पानी में तैरता हुआ डाकघर: अंग्रेजों के जमाने से डाक बांट रहा डल झील का ये डाकघर, म्यूजियम भी है इसमें
अंग्रेजों के जमाने से यह डाकघर तैर रहा है। यह डाकघर दो कमरों वाले हाउसबोट में चलता है। एक में दफ्तर और दूसरे में म्यूजियम है। यहां की मुहर और म्यूजियम लोगों को आकर्षित करते हैं।
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जन्नत के नाम से प्रसिद्ध कश्मीर की दुनिया दीवानी है। यहां के पर्यटन स्थलों को निहारने के लिए रोजाना देश-दुनिया से लोग पहुंचते हैं। हर पर्यटक यहां की डल झील के किनारे जरूर पहुंचता और शिकारों के साथ यहां के तैरने वाले डाकघर को भी देखता है।
अंग्रेजों के जमाने से यह डाकघर तैर रहा है। यह डाकघर दो कमरों वाले हाउसबोट में चलता है। एक में दफ्तर और दूसरे में म्यूजियम है। यहां की मुहर और म्यूजियम लोगों को आकर्षित करते हैं। यह घाटी की प्रमुख हैरिटेज इमारतों में स्थान रखता है।
डल झील पर तैरता डॉकघर आज भी डाक बांटने के साथ अपने अन्य काम कर रहा है। 2011 में इसे नया नाम,फ्लोटिंग पोस्ट ऑफिस मिला था। पहले इसे नेहरू पार्क पोस्ट ऑफिस के नाम से जाना जाता था। कोई भी पर्यटक जब यहां घूमने आता है तो वह यहां से कोई न कोई चीज यादगार के रूप में ले जाता है। डाकघर में वर्तमान में यहां 3000 हजार से अधिक खाताधारक हैं। इनकी संख्या में इजाफा हो रहा है।
टिकट, पोस्टकार्ड पर दिखती है कश्मीर की झलक
ऐतिहासिक डाकघर के टिकट और पोस्टकार्ड पर कश्मीर की झलक दिखती है। इनमें कश्मीर की संस्कृति, हस्तशिल्प, मुगल गार्डन, ट्यूलिप गार्डन और चिनार आदि की तस्वीरें हैं। यह न केवल पर्यटकों, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र हैं।
स्थानीय लोग बच्चों को इसे दिखाने के लिए लाते हैं। इसकी मुहर भी अन्य डाकघरों से अलग है। पोस्ट कार्ड पर पर्यटक यहां की मुहर जरूर लगवाते हैं। मुहर लगने से पोस्टकार्ड पर झील में नाव को आगे बढ़ाते हुए चप्पू चलाते शिकारे वाले की छवि बनती है।