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ट्रैफिक ई-चालान के लिए निजी स्मार्टफोन का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता : कोर्ट
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। श्रीनगर की एक अदालत ने फैसला सुनाया है कि पुलिसकर्मियों के निजी मोबाइल फोन को सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स 1989 के नियम 167ए के तहत अधिकृत इलेक्ट्रॉनिक एनफोर्समेंट डिवाइस नहीं माना जा सकता।
यह आदेश श्रीनगर के स्पेशल मोबाइल मजिस्ट्रेट की अदालत ने पारित किया जिसकी अध्यक्षता शब्बीर अहमद मलिक कर रहे थे। यह आदेश ट्रैफिक नियमों के कथित उल्लंघन के लिए जारी किए गए कई ई-चालानों को चुनौती देने वाली एक याचिका को स्वीकार करते हुए दिया गया।
नियम 167ए के दायरे पर ध्यान केंद्रित करते हुए अदालत ने टिप्पणी की कि एक निजी स्मार्टफोन, चाहे वह तकनीकी रूप से कितना भी उन्नत क्यों न हो, केवल इसलिए एक निर्धारित एनफोर्समेंट डिवाइस का कानूनी दर्जा हासिल नहीं कर लेता कि उसका इस्तेमाल कोई पुलिस अधिकारी कर रहा है।
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अदालत ने कहा कि सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स का नियम 167ए इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से ट्रैफिक एनफोर्समेंट की एक डिजिटल और पारदर्शी प्रणाली को सुविधाजनक बनाने के लिए पेश किया गया था। अदालत ने कहा कि यह नियम ट्रैफिक उल्लंघन के लिए चालान जारी करने हेतु इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल की परिकल्पना करता है जो पारंपरिक लिखित या कागज़ी चालान प्रणाली का एक आधुनिक विकल्प है।
अदालत ने कहा कि नियम 167Aए की समग्र योजना को सीधे तौर पर पढ़ने से यह स्पष्ट हो जाता है कि एक चालान इलेक्ट्रॉनिक एनफोर्समेंट डिवाइस के माध्यम से ही जारी किया जाना चाहिए। इस डिवाइस के पास राज्य सरकार के किसी नामित प्राधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित एक अनुमोदन प्रमाण पत्र होना चाहिए जो यह प्रमाणित करता हो कि डिवाइस सटीक है और ठीक से काम कर रहा है। अदालत ने कहा कि इस अनुमोदन प्रमाण पत्र को हर साल नवीनीकृत कराना आवश्यक है।
अदालत ने टिप्पणी की, इसमें इस्तेमाल किया गया शब्द इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस किसी भी व्यावसायिक रूप से उपलब्ध मोबाइल फोन या किसी पुलिस अधिकारी के निजी हैंडहेल्ड डिवाइस का पर्याय नहीं है।
इस मामले में, कथित उल्लंघनकर्ता ने इस आधार पर चालानों को चुनौती दी थी कि फोटो में कोई वास्तविक उल्लंघन नहीं दिख रहा था और कुछ चालान अस्पष्ट थे तथा उनके साथ कोई ठोस विवरण नहीं था। एलडी हॉस्पिटल रोड, गोगजी बाग, श्रीनगर में ट्रैफिक संकेतों की अवहेलना का आरोप लगाने वाले एक चालान के संबंध में याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि उस जगह पर कोई भी चालू ट्रैफिक संकेत मौजूद नहीं था।
याचिका में यह भी कहा गया कि वैध निर्देशों की अवहेलना का आरोप लगाने वाले चालान यह बताने में विफल रहे कि कौन सा निर्देश दिया गया था, किसने दिया था और किस तरह से कथित तौर पर उसका उल्लंघन किया गया था। इन दलीलों को सही मानते हुए, अदालत ने फैसला दिया कि ये चालान नियम 167ए की अनिवार्य प्रक्रियागत जरूरतों और सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए निर्देशों का उल्लंघन करते हैं जिससे वे क्रियागत रूप से दोषपूर्ण और कानूनी रूप से कमजोर हो जाते हैं। इसलिए अदालत ने इन चालानों को रद्द कर दिया।
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श्रीनगर। श्रीनगर की एक अदालत ने फैसला सुनाया है कि पुलिसकर्मियों के निजी मोबाइल फोन को सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स 1989 के नियम 167ए के तहत अधिकृत इलेक्ट्रॉनिक एनफोर्समेंट डिवाइस नहीं माना जा सकता।
यह आदेश श्रीनगर के स्पेशल मोबाइल मजिस्ट्रेट की अदालत ने पारित किया जिसकी अध्यक्षता शब्बीर अहमद मलिक कर रहे थे। यह आदेश ट्रैफिक नियमों के कथित उल्लंघन के लिए जारी किए गए कई ई-चालानों को चुनौती देने वाली एक याचिका को स्वीकार करते हुए दिया गया।
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नियम 167ए के दायरे पर ध्यान केंद्रित करते हुए अदालत ने टिप्पणी की कि एक निजी स्मार्टफोन, चाहे वह तकनीकी रूप से कितना भी उन्नत क्यों न हो, केवल इसलिए एक निर्धारित एनफोर्समेंट डिवाइस का कानूनी दर्जा हासिल नहीं कर लेता कि उसका इस्तेमाल कोई पुलिस अधिकारी कर रहा है।
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अदालत ने कहा कि सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स का नियम 167ए इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से ट्रैफिक एनफोर्समेंट की एक डिजिटल और पारदर्शी प्रणाली को सुविधाजनक बनाने के लिए पेश किया गया था। अदालत ने कहा कि यह नियम ट्रैफिक उल्लंघन के लिए चालान जारी करने हेतु इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल की परिकल्पना करता है जो पारंपरिक लिखित या कागज़ी चालान प्रणाली का एक आधुनिक विकल्प है।
अदालत ने कहा कि नियम 167Aए की समग्र योजना को सीधे तौर पर पढ़ने से यह स्पष्ट हो जाता है कि एक चालान इलेक्ट्रॉनिक एनफोर्समेंट डिवाइस के माध्यम से ही जारी किया जाना चाहिए। इस डिवाइस के पास राज्य सरकार के किसी नामित प्राधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित एक अनुमोदन प्रमाण पत्र होना चाहिए जो यह प्रमाणित करता हो कि डिवाइस सटीक है और ठीक से काम कर रहा है। अदालत ने कहा कि इस अनुमोदन प्रमाण पत्र को हर साल नवीनीकृत कराना आवश्यक है।
अदालत ने टिप्पणी की, इसमें इस्तेमाल किया गया शब्द इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस किसी भी व्यावसायिक रूप से उपलब्ध मोबाइल फोन या किसी पुलिस अधिकारी के निजी हैंडहेल्ड डिवाइस का पर्याय नहीं है।
इस मामले में, कथित उल्लंघनकर्ता ने इस आधार पर चालानों को चुनौती दी थी कि फोटो में कोई वास्तविक उल्लंघन नहीं दिख रहा था और कुछ चालान अस्पष्ट थे तथा उनके साथ कोई ठोस विवरण नहीं था। एलडी हॉस्पिटल रोड, गोगजी बाग, श्रीनगर में ट्रैफिक संकेतों की अवहेलना का आरोप लगाने वाले एक चालान के संबंध में याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि उस जगह पर कोई भी चालू ट्रैफिक संकेत मौजूद नहीं था।
याचिका में यह भी कहा गया कि वैध निर्देशों की अवहेलना का आरोप लगाने वाले चालान यह बताने में विफल रहे कि कौन सा निर्देश दिया गया था, किसने दिया था और किस तरह से कथित तौर पर उसका उल्लंघन किया गया था। इन दलीलों को सही मानते हुए, अदालत ने फैसला दिया कि ये चालान नियम 167ए की अनिवार्य प्रक्रियागत जरूरतों और सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए निर्देशों का उल्लंघन करते हैं जिससे वे क्रियागत रूप से दोषपूर्ण और कानूनी रूप से कमजोर हो जाते हैं। इसलिए अदालत ने इन चालानों को रद्द कर दिया।