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Srinagar News: कैंसर मरीजों के लिए वित्तीय मदद की योजना शुरू की जाए
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (स्किम्स) के कैंसर बायोलॉजिस्ट और रिसर्च साइंटिस्ट डॉ. उमर मजीद ने जम्मू-कश्मीर सरकार से कैंसर के मरीजों व इनके परिवारों की बढ़ती आर्थिक परेशानियों को देखते हुए कैंसर केयर के लिए खास वित्तीय सहायता स्कीम शुरू करने की अपील की है।
डॉ. उमर ने कहा कि हालांकि इस इलाके में हेल्थकेयर संस्थान, ऑन्कोलॉजिस्ट और मेडिकल प्रोफेशनल्स अच्छी क्वालिटी का इलाज और देखभाल दे रहे हैं फिर भी कैंसर के इलाज का खर्च कई परिवारों की पहुंच से बाहर है। उन्होंने कहा कि लगभग हर दिन कश्मीर के अलग-अलग हिस्सों से परिवार अपने किसी करीबी को कैंसर होने का पता चलने के बाद सलाह लेने के लिए संपर्क करते हैं। सदमे के साथ-साथ, उन्हें इलाज के खर्च का भी सामना करना पड़ता है जो लाखों रुपये तक हो सकता है।
कई मामलों में परिवारों को जान बचाने वाला इलाज जारी रखने के लिए सोशल मीडिया के जरिए लोगों से चंदा मांगने के लिए मजबूर होना पड़ता है। मरीजों के परिवारों से कई कॉल आने के बाद मुझे यह अपील करने की जरूरत महसूस हुई। यह दिल तोड़ने वाला होता है जब परिवार पूछते हैं कि वे इलाज के लिए 30-40 लाख का इंतजाम कैसे करें। एक साइंटिस्ट के तौर पर मैं सलाह और इमोशनल सपोर्ट तो दे सकता हूं लेकिन उनकी आर्थिक परेशानी का मेरे पास कोई जवाब नहीं।
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डॉ. उमर ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी मरीज या परिवार को इलाज के लिए सार्वजनिक रूप से आर्थिक मदद मांगने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए एक खास कैंसर सपोर्ट फंड या मरीज कल्याण योजना बनाने की मांग की। हाल के हेल्थ डेटा से पता चलता है कि जम्मू-कश्मीर में कैंसर का बोझ लगातार बढ़ रहा है और केंद्र शासित प्रदेश में हर दिन कैंसर के औसतन 30-35 नए मामलों का पता चल रहा है।
डॉ. उमर ने कहा कि कैंसर न केवल एक हेल्थकेयर चुनौती के रूप में उभर रहा है बल्कि एक गंभीर सामाजिक-आर्थिक चिंता के रूप में भी सामने आ रहा है जो परिवारों को भावनात्मक और आर्थिक रूप से प्रभावित कर रहा है। हर मरीज सस्ती, सुलभ और सम्मानजनक देखभाल का हकदार है। डॉ. उमर जो प्रमुख अंतरराष्ट्रीय ऑन्कोलॉजी संगठनों से जुड़े हैं और संसाधनों की कमी वाले इलाकों में असमानताओं को दूर करने वाली वैश्विक कैंसर रिसर्च पहलों में योगदान दे चुके हैं, ने कैंसर केयर व रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर में चल रहे सुधारों के साथ-साथ मरीजों के लिए मजबूत सपोर्ट सिस्टम की जरूरत पर जोर दिया।
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श्रीनगर। शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (स्किम्स) के कैंसर बायोलॉजिस्ट और रिसर्च साइंटिस्ट डॉ. उमर मजीद ने जम्मू-कश्मीर सरकार से कैंसर के मरीजों व इनके परिवारों की बढ़ती आर्थिक परेशानियों को देखते हुए कैंसर केयर के लिए खास वित्तीय सहायता स्कीम शुरू करने की अपील की है।
डॉ. उमर ने कहा कि हालांकि इस इलाके में हेल्थकेयर संस्थान, ऑन्कोलॉजिस्ट और मेडिकल प्रोफेशनल्स अच्छी क्वालिटी का इलाज और देखभाल दे रहे हैं फिर भी कैंसर के इलाज का खर्च कई परिवारों की पहुंच से बाहर है। उन्होंने कहा कि लगभग हर दिन कश्मीर के अलग-अलग हिस्सों से परिवार अपने किसी करीबी को कैंसर होने का पता चलने के बाद सलाह लेने के लिए संपर्क करते हैं। सदमे के साथ-साथ, उन्हें इलाज के खर्च का भी सामना करना पड़ता है जो लाखों रुपये तक हो सकता है।
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कई मामलों में परिवारों को जान बचाने वाला इलाज जारी रखने के लिए सोशल मीडिया के जरिए लोगों से चंदा मांगने के लिए मजबूर होना पड़ता है। मरीजों के परिवारों से कई कॉल आने के बाद मुझे यह अपील करने की जरूरत महसूस हुई। यह दिल तोड़ने वाला होता है जब परिवार पूछते हैं कि वे इलाज के लिए 30-40 लाख का इंतजाम कैसे करें। एक साइंटिस्ट के तौर पर मैं सलाह और इमोशनल सपोर्ट तो दे सकता हूं लेकिन उनकी आर्थिक परेशानी का मेरे पास कोई जवाब नहीं।
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डॉ. उमर ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी मरीज या परिवार को इलाज के लिए सार्वजनिक रूप से आर्थिक मदद मांगने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए एक खास कैंसर सपोर्ट फंड या मरीज कल्याण योजना बनाने की मांग की। हाल के हेल्थ डेटा से पता चलता है कि जम्मू-कश्मीर में कैंसर का बोझ लगातार बढ़ रहा है और केंद्र शासित प्रदेश में हर दिन कैंसर के औसतन 30-35 नए मामलों का पता चल रहा है।
डॉ. उमर ने कहा कि कैंसर न केवल एक हेल्थकेयर चुनौती के रूप में उभर रहा है बल्कि एक गंभीर सामाजिक-आर्थिक चिंता के रूप में भी सामने आ रहा है जो परिवारों को भावनात्मक और आर्थिक रूप से प्रभावित कर रहा है। हर मरीज सस्ती, सुलभ और सम्मानजनक देखभाल का हकदार है। डॉ. उमर जो प्रमुख अंतरराष्ट्रीय ऑन्कोलॉजी संगठनों से जुड़े हैं और संसाधनों की कमी वाले इलाकों में असमानताओं को दूर करने वाली वैश्विक कैंसर रिसर्च पहलों में योगदान दे चुके हैं, ने कैंसर केयर व रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर में चल रहे सुधारों के साथ-साथ मरीजों के लिए मजबूत सपोर्ट सिस्टम की जरूरत पर जोर दिया।