{"_id":"69791ccad37675996a03bab3","slug":"srinagar-high-court-verdict-18-year-old-corruption-case-skmis-employee-srinagar-news-c-10-lko1027-822095-2026-01-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Srinagar News: भ्रष्टाचार के 18 साल पुराने मामले में स्किम्स कर्मी बरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Srinagar News: भ्रष्टाचार के 18 साल पुराने मामले में स्किम्स कर्मी बरी
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार मामले में पहले सुनाई गई सजा को किया रद्द
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक पूर्व एसकेआईएमएस कर्मचारी को बरी कर दिया और 2008 के भ्रष्टाचार मामले में उसकी सजा को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि दस्तावेज में जालसाजी, सरकारी पद के दुरुपयोग या आपराधिक मंशा का कोई ठोस सबूत था।
अदालत ने गुलाम रसूल गनी की ओर से दायर आपराधिक अपील को स्वीकार करते हुए 8 फरवरी 2008 को विशेष न्यायाधीश (एंटी करप्शन), श्रीनगर द्वारा पारित दोषसिद्धि और सजा के फैसले को खारिज कर दिया।
गनी पर आरोप था कि उन्होंने शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (स्किम्स ) में पदोन्नति प्राप्त करने के लिए एक जाली मैट्रिकुलेशन प्रमाणपत्र और सेना से संबंधित एक बदलवां डिस्चार्ज प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया था जिसमें उनका रैंक नाइक दिखाया गया था, जबकि उनकी वास्तविक स्थिति राइफलमैन थी। इससे उन्हें 2.19 लाख रुपये का अनुचित लाभ प्राप्त हुआ था। उच्च न्यायालय ने कहा कि संदेह, चाहे वह कितना भी गंभीर क्यों न हो, कानूनी प्रमाण के स्थान पर नहीं हो सकता। और जब तक जालसाजी या भ्रष्टाचार के दोष साबित करने के लिए कोई ठोस प्रमाण नहीं है, तब तक आरोप सही नहीं ठहराए जा सकते।
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक पूर्व एसकेआईएमएस कर्मचारी को बरी कर दिया और 2008 के भ्रष्टाचार मामले में उसकी सजा को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि दस्तावेज में जालसाजी, सरकारी पद के दुरुपयोग या आपराधिक मंशा का कोई ठोस सबूत था।
अदालत ने गुलाम रसूल गनी की ओर से दायर आपराधिक अपील को स्वीकार करते हुए 8 फरवरी 2008 को विशेष न्यायाधीश (एंटी करप्शन), श्रीनगर द्वारा पारित दोषसिद्धि और सजा के फैसले को खारिज कर दिया।
विज्ञापन
गनी पर आरोप था कि उन्होंने शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (स्किम्स ) में पदोन्नति प्राप्त करने के लिए एक जाली मैट्रिकुलेशन प्रमाणपत्र और सेना से संबंधित एक बदलवां डिस्चार्ज प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया था जिसमें उनका रैंक नाइक दिखाया गया था, जबकि उनकी वास्तविक स्थिति राइफलमैन थी। इससे उन्हें 2.19 लाख रुपये का अनुचित लाभ प्राप्त हुआ था। उच्च न्यायालय ने कहा कि संदेह, चाहे वह कितना भी गंभीर क्यों न हो, कानूनी प्रमाण के स्थान पर नहीं हो सकता। और जब तक जालसाजी या भ्रष्टाचार के दोष साबित करने के लिए कोई ठोस प्रमाण नहीं है, तब तक आरोप सही नहीं ठहराए जा सकते।
विज्ञापन