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Srinagar News: हाईकोर्ट ने कश्मीर मेडिकल कॉलेज पर नेशनल मेडिकल कमीशन के आदेश को स्थगित किया
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने नेशनल मेडिकल कमीशन के उस आदेश को स्थगित कर दिया है जिसमें कश्मीर मेडिकल कॉलेज सेमपोरा श्रीनगर के शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए 150 एमबीबीएस सीटों के वार्षिक प्रवेश के साथ संस्थान स्थापित करने की अनुमति के आवेदन को खारिज कर दिया गया था।
न्यायमूर्ति मोहम्मद यूसुफ वानी की पीठ ने कश्मीर मेडिकल कॉलेज मिली ट्रस्ट की एक इकाई की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए एनएमसी अधिकारियों को 27 अक्तूबर के आदेश पर लागू कानून और कॉलेज की आपत्तियों के आलोक में पुनर्विचार करने और समीक्षा करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने अधिकारियों से कॉलेज को सशर्त परमिट जारी करने की संभावना तलाशने के लिए भी कहा ताकि वह मौजूदा शैक्षणिक सत्र के लिए एमबीबीएस छात्रों को प्रवेश दे सके।
यह निर्देश एनएमसी के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड एमएआरबी द्वारा कॉलेज के आवेदन को खारिज करने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया गया। कॉलेज ने इंडस्ट्रियल एस्टेट सेमपोरा में अपनी औपचारिक स्थापना के लिए एनएमसी से संपर्क किया था जिसमें 150 एमबीबीएस छात्रों की वार्षिक प्रवेश क्षमता थी। उसने कहा कि इस साल 22 जनवरी को जमा किया गया उसका आवेदन सभी मामलों में पूरा था और इसमें एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट, एफिलिएशन की सहमति, 650 बिस्तरों वाले कार्यात्मक शिक्षण अस्पताल का प्रमाण, वैधानिक लाइसेंस, सॉल्वेंसी सर्टिफिकेट और एईबीएएस/एनएमसी पोर्टल पर पंजीकृत फैकल्टी का विवरण शामिल था।
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हालांकि एमएआरबी ने 9 जून को यह कहते हुए आवेदन को खारिज कर दिया कि बुनियादी ढांचा प्रक्रिया में है। कॉलेज ने अपीलीय अधिकारियों के समक्ष फैसले को चुनौती दी, लेकिन उसकी पहली अपील खारिज कर दी गई। इसके बाद केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के द्वितीय अपीलीय प्राधिकरण ने 24 अगस्त के आदेश के माध्यम से मामले को दस्तावेजों और रिकॉर्डों की पुनः जांच और उचित आदेश जारी करने के लिए एनएमसी को वापस भेज दिया।
अपीलीय आदेश का पालन न करने का आरोप लगाते हुए कॉलेज ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कार्यवाही के दौरान भारत के उप-सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि एनएमसी अधिकारियों ने 5 और 13 अक्तूबर के हाईकोर्ट के पहले के निर्देशों के अनुपालन में भौतिक निरीक्षण किया था और बाद में 27 अक्टूबर के विस्तृत आदेश के माध्यम से कॉलेज के आवेदन को खारिज कर दिया था।
हालांकि कॉलेज ने नेशनल मेडिकल कमीशन अधिनियम 2019 की धारा 28 और 29 के साथ-साथ प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए नवीनतम अस्वीकृति को चुनौती दी। उसने तर्क दिया कि अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान पहचानी गई कमियों, यदि कोई हो, को बताने और उन्हें सुधारने का अवसर प्रदान करने में विफल रहे। कॉलेज ने 22 अक्टूबर की अनुपालन रिपोर्ट पर भरोसा करने पर भी सवाल उठाया, और दावा किया कि चार मूल्यांकनकर्ताओं और कॉलेज के प्रिंसिपल/डीन द्वारा संयुक्त रूप से हस्ताक्षरित 14 अक्टूबर की अंतिम भौतिक निरीक्षण रिपोर्ट पर विधिवत विचार नहीं किया गया।
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने नेशनल मेडिकल कमीशन के उस आदेश को स्थगित कर दिया है जिसमें कश्मीर मेडिकल कॉलेज सेमपोरा श्रीनगर के शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए 150 एमबीबीएस सीटों के वार्षिक प्रवेश के साथ संस्थान स्थापित करने की अनुमति के आवेदन को खारिज कर दिया गया था।
न्यायमूर्ति मोहम्मद यूसुफ वानी की पीठ ने कश्मीर मेडिकल कॉलेज मिली ट्रस्ट की एक इकाई की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए एनएमसी अधिकारियों को 27 अक्तूबर के आदेश पर लागू कानून और कॉलेज की आपत्तियों के आलोक में पुनर्विचार करने और समीक्षा करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने अधिकारियों से कॉलेज को सशर्त परमिट जारी करने की संभावना तलाशने के लिए भी कहा ताकि वह मौजूदा शैक्षणिक सत्र के लिए एमबीबीएस छात्रों को प्रवेश दे सके।
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यह निर्देश एनएमसी के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड एमएआरबी द्वारा कॉलेज के आवेदन को खारिज करने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया गया। कॉलेज ने इंडस्ट्रियल एस्टेट सेमपोरा में अपनी औपचारिक स्थापना के लिए एनएमसी से संपर्क किया था जिसमें 150 एमबीबीएस छात्रों की वार्षिक प्रवेश क्षमता थी। उसने कहा कि इस साल 22 जनवरी को जमा किया गया उसका आवेदन सभी मामलों में पूरा था और इसमें एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट, एफिलिएशन की सहमति, 650 बिस्तरों वाले कार्यात्मक शिक्षण अस्पताल का प्रमाण, वैधानिक लाइसेंस, सॉल्वेंसी सर्टिफिकेट और एईबीएएस/एनएमसी पोर्टल पर पंजीकृत फैकल्टी का विवरण शामिल था।
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हालांकि एमएआरबी ने 9 जून को यह कहते हुए आवेदन को खारिज कर दिया कि बुनियादी ढांचा प्रक्रिया में है। कॉलेज ने अपीलीय अधिकारियों के समक्ष फैसले को चुनौती दी, लेकिन उसकी पहली अपील खारिज कर दी गई। इसके बाद केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के द्वितीय अपीलीय प्राधिकरण ने 24 अगस्त के आदेश के माध्यम से मामले को दस्तावेजों और रिकॉर्डों की पुनः जांच और उचित आदेश जारी करने के लिए एनएमसी को वापस भेज दिया।
अपीलीय आदेश का पालन न करने का आरोप लगाते हुए कॉलेज ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कार्यवाही के दौरान भारत के उप-सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि एनएमसी अधिकारियों ने 5 और 13 अक्तूबर के हाईकोर्ट के पहले के निर्देशों के अनुपालन में भौतिक निरीक्षण किया था और बाद में 27 अक्टूबर के विस्तृत आदेश के माध्यम से कॉलेज के आवेदन को खारिज कर दिया था।
हालांकि कॉलेज ने नेशनल मेडिकल कमीशन अधिनियम 2019 की धारा 28 और 29 के साथ-साथ प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए नवीनतम अस्वीकृति को चुनौती दी। उसने तर्क दिया कि अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान पहचानी गई कमियों, यदि कोई हो, को बताने और उन्हें सुधारने का अवसर प्रदान करने में विफल रहे। कॉलेज ने 22 अक्टूबर की अनुपालन रिपोर्ट पर भरोसा करने पर भी सवाल उठाया, और दावा किया कि चार मूल्यांकनकर्ताओं और कॉलेज के प्रिंसिपल/डीन द्वारा संयुक्त रूप से हस्ताक्षरित 14 अक्टूबर की अंतिम भौतिक निरीक्षण रिपोर्ट पर विधिवत विचार नहीं किया गया।