जारी रहीं तो वे खुले तौर पर मांग करेंगे कि उमर को हटाकर डॉ. फारूक अब्दुल्ला स्वयं सरकार की कमान संभालें।



दिल्ली में सीएम के निकाह समारोह से भी रहे दूर
अविश्वास की खाई ऐसी है कि बागी विधायकों ने दिल्ली में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के निकाह समारोह में भाग नहीं लिया। फोन या मैसेज कर औपचारिक बधाई भी नहीं दी।

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