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गुच्छी की खेती से ग्रामीण आजीविका होगी मजबूत : उमर
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- मुख्यमंत्री ने की गुच्छी की खेती में स्कॉस्ट-के की उपलब्धि की सराहना, दी बधाई
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शनिवार को शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (स्कॉस्ट-के) को मोरेल मशरूम (गुच्छी) अनुसंधान में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल करने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीण आजीविका मजबूत होगी।
उन्होंने इसे वैज्ञानिक नवाचार की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। एक संदेश में मुख्यमंत्री ने शोधकर्ताओं के काम की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के प्रयासों से न केवल इस क्षेत्र की कृषि-अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा बल्कि वैश्विक वैज्ञानिक और कृषि समुदाय में भी इसकी स्थिति बेहतर होगी।
यह उपलब्धि मोरेल मशरूम की खेती की तकनीकों के सफल मानकीकरण से संबंधित है। स्थानीय रूप से इसे गुच्छी मशरूम के नाम से जाना जाता है। यह पारंपरिक रूप से जंगलों में उगता है और दुनिया के सबसे महंगे खाने योग्य मशरूमों में से एक है। स्कॉस्ट-के के वैज्ञानिकों ने नियंत्रित परिस्थितियों में जिसमें ग्रीनहाउस और खुले मैदान का वातावरण शामिल है। इस मशरूम को उगाने के तरीके विकसित किए हैं। इससे यह संभावना बनी है कि यह मशरूम, जो अब तक जंगलों पर निर्भर एक उत्पाद था, एक बड़े पैमाने पर किए जाने वाले कृषि उद्यम में बदल सकता है।
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पहाड़ी क्षेत्रों में आय के नए रास्ते खुलेंगे
अधिकारियों और विशेषज्ञों ने कहा है कि इस सफलता से जंगली संग्रह पर निर्भरता कम हो सकती है। इसकी निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित हो सकती है और किसानों के लिए विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में आय के नए रास्ते खुल सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह का नवाचार जम्मू और कश्मीर में आर्थिक और कृषि परिवर्तन को आगे बढ़ाने में वैज्ञानिक संस्थानों की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शनिवार को शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (स्कॉस्ट-के) को मोरेल मशरूम (गुच्छी) अनुसंधान में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल करने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीण आजीविका मजबूत होगी।
उन्होंने इसे वैज्ञानिक नवाचार की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। एक संदेश में मुख्यमंत्री ने शोधकर्ताओं के काम की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के प्रयासों से न केवल इस क्षेत्र की कृषि-अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा बल्कि वैश्विक वैज्ञानिक और कृषि समुदाय में भी इसकी स्थिति बेहतर होगी।
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यह उपलब्धि मोरेल मशरूम की खेती की तकनीकों के सफल मानकीकरण से संबंधित है। स्थानीय रूप से इसे गुच्छी मशरूम के नाम से जाना जाता है। यह पारंपरिक रूप से जंगलों में उगता है और दुनिया के सबसे महंगे खाने योग्य मशरूमों में से एक है। स्कॉस्ट-के के वैज्ञानिकों ने नियंत्रित परिस्थितियों में जिसमें ग्रीनहाउस और खुले मैदान का वातावरण शामिल है। इस मशरूम को उगाने के तरीके विकसित किए हैं। इससे यह संभावना बनी है कि यह मशरूम, जो अब तक जंगलों पर निर्भर एक उत्पाद था, एक बड़े पैमाने पर किए जाने वाले कृषि उद्यम में बदल सकता है।
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पहाड़ी क्षेत्रों में आय के नए रास्ते खुलेंगे
अधिकारियों और विशेषज्ञों ने कहा है कि इस सफलता से जंगली संग्रह पर निर्भरता कम हो सकती है। इसकी निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित हो सकती है और किसानों के लिए विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में आय के नए रास्ते खुल सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह का नवाचार जम्मू और कश्मीर में आर्थिक और कृषि परिवर्तन को आगे बढ़ाने में वैज्ञानिक संस्थानों की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।