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Srinagar News: अधिकारियों को डिजिटल आईडी बनाने में तेजी लाने के निर्देश
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। जल जीवन मिशन, जम्मू-कश्मीर के मिशन निदेशक की अध्यक्षता में सोमवार को ग्रामीण पाइप्ड जलापूर्ति योजनाओं (आरपीडब्ल्यूएसएस) के आउट-विलेज इंफ्रास्ट्रक्चर से संबंधित डिजिटल आईडी बनाने की प्रगति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस दौरान निदेशक ने अधिकारियों को डिजिटल आई बनाने में तेजी लाने के निर्देश दिए।
मुख्य एजेंडा जल जीवन मिशन के डिजिटल फ्रेमवर्क के तहत आरपीडब्ल्यूएसएस के आउट-विलेज कंपोनेंट के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर का विवरण शीघ्र तैयार कर पोर्टल पर अपलोड करने का था। मिशन निदेशक ने कहा कि योजनाओं की संरचना (स्कीम आर्किटेक्चर) को समयबद्ध और सटीक तरीके से सेट करना होगा। इसमें मौजूदा एवं प्रस्तावित सभी जल स्रोतों, जलाशयों, उपचार संयंत्रों, पंपिंग सिस्टम तथा ट्रांसमिशन नेटवर्क का पूर्ण मैपिंग अनिवार्य है।
तकनीकी टीम ने चित्रों के साथ स्टेप-बाय-स्टेप मार्गदर्शन प्रस्तुत किया जिसमें योजनाओं की पहचान, मर्ज या डी-मर्ज करके आरपीडब्ल्यूएसएस आईडी बनाना, योजना से लाभान्वित गांवों व ढाणियों का चयन, जल स्रोतों (नए स्रोतों सहित) का मैपिंग, कच्चे पानी के जलाशय व ट्रांसमिशन मेन, वाल्व एवं हाइड्रोलिक कंट्रोल कंपोनेंट्स की एंट्री, संबंधित जल शोधन संयंत्रों (डब्ल्यूटीपी) की जानकारी, क्लियर वॉटर ट्रांसमिशन मेन एवं वाल्व पंप हाउस (गैर-ग्रेविटी सिस्टम) का मैपिंग, एमबीआर/जेडबीआर यूनिट्स व ओवरहेड टैंकों का समावेश, वितरण बिंदु तक फीडर मेन की एंट्री शामिल हैं। मिशन निदेशक ने स्पष्ट निर्देश दिए कि अंतिम संरचना अपलोड करने से पहले सभी डिविजनों को पूरी तरह सत्यापित एवं फील्ड से मिलान करने वाली दस्तावेजी तैयार करनी होगी, ताकि वैलिडेशन और कार्यान्वयन के दौरान कोई विसंगति न आए। उन्होंने सर्कलों से मदर-चाइल्ड स्कीम्स की जानकारी तत्काल उपलब्ध कराने को कहा ताकि जल शक्ति मंत्रालय, राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के निर्देशानुसार एकल आईडी बनाई जा सके। मिशन निदेशक ने अधीक्षण अभियंताओं को युद्धस्तर पर प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए, क्योंकि इससे इन योजनाओं को भविष्य में निश्चित फंडिंग मिल सकेगी।
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श्रीनगर। जल जीवन मिशन, जम्मू-कश्मीर के मिशन निदेशक की अध्यक्षता में सोमवार को ग्रामीण पाइप्ड जलापूर्ति योजनाओं (आरपीडब्ल्यूएसएस) के आउट-विलेज इंफ्रास्ट्रक्चर से संबंधित डिजिटल आईडी बनाने की प्रगति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस दौरान निदेशक ने अधिकारियों को डिजिटल आई बनाने में तेजी लाने के निर्देश दिए।
मुख्य एजेंडा जल जीवन मिशन के डिजिटल फ्रेमवर्क के तहत आरपीडब्ल्यूएसएस के आउट-विलेज कंपोनेंट के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर का विवरण शीघ्र तैयार कर पोर्टल पर अपलोड करने का था। मिशन निदेशक ने कहा कि योजनाओं की संरचना (स्कीम आर्किटेक्चर) को समयबद्ध और सटीक तरीके से सेट करना होगा। इसमें मौजूदा एवं प्रस्तावित सभी जल स्रोतों, जलाशयों, उपचार संयंत्रों, पंपिंग सिस्टम तथा ट्रांसमिशन नेटवर्क का पूर्ण मैपिंग अनिवार्य है।
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तकनीकी टीम ने चित्रों के साथ स्टेप-बाय-स्टेप मार्गदर्शन प्रस्तुत किया जिसमें योजनाओं की पहचान, मर्ज या डी-मर्ज करके आरपीडब्ल्यूएसएस आईडी बनाना, योजना से लाभान्वित गांवों व ढाणियों का चयन, जल स्रोतों (नए स्रोतों सहित) का मैपिंग, कच्चे पानी के जलाशय व ट्रांसमिशन मेन, वाल्व एवं हाइड्रोलिक कंट्रोल कंपोनेंट्स की एंट्री, संबंधित जल शोधन संयंत्रों (डब्ल्यूटीपी) की जानकारी, क्लियर वॉटर ट्रांसमिशन मेन एवं वाल्व पंप हाउस (गैर-ग्रेविटी सिस्टम) का मैपिंग, एमबीआर/जेडबीआर यूनिट्स व ओवरहेड टैंकों का समावेश, वितरण बिंदु तक फीडर मेन की एंट्री शामिल हैं। मिशन निदेशक ने स्पष्ट निर्देश दिए कि अंतिम संरचना अपलोड करने से पहले सभी डिविजनों को पूरी तरह सत्यापित एवं फील्ड से मिलान करने वाली दस्तावेजी तैयार करनी होगी, ताकि वैलिडेशन और कार्यान्वयन के दौरान कोई विसंगति न आए। उन्होंने सर्कलों से मदर-चाइल्ड स्कीम्स की जानकारी तत्काल उपलब्ध कराने को कहा ताकि जल शक्ति मंत्रालय, राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के निर्देशानुसार एकल आईडी बनाई जा सके। मिशन निदेशक ने अधीक्षण अभियंताओं को युद्धस्तर पर प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए, क्योंकि इससे इन योजनाओं को भविष्य में निश्चित फंडिंग मिल सकेगी।
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